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Hindi News ›   World ›   G20 Summit in Bali: no sign of an end to the confrontation after Joe Biden and Xi Jinping meet

G20 Summit in Bali: अमेरिका और चीन में संवाद बना, लेकिन अविश्वास दूर नहीं हुआ

Tue, 15 Nov 2022 04:06 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बाली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बाली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 15 Nov 2022 04:06 PM IST
सार

G20 Summit in Bali: शिखर वार्ता के दौरान बाइडन ने शी को बताया कि संवाद जारी रखने के लिए वे अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन को अगले साल चीन भेजेंगे। यह इस बात का संकेत है कि नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद दोनों देशों में टूटा संवाद फिर कायम हो गया है...

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G20 Summit in Bali: no sign of an end to the confrontation after Joe Biden and Xi Jinping meet
G20 Summit in Bali: Xi Jinping and Joe Biden - फोटो : Agency

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सोमवार को यहां हुई शिखर वार्ता के बावजूद दोनों देशों में टकराव खत्म होने की सूरत नहीं उभरी है। राष्ट्रपति बाइडन ने इस वार्ता से उम्मीद पहले ही काफी कम रखी थी। व्हाइट हाउस ने कहा था कि वार्ता का मकसद प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित रखना है, ताकि दुर्घटनावश कोई खतरनाक स्थिति ना पैदा हो जाए। टीकाकारों के मुताबिक इस दिशा में कुछ कामयाबी मिली।

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बाइडन-शी शिखर वार्ता की एकमात्र ठोस उपलब्धि यह रही कि अमेरिका और चीन जलवायु परिवर्तन संबंधी आपसी वार्ता को फिर शुरू करने पर सहमत हो गए। बीते अगस्त में जब अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने ताइवान की यात्रा की थी, तब चीन ने यह वार्ता रोक दी थी। विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिका और चीन का साझा रूप से यह कहना भी एक सकारात्मक घटना है कि रूस को यूक्रेन के खिलाफ परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

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दोनों देशों ने बाली शिखर वार्ता के बारे में जो बयान जारी किए, उनसे यह संकेत मिला कि वे आपसी रिश्ते के स्वरूप को ठीक ढंग से समझते हैं। इन बयानों से दोनों देशों की यह समझ सामने आई है कि वे अपने टकराव को युद्ध तक नहीं ले जाना चाहते हैं। शिखर वार्ता के दौरान बाइडन ने शी को बताया कि संवाद जारी रखने के लिए वे अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन को अगले साल चीन भेजेंगे। यह इस बात का संकेत है कि नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद दोनों देशों में टूटा संवाद फिर कायम हो गया है।

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अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के प्रमुख और अमेरिका के रक्षा मंत्री रह चुके लियोन पेनेटा ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘बाइडन-शी वार्ता का परिणाम यह रहा कि दोनों देशों के संबंध अब कूटनीतिक पटरी पर वापस लौट आए हैं। इससे दोनों देश एक दूसरे पर बरसने के बजाय अपनी चिंता के मुद्दों पर एक-दूसरे से बातचीत कर सकेंगे। मेरी राय में यह मुलाकात महत्त्वपूर्ण साबित होगी।’

लेकिन अमेरिका मीडिया की कई टिप्पणियों में कहा गया है कि प्रतिस्पर्धा वाले देशों के संबंधों को सुधारने के लिहाज से शिखर वार्ता की एक सीमा होती है। अमेरिका और चीन जिन वजहों से एक दूसरे को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा समझने लगे, वे कारण अपनी जगह मौजूद हैं। इनके रहते संबंध पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद नहीं जोड़ी जा सकती। शिखर वार्ता से सिर्फ यह जाहिर हुआ कि दोनों देश अभी युद्ध से बचना चाहते हैं।

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है- ‘दोनों देशों को एक दूसरे को अपने मन-माफिक ढालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। न ही उन्हें एक दूसरे की शासन प्रणाली को बदलने का प्रयास करना चाहिए। अमेरिका को कहना कुछ और करना कुछ के अपने तरीके को बदलना चाहिए और जो वादे वह करता है, उस पर ठोस अमल करना चाहिए।’

विश्लेषकों के मुताबिक शिखर वार्ता के बाद आया ये तल्ख बयान संकेत देता है कि दोनों देशों में अविश्वास की खाई गहरी है। बाली वार्ता के बावजूद इसके भरने की संभावना कम ही है।

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