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नाटो सतर्क: जर्मनी-स्वीडन के फाइटर जेट ने रूसी टोही विमान को किया ट्रैक; बाल्टिक सागर के ऊपर भर रहा था उड़ान
Mon, 22 Sep 2025 01:11 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Mon, 22 Sep 2025 01:11 AM IST
सार
जर्मन और स्वीडिश लड़ाकू विमानों ने बाल्टिक सागर के ऊपर बिना सूचना उड़ान भर रहे रूसी टोही विमान को ट्रैक किया। स्वीडन के दो ग्रिपेन और जर्मनी के दो यूरोफाइटर ने निगरानी कर तस्वीरें लीं।
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लड़ाकू विमान (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Freepik
विस्तार
जर्मनी और स्वीडन की वायु सेना के लड़ाकू विमानों को रविवार (स्थानीय समयानुसार) को एक रूसी निगरानी विमान को रोकने और ट्रैक करने के लिए तैनात किया गया। सैन्य अधिकारियों ने बताया कि यह विमान बाल्टिक सागर के ऊपर अज्ञात रूप से उड़ान भर रहा था।
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स्वीडन की ओर से दो ग्रिपेन जेट और जर्मनी की ओर से दो यूरोफाइटर जेट अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में तैनात किए गए। उन्होंने रूसी आईएल-20 टोही विमान की निगरानी की और उसकी तस्वीरें भी लीं। स्वीडिश और जर्मन वायु सेना के अधिकारियों ने बताया कि यह विमान बिना किसी उड़ान पथ या रेडियो संपर्क के उड़ान भर रहा था, जिससे उसकी उपस्थिति का संकेत मिल सके।
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रूसी सैन्य व टोही गतिविधियों को लेकर सतर्क नाटो
यह पूरी कार्रवाई बिना किसी घटना के समाप्त हुई। हाल के दिनों में नाटो और यूरोपीय संघ के सदस्य देश अपने हवाई क्षेत्र और उसके आसपास रूसी सैन्य व टोही गतिविधियों के लिए उच्च स्तर की सतर्कता बरत रहे हैं। एस्टोनिया विदेश मंत्रालय के अनुसार, बीते शुक्रवार को भी तीन रूसी लड़ाकू विमान एस्टोनिया के हवाई क्षेत्र में बिना अनुमति घुस गए थे और 12 मिनट तक वहां रहे। इससे पहले नाटो विमानों ने पौलैंड के ऊपर रूसी ड्रोनों को मार गिराया था। इस घटना ने आशंका बढ़ा दी थी कि यूक्रेन का युद्ध पड़ोसी देशों तक फैल सकता है।
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जर्मन विमानों ने पीछा कर स्वीडन को सौंपी निगरानी की जिम्मेदारी
स्वीडिश वायु सेना ने अपने एक्स अकाउंट पर बताया, 'आज जेएएस 39 ग्रिपेन और जर्मन यूरोफाइटर्स ने दक्षिण बाल्टिक सागर के ऊपर उड़ान भरी और अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में एक रूसी आईएल-20 टोही विमान की पहचान और निगरानी की।' जर्मन वायु सेना ने कहा कि उनके विमानों ने पहले रूसी विमान का पीछा किया और फिर निगरानी की जिम्मेदारी नाटो सहयोगी स्वीडन को सौंप दी, जिसके बाद वे उत्तरी जर्मनी के रोस्टॉक-लागे हवाई क्षेत्र में लौट आए।