G-20 Summit declaration: जी-20 देश जलवायु परिवर्तन के तत्काल खतरे से निपटने के लिए प्रतिबद्ध, इन मुद्दों पर बनी सहमति
शिखर सम्मेलन में समूह के नेताओं ने कहा कि भारत सहित जी-20 देश जलवायु परिवर्तन के तत्काल खतरे से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जी-20 नेताओं ने कहा कि वे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने, जलवायु अनुकूलन और वित्त पोषण को बढ़ाएंगे।
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दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के समूह जी-20 के शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन रविवार को नेताओं ने कहा भारत सहित जी-20 देश जलवायु परिवर्तन के तत्काल खतरे से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जी-20 नेताओं ने कहा कि वे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने, जलवायु अनुकूलन और वित्त पोषण को बढ़ाएंगे। सम्मेलन में जी-20 देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए गरीब देशों की मदद करने को लेकर सालाना 100 अरब डॉलर जुटाने के अमीर देशों के पुराने वादों को दोहराया और उन्हें जलवायु अनुकूलन में मदद के लिए वित्त बढ़ाने का वादा किया। सम्मेलन में सदी के तकरीबन मध्य तक 'नेट जीरो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन' या 'कार्बन न्यूट्रेलिटी' की प्रासंगिकता को स्वीकार किया गया है।
इसके अलावा जी-20 के नेताओं ने कोरोना महामारी से निपटने के प्रयासों के लिए स्वास्थ्य सेवा और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, वैज्ञानिकों को धन्यवाद दिया। नेताओं ने कहा कि भारत सहित जी-20 देश महामारी के लिए आम प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए सहमत हैं और सबसे कमजोर लोगों पर ध्यान केंद्रित करते हुए वैश्विक सुधार का मार्ग प्रशस्त करते हैं। सम्मेलन में महामारी के खिलाफ वैक्सीन को सबसे महत्वपूर्ण बताया और कहा गया कि इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र उपाय है।
सम्मेलन में जी-20 देशों ने 2021 के अंत तक कम से कम 40 फीसदी और 2022 के मध्य तक 70 फीसदी आबादी की टीकाकरण के वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयासों पर सहमति जताई। सम्मेलन में यह भी घोषणा की गई कि जी-20 राष्ट्र सभी के लिए खाद्य सुरक्षा और पर्याप्त पोषण प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस मामले में कोई नहीं पीछे हटेगा। इसके अलावा जी-20 के नेताओं ने सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से अंतरराष्ट्रीय यात्रा को फिर से शुरू करने के प्रयासों पर सहमति जताई। जी-20 के नेताओं ने घोषणा की कि हम 2022 में इंडोनेशिया, 2023 में भारत और 2024 में ब्राजील में फिर से मिलने के लिए उत्सुक हैं।
जी 20 ने कोयले से बिजली उत्पादन जल्द समाप्त करने का लिया संकल्प
कार्बन उत्सर्जन के बढ़ते खतरों के बीच विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले जी 20 देशों के नेताआें ने ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक नियंत्रित रखने के लिए ‘सार्थक और प्रभावी’ कदम उठाने पर सहमति जताई।
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होने वाले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से पहले दो दिवसीय मंथन बैठक में इन नेताओं ने कार्बन उत्सर्जन को समाप्त करने के लिए शताब्दी के मध्य तक का लक्ष्य रखा है। कोयला आधारित बिजली उत्पादन के लिए कोयले की फंडिंग पर जल्द रोक लगाने का लिया संकल्प।
जी 20 सम्मेलन का मेजबान इटली कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लए इस पर कोई ठोस लक्ष्य तय होते हुए देखना चाहता था और गरीब देशों को बढ़ते तापमान के प्रभाव से बचाने में मदद करना चाहता था। लेकिन इसके लिए निश्चित समय सीमा नहीं बताई गई।
जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के लिए तैयार अंतिम मसौदे में कहा गया है कि कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण के लिए यदि जरूरी हो तो मौजूदा राष्ट्रीय योजनाओं को मजबूत किया जाए। शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए 2050 की तारीख का कोई खास संदर्भ नहीं दिया गया है।
इन नेताओं का कहना है कि शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य इस शताब्दी के मध्य तक हासिल कर लिया जाएगा। दुनिया का सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक चीन ने इस पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए 2060 का लक्ष्य रखा है। रूस और सऊदी अरब ने भी 2060 का लक्ष्य तय किया है। बताया जाता है जी 20 में शामिल ब्राजील, जर्मनी, भारत और अमेरिका जैसे देश 80 फीसदी से ज्यादा ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन करते हैं।