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ब्राजील में बोलसोनारो के खिलाफ लूला ने ठोक दी ताल, 78 साल के बाइडन से ली प्रेरणा
Sat, 22 May 2021 03:15 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रासीलिया
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रासीलिया
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 22 May 2021 03:15 PM IST
सार
जानकारों के मुताबिक लूला अगर उम्मीदवार बने, तो यह छठा मौका होगा, जब वे राष्ट्रपति चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने पहली बार राष्ट्रपति चुनाव 1989 में लड़ा था। इस बीच उनकी वर्कर्स पार्टी ने कहा है कि ब्राजील के मौजूदा राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने अपनी अयोग्यता के कारण देश को जो नुकसान पहुंचाया है, उससे उबारने का अनुभव और इच्छाशक्ति लूला में मौजूद है...
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लुईस इनासयू लूला द सिल्वा
- फोटो : Reuters
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विस्तार
कोरोना वायरस महामारी की तबाही झेल रहे ब्राजील में लूला नाम से मशहूर वामपंथी नेता और पूर्व राष्ट्रपति लुईस इनासयू लूला द सिल्वा ने अगले साल के चुनाव में उतरने का लगभग एलान कर दिया है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में हालांकि उन्होंने साफ तौर पर अपनी उम्मीदवारी घोषित नहीं की, लेकिन उन्होंने इस बारे में अपने इरादे को लेकर कोई शक भी नहीं रहने दिया।
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लूला ने कहा- ‘इस इंटरव्यू के पहले मैं आठ किलोमीटर की दौड़ लगा कर आया हूं। आम तौर पर सोमवार से शुक्रवार तक रोज मैं नौ किलोमीटर दौड़ता हूं। चूंकि ब्राजील बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है, इसलिए इस देश की समस्याओं को हल करने के लिए मेरे पांवों का तैयार रहना जरूरी है।’ 2003 से 2011 तक ब्राजील के राष्ट्रपति रह चुके लूला ने कहा- ‘अगले साल (यानी चुनाव के समय) मैं 77 साल का रहूंगा। मैं सोचता था कि मैं बूढ़ा हो गया हूं। लेकिन तभी मैंने देखा कि जो बाइडन ने 78 साल की उम्र में (अमेरिका में राष्ट्रपति) चुनाव जीता। उनकी तुलना में तो मैं लड़का हूं।’
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जानकारों के मुताबिक लूला अगर उम्मीदवार बने, तो यह छठा मौका होगा, जब वे राष्ट्रपति चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने पहली बार राष्ट्रपति चुनाव 1989 में लड़ा था। इस बीच उनकी वर्कर्स पार्टी ने कहा है कि ब्राजील के मौजूदा राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने अपनी अयोग्यता के कारण देश को जो नुकसान पहुंचाया है, उससे उबारने का अनुभव और इच्छाशक्ति लूला में मौजूद है। द गार्जियन से लूला ने कहा- ‘मुझे कोई वादा करने की जरूरत नहीं है। मैं पहले ही इस देश में काम करके दिखा चुका हूं।’ बोलसोनारो को ‘मनोरोगी’ बताते हुए लूला ने कहा- ‘जैसे ही हमारी पार्टी उम्मीदवार तय कर लेगी, हम चुनाव अभियान छेड़ देंगे। मैं पूरे ब्राजील का दौरा करना चाहता हूं और लोगों से बात करना चाहता हूं। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि हमारे लिए एक नए देश का निर्माण करना संभव है। इस देश को फिर से खुश बनाना संभव है।’
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इसी साल मार्च में ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट ने लूला को भ्रष्टाचार के आरोप में दी गई सजा को रद्द कर दिया था। इसी सजा के कारण लूला 2018 में राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ पाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत से सुनाई गई सजा को अन्यायपूर्ण करार दिया। उसके बाद से लूला अपने को बोलसोनारो के शासन को ‘मूर्खतापूर्ण चरमपंथ’ बताते हुए उनके विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि उनकी रणनीति वे अपने को एक विश्वसनीय और उदारवादी विकल्प के रूप में पेश करने की रही है। कोरोना वायरस महामारी के कारण ब्राजील में बड़े पैमाने पर हुई मौतों के कारण बोलसोनारो की लोकप्रियता बहुत गिरी हुई है। बोलसोनारो ने पहले कोरोना संक्रमण को मामूली फ्लू बताया और मास्क पहनने या लॉकडाउन लागू करने से इनकार करते रहे। इसकी महंगी कीमत देश को चुकानी पड़ी है।
रियो द जनेरो स्थित राजनीति-शास्त्री क्रिश्चियन लिंच ने द गार्जियन से कहा कि अगले चुनाव में लूला की जीत की संभावना काफी ज्यादा होगी। उन्होंने कहा कि देश लोग बोलोसोनारो से मुक्ति पाने के लिए बेसब्र हैं। बोलसोनारो ने एक ‘संकीर्ण सोच वाला जिद्दी’ शासन दिया है, जबकि लूला की छवि व्यावहारिक राजनेता की है। जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक 66 वर्षीय बोलसोनारो की लोकप्रियता इस समय न्यूनतम स्तर पर है। विश्लेषकों के मुताबिक बोलसोनारो भी लूला से मिलने वाली चुनौती से वाकिफ हैं। इसीलिए हाल में उन्होंने लूला पर जुबानी हमले तेज कर दिए हैं। हाल ही में उन्होंने लूला को दलाल और शैतान की संतान बताया था। लेकिन फिलहाल जनमत पर इसका ज्यादा असर होता नहीं दिखता।