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चीन की दादागीरी रोकने के लिए फ्रांस ने दक्षिण चीन सागर में भेजा युद्धपोत

Sun, 21 Feb 2021 08:52 AM IST
Jeet Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 21 Feb 2021 08:52 AM IST
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France sends warships to South China Sea
Warship - फोटो : pixabay

दक्षिण चीन सागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाते हुए, फ्रांस ने विवादित जल में दो समुद्री यात्रा योजना बनाई हैं। साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक फ्रांसीसी नौसेना ने कहा है कि उसने तीन माह के मिशन पर प्रशांत यात्रा के लिए पोर्ट टॉलन युद्धपोत को रवाना किया है। ये जहाज दो बार दक्षिण चीन सागर को पार करेंगे और मई में जापान-अमेरिका के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास में भाग लेंगे।

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पिछले सप्ताह फ्रांस ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के कहने पर दक्षिण चीन सागर में चीनी प्रभाव कम करने के मकसद से पनडुब्बी भी तैनात की है।

उल्लेखनीय है कि फ्रांसीसी नौसेना 2015 और 2017 में भी इस तरह के मिशन अंजाम दे चुकी है। उसके युद्धपोत दक्षिण चीन सागर से होकर गुजरे थे। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा मिशन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में फ्रांस की मौजूदगी बढ़ने का संकेत है। फ्रांस ने पिछले हफ्ते दक्षिण चीन सागर में एक परमाणु पनडुब्बी तैनात की थी। उसने चीन की चुनौतियों से मुकाबले के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की अपील पर यह कदम उठाया था। चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है।
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वहीं, जापानी प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने चीन के रवैये पर चिंता जताते हुए कहा कि वह पूर्वी और दक्षिण चीन सागर की यथास्थिति को बदलने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने जी-7 की बैठक में यह चिंता जाहिर की। इधर, चीन के दो पोत जापान के जल क्षेत्र में घुस गए। इस पर जापान ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। ये पोत पूर्वी चीन सागर में विवादित सेनकाकू द्वीप के पास पहुंच गए थे। चीन इस द्वीप पर दावा करता है।
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अमेरिका ने जताई चिंता
अमेरिका में जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद भी चीन से रिश्ते सामान्य नहीं हो रहे हैं। हाल ही में बाइडन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से फोन पर बातचीत में दक्षिण सागर, हांगकांग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के विवादित मुद्दे उठाए हैं। अब अमेरिका ने चीन द्वारा हाल में बनाए तटरक्षक कानून पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे इलाके में क्षेत्रीय और समुद्री विवाद और बढ़ेगा।


बता दें कि चीन ने पिछले महीने कानून पारित किया था जिसके तहत पहली बार तटरक्षक विदेशी पोतों पर गोलाबारी कर सकते हैं। इसे लेकर अमेरिका ने कहा है कि यह कानून न सिर्फ क्षेत्रीय विवाद बढ़ाएगा बल्कि चीन इसका इस्तेमाल अपने अवैध दावे के लिए भी कर सकता है।

 

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