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जर्मनी: वित्त मंत्रालय कौन लेगा, इसे लेकर अटकी हुई है नई सरकार पर रजामंदी

Tue, 26 Oct 2021 07:39 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 26 Oct 2021 07:39 PM IST
सार

जर्मनी में सितंबर के आखिर में नई संसद के लिए चुनाव हुआ था। उसमें एसपीडी सबसे बड़ा दल बन कर उभरी। जर्मनी की सरकारी प्रसारण संस्था डोयेचेविले की वेबसाइट डीडब्ल्यू.कॉम के मुताबिक वित्त मंत्रालय को लेकर ग्रीन पार्टी और एफडीपी में खींचतान चल रही है...

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Germany: The new government is stuck on who will take the finance ministry portfolio, here is the reason
जर्मनी का संसद भवन - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जर्मनी में नई सरकार के गठन के लिए तीन पार्टियों में लगभग सहमति बन गई है। लेकिन वित्त मंत्रालय किसे मिलेगा, इस सवाल को लेकर बात अटकी हुई है। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी), ग्रीन पार्टी, और फ्री डेमोक्रेट्स (एफडीपी) के बीच नई सरकार बनाने पर बातचीत चल रही है। इनमें मिल कर सरकार बनाने पर सहमति बन गई है। लेकिन मंत्रालयों के बंटवारे पर बात अटकी हुई है। इन पार्टियों ने कहा है कि अंतिम सहमति बनने में अभी एक महीना और लग सकता है।

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वित्तमंत्री का पद महत्वपूर्ण

जर्मनी में सितंबर के आखिर में नई संसद के लिए चुनाव हुआ था। उसमें एसपीडी सबसे बड़ा दल बन कर उभरी। जर्मनी की सरकारी प्रसारण संस्था डोयेचेविले की वेबसाइट डीडब्ल्यू.कॉम के मुताबिक वित्त मंत्रालय को लेकर ग्रीन पार्टी और एफडीपी में खींचतान चल रही है। राजनीति शास्त्री उवे जुन ने इस वेबसाइट से कहा- ‘जर्मनी में चांसलर के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका वित्त मंत्री की ही होती है। इसकी वजह यह है कि बजट बनाना उसका काम होता है। यानी वित्तीय संसाधनों से संबंधित नीति का निर्माण उसके हाथ में होता है।’

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जुन ने बताया कि बजट को भले संसद से पारित करना पड़ता है, लेकिन उससे पहले की सारी योजना वित्त मंत्रालय में तैयार होती है। जर्मनी के वित्त मंत्रालय में 2000 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। ये कर्मचारी ही बाकी सभी विभागों की वित्तीय जरूरतों की पड़ताल करते हैं और उसके मुताबिक बजट आवंटित करते हैं। जुन ने बताया कि पिछले 12 साल में जर्मनी में दो वित्त मंत्री हुए। पहले क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी (सीडीयू) के वोल्फगांग शाउबल थे और उसके बाद एसपीडी के ओलाफ शोल्ज इस पद पर आए। दोनों की अपने समय में सरकार के भीतर प्रभावशाली भूमिका रही।

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वीटो का अधिकार

एसपीडी के हान्स आइचेल 1999 से 2005 के बीच जर्मनी के वित्त मंत्री थे। उन्होंने एक जर्मनी रेडियो स्टेशन से बातचीत में कहा कि वित्त मंत्री बाकी सभी मंत्रालयों की मांग को वीटो कर सकता है। आइचेल ने कहा कि लेकिन सरकार की सफलता किसी ताकतवर मंत्री से नहीं, बल्कि मंत्रिमंडल के भीतर आपसी सहयोग पर निर्भर करती है।


जानकारों के मुताबिक जर्मनी के वित्त मंत्री की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वजनदार भूमिका होती है। आइचेल ने कहा कि जर्मनी का वित्त मंत्रालय ही असली यूरोपियन मंत्रालय है। विश्लेषकों के मुताबिक इसी वजह से वित्त मंत्रालय नई सरकार के गठन में अभी तक एक रुकावट बना हुआ है। चूंकि चांसलर एसपीडी के शोल्ज बनेंगे, इसलिए वित्त मंत्रालय का फैसला ग्रीन और एफडीपी के बीच होना है। खबरों के मुताबिक इन दोनों में से कोई पार्टी यह मंत्रालय छोड़ने को राजी नहीं है।

 
एफडीपी की तरफ से इस पद के लिए उसके नेता क्रिश्चियन लिंडनर दावेदार हैं। जबकि ग्रीन पार्टी अपने नेता रॉबर्ट हैबेक को वित्त मंत्री बनाना चाहती है। ग्रीन पार्टी के अंदर यह राय है कि अगर वित्त मंत्रालय उसे नहीं मिला, तो वह जलवायु परिवर्तन रोकने संबंधी अपनी योजना को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर पाएगी। जबकि एफडीपी का मुख्य एजेंडा मुक्त बाजार समर्थक आर्थिक नीतियां लागू करना है। इसके लिए जरूरी है कि वित्त मंत्रालय उसके पास हो।

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