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हिमाचल के गौरव शर्मा ने न्यूजीलैंड की संसद में ली संस्कृत में शपथ
Thu, 26 Nov 2020 03:47 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, मेलबर्न
एजेंसी, मेलबर्न
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 26 Nov 2020 03:47 AM IST
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New Zealand MP Dr Gaurav Sharma
- फोटो : Twitter@sidhant
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न्यूजीलैंड के सबसे युवा व नवनिर्वाचित सांसद डॉ. गौरव शर्मा ने बुधवार को देश की संसद में संस्कृत में शपथ ली है। 33 वर्षीय डॉ. गौरव हिमाचल प्रदेश में हमीरपुर के रहने वाले हैं और हाल ही में न्यूजीलैंड में हैमिल्टन वेस्ट के लिए उन्हें लेबर पार्टी से संसद सदस्य के रूप में चुना गया है। बता दें कि 2017 में निर्विरोध चुनाव लड़ चुके डॉ. शर्मा ने इस बार नेशनल पार्टी के टिम मैकिंडो को हराया है।
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समोआ और न्यूजीलैंड में भारत के उच्चायुक्त मुक्तेश परदेशी ने ट्विटर पर कहा कि डॉ. गौरव शर्मा ने सबसे पहले न्यूजीलैंड की स्वदेशी माओरी भाषा में शपथ ली, उसके बाद भारत की शास्त्रीय भाषा- संस्कृत, में शपथ लेकर उन्होंने भारत और न्यूजीलैंड दोनों की सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान दिखाया। उन्होंने ऑकलैंड से एमबीबीएस किया और वाशिंगटन से एमबीए किया है और वे हैमिल्टन के नवाटन में जनरल प्रैक्टिशनर के रूप में कार्यरत हैं। वे पूर्व में न्यूजीलैंड, स्पेन, अमेरिका, नेपाल, वियतनाम, मंगोलिया, स्विट्जरलैंड और भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य, नीति, चिकित्सा और परामर्श में शामिल रह चुके हैं।
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हिंदी में इसलिए नहीं ली शपथ
जब एक ट्विटर यूजर ने डॉ. गौरव शर्मा से पूछा कि उन्होंने हिंदी में शपथ क्यों नहीं ली तो उन्होंने कहा कि सभी को खुश करना कठिन है इसलिए मैंने संस्कृत में शपथ लेने का फैसला किया। सच कहूं तो मैंने सोचा था कि हिंदी में शपथ लूं, लेकिन तब मेरी पहली भाषा (पहाड़ी) या पंजाबी को लेकर सवाल उठा। ऐसे में सभी को खुश रखना मुश्किल था जबकि संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं की जननी है इसलिए मैंने शपथ के लिए संस्कृत को चुना।
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परिवार ने किया लंबा संघर्ष
डॉ. गौरव शर्मा ने बताया कि वे 1996 में न्यूजीलैंड चले गए थे। उनके पिता को छह साल तक यहां नौकरी नहीं मिली। परिवार ने बड़ी मुश्किल से वक्त गुजारा। उन्होंने बताया कि मैं समाजसेवा के लिए राजनीति में हूं क्योंकि मेरा परिवार बहुत ही कष्टों से गुजरा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा के रूप में भी मुझे बहुत ज्यादा सरकारी मदद नहीं मिली।