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जर्मनी में पुरुषों के देश छोड़ने पर रोक: सरकार का एलान, 17-45 साल के लोग बाहर नहीं जा सकेंगे; जानिए पूरा मामला

Sat, 04 Apr 2026 04:49 PM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला। Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Sat, 04 Apr 2026 04:49 PM IST
सार

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच आज यूरोपीय देश जर्मनी ने बड़ा फैसला लिया। जर्मनी में आई स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश की सरकार ने 17-45 साल आयुवर्ग के पुरुषों पर देश छोड़ने के मामले में पाबंदियां लगाई हैं। जानिए क्या है पूरा मामला

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Germany Bans Men from Leaving country Govt Announced 17–45 yr age group men cannot go abroad know Details
जर्मनी में पुरुषों के देश छोड़ने पर रोक (देश के झंडे की सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई

विस्तार

जर्मनी में 17 से 45 साल के पुरुषों की विदेश यात्रा को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत इस आयु वर्ग के पुरुषों को तीन महीने से ज्यादा समय के लिए देश छोड़ने से पहले अनुमति लेनी होगी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब जर्मनी अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, अब अगर कोई पुरुष तीन महीने से ज्यादा समय के लिए पढ़ाई, नौकरी या किसी अन्य कारण से विदेश जाना चाहता है, तो उसे जर्मन सेना यानी बुंडेसवेहर से मंजूरी लेनी होगी। यह नियम 1 जनवरी 2026 से लागू किया गया है। पहले यह नियम सिर्फ आपात स्थिति या युद्ध जैसे हालात में लागू होता था, लेकिन अब इसे सामान्य समय में भी लागू कर दिया गया है।
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क्या अब हर पुरुष को विदेश जाने के लिए अनुमति लेनी होगी?
नई व्यवस्था के तहत 17 से 45 साल के पुरुषों को लंबी अवधि के लिए विदेश जाने से पहले सैन्य प्राधिकरण से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह अनुमति बुंडेसवेहर के करियर सेंटर से मिलेगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जरूरत पड़ने पर सेना के लिए योग्य लोगों की जानकारी और उपलब्धता बनी रहे।
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क्या यह फैसला सैन्य तैयारी से जुड़ा है?
जर्मनी सरकार इस कदम को सैन्य मजबूती से जोड़कर देख रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में सेना की संख्या बढ़ाई जाए। फिलहाल जर्मनी की सेना में करीब 1.84 लाख सैनिक हैं, जिसे बढ़ाकर 2035 तक 2.55 से 2.70 लाख तक करने की योजना है। ऐसे में संभावित सैनिकों का रिकॉर्ड रखना जरूरी माना जा रहा है।

क्या युवाओं को सेना से जोड़ने की भी तैयारी है?
नई नीति के तहत 2008 या उसके बाद जन्मे युवाओं को सेना में रुचि से जुड़ा एक फॉर्म भरना होगा। यह पुरुषों के लिए अनिवार्य है, जबकि महिलाएं स्वेच्छा से इसमें भाग ले सकती हैं। सरकार का उद्देश्य युवाओं को भविष्य की सैन्य जरूरतों के लिए तैयार रखना है।


क्या सुरक्षा कारणों से लिया गया यह फैसला?
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच जर्मनी अपनी सुरक्षा नीति को मजबूत कर रहा है। कुछ विश्लेषकों ने यह भी कहा है कि जर्मनी नाटो में एक अहम भूमिका निभाता है, इसलिए उसे अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।

क्या इस फैसले से नागरिक स्वतंत्रता पर सवाल उठे हैं?
इस नियम को लेकर कुछ लोगों ने चिंता भी जताई है कि इससे नागरिकों की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। पहले ऐसा नियम सिर्फ युद्ध या संकट के समय लागू होता था, लेकिन अब सामान्य हालात में भी इसे लागू करना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे जर्मनी की नीति में बदलाव का संकेत मिलता है।

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