Germany economic crisis: जर्मनी के सेंट्रल बैंक को ही अब चाहिए बेलआउट!
ऑडिटर के मुताबिक बुंडेस बैंक को 650 बिलियन यूरो से अधिक का नुकसान हो चुका है। इसलिए इस बैंक को पूंजी देने की जरूरत पड़ सकती है। उस हालत में जर्मन सरकार क अपने बजट से सेंट्रल बैंक को धन आवंटित करना होगा...
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किसी देश के सेंट्रल बैंक को बेलआउट की जरूरत पड़ी हो, ऐसी खबर आम नहीं है। लेकिन ऐसी स्थिति जर्मनी में आ सकती है। खबर है कि गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे इस देश के सेंट्रल बैंक- बुंडेस बैंक- को यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ईसीबी) के बॉन्ड खरीद प्रोग्राम के कारण भारी नुकसान हुआ है। इसलिए उसे बेलआउट की जरूरत पड़ सकती है। जर्मनी के संघीय ऑडिटर ने यह चेतावनी दी है।
ऑडिटर के मुताबिक बुंडेस बैंक को 650 बिलियन यूरो से अधिक का नुकसान हो चुका है। इसलिए इस बैंक को पूंजी देने की जरूरत पड़ सकती है। उस हालत में जर्मन सरकार क अपने बजट से सेंट्रल बैंक को धन आवंटित करना होगा। इस खबर से जर्मनी में चिंता गहरा गई है। जर्मनी यूरोपियन यूनियन (ईयू) के तहत सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद से वहां आर्थिक संकट गहराता चला गया है। जर्मनी आधिकारिक रूप से मंदी का शिकार हो चुका है। इस बीच गुजरे महीनों में वहां उद्योगों के बंद होने की खबरें लगातार आई हैं।
ईसीबी ने कुछ समय पहले पब्लिक सेक्टर परचेज प्रोग्राम (पीएसपीपी) की शुरुआत की थी। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक यह उसी तरह की योजना है, जैसी पहले अमेरिका और ब्रिटेन में अपनाई गई थी और जिसके तहत बड़े पैमाने पर मुद्रा की छपाई की गई थी। ईसीबी ने इस योजना के तहत यूरो की छपाई करके वित्तीय बाजार में इस मुद्रा की उपलब्धता बढ़ा दी। इस कारण बॉन्ड खरीदने की होड़ लग गई। चूंकि नए बॉन्ड्स ब्याज दर अधिक है, इसलिए पुराने बॉन्ड बेचने की होड़ लगी। इस कारण बुंडेस बैंक के बॉन्ड्स की कीमत बाजार में गिर गई और उसे भारी नुकसान हुआ।
हाल ही में ब्रिटिश अखबार डेली टेलीग्राफ ने इस बारे में एक रिपोर्ट छापी है। रिपोर्ट के मुताबिक ईसीबी के जो बॉन्ड बुंडेस बैंक के पास हैं, उन पर उसे एक बिलियन यूरो से अधिक का नुकसान हो चुका है। पिछले साल ब्रिटेन में जब बैंक ऑफ इंग्लैंड (ब्रिटेन के सेंट्रल बैंक) ने ब्याज दरें बढ़ाई थीं, तब निवेशकों ने ब्रिटिश सरकार के पुराने बॉन्ड्स बेचने शुरू कर दिए थे। इससे ब्रिटिश सरकार गहरे संकट में फंस गई थी। अब उससे ही मिलता-जुलता संकट बुंडेस बैंक के लिए खड़ा हो गया है।
जर्मन सेंट्रल बैंक के प्रेसिडेंट जोआखिम नागेल ने इस वर्ष मार्च में चेतावनी दी थी कि बुंडेस बैंक के मुनाफा-नुकसान खाते पर बोझ बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में यह बोझ के बहुत ज्यादा बढ़ जाने की आशंका है। उन्होंने कहा था कि बन रहे हालात के बीच बुंडेस बैंक के पास मौजूद 19.2 बिलियन यूरो का आपातकालीन कोष आने वाले वर्षों में चूक जाएगा। अति आपातकाल के लिए बुंडेस बैंक के पास 2.5 बिलियन डॉलर का एक अतिरिक्त कोष है, लेकिन यह भी संकट की गंभीरता को देखते हुए पर्याप्त नहीं है।
नागेल ने कहा था कि आपातकालीन कोष से बुंडेस बैंक इस वर्ष तो अपना काम चला लेगा, लेकिन आने वाले वर्षों में नुकसान की खुद भरपाई करना उसके वश में नहीं रह जाएगा। जानकारों के मुताबिक बीते तीन महीनों में संकट और गहराया है। इसीलिए अब ऑडिटर ने आगाह किया है कि बुंडेस बैंक को बेलआउट की जरूरत पड़ सकती है।