फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   France President Emmanuel Macron Ban On Muslim Teachers and Foregin Imam

फ्रांस ने विदेशी इमामों और अध्यापकों पर प्रतिबंध लगाया, मैक्रों बोले- धर्म के नाम पर अलगाव ठीक नहीं

Thu, 20 Feb 2020 04:24 PM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अनवर अंसारी Updated Thu, 20 Feb 2020 04:24 PM IST
सार

फ्रांस सरकार ने इस्लामी कट्टरपंथ और अलगाववाद से निपटने के लिए विदेशी इमामों के देश में प्रवेश पर रोक लगा दी है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को कहा कि फ्रांस में मौजूद सभी इमामों को फ्रेंच सीखना अनिवार्य होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि फ्रांस में रहने वाले लोगों को यहां के कानूनों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। 

विज्ञापन
France President Emmanuel Macron Ban On Muslim Teachers and Foregin Imam
इमैनुएल मैक्रों

विस्तार

2019 में फ्रांस की कुल जनसंख्या करीब 6.7 करोड़ थी। इसमें करीब 65 लाख मुस्लिम आबादी भी शामिल थी। दरअसल, फ्रांस का नौ देशों सहित चार मुस्लिम देशों से एक समझौता हुआ है, जिसके अंतर्गत ये देश अपने इमाम, इस्लामिक शिक्षक और विद्वान फ्रांस में भेज सकते हैं। वहीं, राष्ट्रपति की इमामों के प्रवेश पर रोक लगाने के बाद यह समझौता 2020 में खत्म हो जाएगा। 

विज्ञापन


पूर्वी फ्रांस के मुलहाउस शहर में पहुंचे इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फ्रांस का कानून इस्लामी कट्टरपंथ से मुकाबला करने के लिए सरकार को मुस्लिम छात्रों की पढ़ाई, मस्जिदों के वित्तपोषण और इमामों के प्रशिक्षण का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि परेशानी यह है कि जब धर्म के नाम पर कुछ लोग खुद को फ्रांस से अलग करना चाहते है और इसलिए वह देश के कानूनों का पालन नहीं करते हैं। इसलिए फ्रांस उनके देश में आने पर प्रतिबंध लगाता है। 

विज्ञापन

क्या है यह समझौता

फ्रांस ने 1977 में नौ देशों से एक समझौता किया, जिसके तहत इन देशों से अध्यापक फ्रांस आकर यहां के छात्रों को विदेशी भाषा और संस्कृति की शिक्षा देते हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति ने इस योजना को खत्म करने की घोषणा की है। 

विज्ञापन
विज्ञापन


चार मुस्लिम बहुल देश- अल्जीरिया, ट्यूनिशिया, मोरक्को और तुर्की भी इस समझौते का हिस्सा हैं, इसलिए ये देश अपने देश से इमामों को पढ़ाने के लिए फ्रांस भेजते हैं। इस योजना के तहत  इन चार देशों से लगभग 300 इमाम हर साल फ्रांस आकर लगभग 80,000 छात्रों को पढ़ाते हैं। 

फ्रांस के राष्ट्रपति ने घोषणा की कि 2020 में होने वाला यह प्रोग्राम आखरी प्रोग्राम है और इसके बाद इन देशों से कोई भी इमाम यहां छात्रों को पढ़ाने के लिए नहीं आएगा। 

फ्रांसीसी मुस्लिम परिषद को जानकारी

मैक्रों ने कहा कि सितंबर से शुरू होने वाले पाठ्यक्रमों और उनकी सामग्री पर नियंत्रण रखने के लिए फ्रांस अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि इस नए कानून के आने के बाद मस्जिदों में होने वाले वित्तपोषण पर पारदर्शिता से नजर रखी जाएगी। 

मैक्रों ने कहा कि उन्होंने फ्रांस में इमामों के प्रशिक्षण में सुधार के लिए फ्रांसीसी मुस्लिम परिषद (सीएफसीएम) से बातचीत की है। उन्होंने कहा कि हमने उन्हें बता दिया है कि अल्जीरिया, मोरक्को और तुर्की को इमामों को फ्रांस भेजने की अनुमति देने की प्रथा को समाप्त कर दिया जाएगा।

देश के कानून का सम्मान करें

राष्ट्रपति ने कहा कि फ्रांस सरकार के पास अब ज्यादा अधिकार हैं। हम इस्लामिक कट्टरपंथ के खिलाफ हैं। बच्चों की शिक्षा, मस्जिदों को मिलने वाली आर्थिक मदद और इमामों की ट्रेनिंग पर ध्यान दिया जाएगा। इससे देश में विदेशी प्रभाव में कमी आएगी। हम सुनिश्चित करना चाहेंगे कि यहां रहने वाला हर व्यक्ति फ्रांस के कानून का पालन और सम्मान करे। फ्रांस में तुर्की का कानून नहीं चल सकता।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed