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Sri Lanka: गंभीर आर्थिक संकट से कमरतोड़ महंगाई, मजबूरी में यह काम भी करने को बेबस हुईं लड़कियां
Sun, 02 Oct 2022 04:15 PM IST
निर्मल कांत
एजेंसी, कोलंबो
एजेंसी, कोलंबो
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 02 Oct 2022 04:15 PM IST
सार
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति मैत्रिपला सिरिसेना ने कहा कि बिगड़ते आर्थिक हालात के कारण सामाजिक समस्याएं ज्यादा गंभीर हो गई हैं। जो परिवार अब खर्च उठाने की स्थिति में नहीं हैं, उन घरों की लड़कियां वेश्यावृत्ति का सहारा ले रही हैं।
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Sri Lanka Crisis
- फोटो : ANI
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विस्तार
श्रीलंका में जारी गंभीर आर्थिक संकट के कारण अब बड़ी संख्या में लड़कियां देह व्यापार करने को मजबूर हो रही हैं। खासकर गरीब घरों की लड़कियां मजबूरी में ये धंधा अपना रही हैं। इन परिवारों के लिए अकल्पनीय महंगाई का सामना करना अब लगातार ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है। इस वर्ष श्रीलंका में महंगाई दर लगातार लगभग 70 प्रतिशत के आसपास चल रही है। लड़कियों के देह व्यापार में धकेले जाने के बारे में ताजा खुलासा पूर्व राष्ट्रपति मैत्रिपला सिरिसेना ने किया है।
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सिरिसेना ने श्रीलंका के अखबार अरुणा को दिए एक विशेष इंटरव्यू में यह बात कही। उन्होंने कहा कि बिगड़ते आर्थिक हालात के कारण सामाजिक समस्याएं ज्यादा गंभीर हो गई हैं। उन्होंने कहा- ‘जो परिवार अब खर्च उठाने की स्थिति में नहीं हैं, उन घरों की लड़कियां वेश्यावृत्ति का सहारा ले रही हैं। पुलिस अधिकारियों ने हमें बताया है कि ऐसा बड़े पैमाने पर हो रहा है।’
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डॉलर की तुलना में श्रीलंकाई मुद्रा की कीमत इस समय 360 रुपये तक गिर चुकी है। इस वर्ष आर्थिक संकट शुरू होने के समय ये कीमत 182 रुपये थी। उधर, महंगाई लगातार उस सीमा पर है, जिसके बारे में पहले कभी सोचा तक नहीं गया था। इन हालात के बीच बड़ी संख्या में श्रीलंकाई परिवार अपनी जगहों से विस्थापित हुए हैं। उधर, गरीब परिवारों की लड़कियां देह व्यापार को अपनाने पर मजबूर हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी संख्या में लोग नौकरी की तलाश में पश्चिम एशियाई देशों की तरफ पलायन कर गए हैं।
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इन हालात के बीच कई अर्थशास्त्रियों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने सरकार से मुद्रा विनिमय को नियंत्रित करने की मांग की है, ताकि रुपये की गिरती कीमत पर लगाम लग सके। साथ ही उन्होंने गरीब परिवारों को आर्थिक मदद देने की अपील की है। लेकिन सरकारी सूत्रों ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की कड़ी शर्तों के कारण सरकार के हाथ बंधे हुए हैं। आईएमएफ ने नोट छाप कर जनता की सहायता करने की नीति ना अपनाने की शर्त लगाई है।
मीडिया रिपोर्टो के मुताबिक, आईएमएफ की ऐसी शर्तें श्रीलंका में लगातार अधिक अलोकप्रिय होती जा रही हैं। कई हलकों से शिकायत की गई है कि आईएमएफ ने 2.9 बिलियन डॉलर का कर्ज मंजूर करने के बावजूद अभी तक कोई रकम जारी नहीं की है। इस बीच राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की सरकार ने खुद को आईएमएफ की शर्तों से बांध लिया है।
विनिमय दर को नियंत्रित करने और नोट छाप कर लोगों की मदद करने के मुद्दों पर देश में तीखी बहस छिड़ गई है। विनिमय नियंत्रित करने के समर्थक अर्थशास्त्रियों ने दलील दी है कि आर्थिक संकट के वक्त ऐसी नीति कई लैटिन अमेरिकी देशों ने अपनाई थी। आज भी जिन देशों में ऐसी नीति है, वहां की मुद्रा बेहतर स्थिति में है। इसमें हांगकांग, खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों और वियतनाम का जिक्र किया गया है, जहां मुद्रा की दर सीधे विनिमय बाजार में तय नहीं होती। बल्कि वहां के सेंट्रल बैंक इसे तय करते हैं।
मौजूदा नीति के आलोचकों ने कहा है कि अगर सरकार ने विनिमय दर को नियंत्रित करने और लोगों को सीधे आर्थिक मदद देने की नीति नहीं अपनाई, तो वेश्यावृत्ति जैसी सामाजिक बुराइयों में हो रही बढ़ोतरी को रोकना असंभव हो जाएगा।