Hindi News ›   World ›   Fumio Kishida won the election held on Wednesday, now he will become the next Prime Minister of Japan

जापान: नेता पद के चुनाव में लोकप्रियता पर भारी पड़ी एलडीपी की अंदरूनी गुटबाजी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 29 Sep 2021 07:47 PM IST

सार

नेता पद के चुनाव के लिए हुए पहले दौर के मतदान में चार उम्मीदवारों में से कोई 50 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल नहीं कर पाया। इसमें किशिदा पहले नंबर पर, जबकि तारो कानो दूसरे नंबर पर रहे। इसलिए दूसरे दौर में उन दोनों के बीच सीधा मुकाबला हुआ। इस दौर में किशिदा ने कानो को हरा दिया...
फुमियो किशिदा
फुमियो किशिदा - फोटो : [email protected] Fumio Kishida
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विस्तार

जापान में सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के नेता पद में चुनाव में अंदरूनी गुटों का समीकरण निर्णायक साबित हुआ। तमाम जनमत सर्वेक्षणों में टीकाकरण मंत्री तारो कानो को बाकी उम्मीदवारों से काफी अधिक लोकप्रिय बताया गया था। लेकिन बुधवार को हुए चुनाव में जीत फुमियो किशिदा को हाथ लगी। अब किशिदा ही देश के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे।

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नेता पद के चुनाव के लिए हुए पहले दौर के मतदान में चार उम्मीदवारों में से कोई 50 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल नहीं कर पाया। इसमें किशिदा पहले नंबर पर, जबकि तारो कानो दूसरे नंबर पर रहे। इसलिए दूसरे दौर में उन दोनों के बीच सीधा मुकाबला हुआ। इस दौर में किशिदा ने कानो को हरा दिया।


मतदान के पहले चरण में पार्टी कार्यकर्ताओं की तरफ से किशिदा को सिर्फ 110 वोट मिले थे। जबकि पार्टी सांसदों की तरफ से उन्हें 146 वोट मिले। यानी इस दौर में उन्हें कुल 256 वोट मिले। दूसरे दौर में उन्हें इससे एक ज्यादा यानी 257 मत प्राप्त हुए। दूसरे दौर में कानो को महज 170 वोट ही मिले।

नतीजा घोषित होने के बाद टोक्यो के अखबार जापान टाइम्स ने कहा कि जनता के बीच अभी भी किशिदा की पहचान कमजोर ही है। इसलिए ये कहना मुश्किल है कि वे अब नवंबर में तय हुए संसदीय चुनाव में मतदाताओं में कितना उत्साह जगा पाएंगे। किशिदा 64 साल के हैं। उन्हें पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी का माहिर खिलाड़ी समझा जाता है। पिछले साल तत्कालीन प्रधानमंत्री शिन्जो आबे के पद छोड़ने का एलान करने के बाद भी वे नेता पद के चुनाव मे उतरे थे। तब मौजूदा प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा बाजी मार ले गए।

कोरोना महामारी को ठीक से न संभाल पाने के कारण इस साल सुगा की लोकप्रियता काफी गिर गई। महामारी के बीच ओलिंपिक और पैराओलिंपिक खेल कराने की उनकी जिद को लेकर जनता में नाराजगी और बढ़ी। इसी कारण इस महीने के आरंभ में उन्होंने इस्तीफा देने का एलान किया। उधर कोरोना टीकाकरण का ठीक से संचालन करने के कारण तारो कोनो की देश में लोकप्रियता काफी बढ़ी। पिछले हफ्ते एलडीपी कार्यकर्ताओं के बीच कराए गए सर्वे में 46 फीसदी समर्थन कोनो को मिला था। किशिदा को सिर्फ 17 फीसदी कार्यकर्ताओं ने पसंद किया था।

कोनो अमेरिका में पढ़े-लिखे हैं। वे पहले रक्षा और विदेश मंत्री रह चुके हैं। पर्यवेक्षकों ने कहा था कि अपनी लोकप्रियता के कारण वे जनता में एलडीपी के लिए अधिक उत्साह जगाने में सफल होंगे। लेकिन नेता पद के चुनाव में उन्हें मात खानी पड़ी।

अब अगले सोमवार को डियेट (जापानी संसद) का विशेष सत्र होगा, जिसमें किशिदा को औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री नामजद किया जाएगा। उसके तुरंत बाद उन्हें चुनाव अभियान में उतरना होगा। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने एक टिप्पणी में कहा है कि किशिदा के समय में जापान की आर्थिक नीति में कोई ज्यादा बदलाव होने की संभावना नहीं है। तारो कोनो ने अक्षय ऊर्जा को ज्यादा महत्व देने और नौकरशाही का शिकंजा कमजोर करने का वादा किया था। उन्होंने समलैंगिक विवाहों की अनुमति देने और विवाह के बाद पत्नी को अलग उपनाम अपनाने की आजादी देने का वादा भी किया था। किशिदा ने ऐसा कोई वादा नहीं किया है। बल्कि उन्होंने कहा है कि क्या समलैंगिक विवाहो की इजाजत दी जाए, इस बारे में वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं।
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