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S Jaishankar: रूस-यूक्रेन और इस्राइल-गाजा संघर्ष पर विदेश मंत्री चिंतित, बोले- विवादों का समाधान युद्ध नहीं

Mon, 25 Nov 2024 04:27 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोम Published by: बशु जैन Updated Mon, 25 Nov 2024 04:27 PM IST
सार

एस जयशंकर ने कहा कि भारत आतंकवाद और बंधक बनाने की निंदा करता है। सैन्य अभियानों में बड़े पैमाने पर नागरिकों की मौत अस्वीकार्य है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए हम सभी को युद्ध विराम का समर्थन करना चाहिए। युद्ध के मैदान से कोई समाधान नहीं निकलने वाला है। हमें संवाद और कूटनीति की ओर लौटना होगा।

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Foreign Minister worried over Russia-Ukraine Israel-Gaza conflict s jaishankar italy visit news and updates
रोम में कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर। - फोटो : ANI/वीडियो ग्रैब

विस्तार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बार फिर रूस-यूक्रेन और इस्राइल-गाजा संघर्ष को लेकर चिंता जाहिर की। इटली के रोम में मेड मेडिटेरेनियन डायलॉग कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस वक्त दुनिया में दो बड़े संघर्ष चल रहे हैं। लगातार बढ़ रहे संघर्ष से चिंताएं बढ़ रही हैं। मगर इस युग में विवादों का समाधान युद्ध से संभव नहीं हो सकता। इसलिए हमको संवाद और कूटनीति की ओर लौटना होगा। 

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विदेश मंत्री ने कहा कि मैं आज दुनिया भर में चल रहे संघर्षों पर बात करुंगा। उन्होंने कहा कि हम सभी मानते हैं कि दुनिया गंभीर तनाव का सामना कर रही है। दो बड़े संघर्ष चल रहे हैं। आपूर्ति श्रृंखला असुरक्षित है, कनेक्टिविटी विशेष रूप से समुद्री मार्ग बाधित हैं। जलवायु परिवर्तन हो रहा है। इसे पहले कोविड महामारी ने गहरे घाव छोड़े हैं। उन्होंने कहा कि यहां अब तक जो कुछ हुआ है और जो भी होने वाला उसे देखते हुए मध्य पूर्व की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
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एस जयशंकर ने कहा कि भारत आतंकवाद और बंधक बनाने की निंदा करता है। सैन्य अभियानों में बड़े पैमाने पर नागरिकों की मौत अस्वीकार्य है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए हम सभी को युद्ध विराम का समर्थन करना चाहिए। जरूरी है कि फलस्तीन लोगों के भविष्य को लेकर पहल की जाए। भारत हमेशा से दोनों देशों के बीच समाधान कराने का पक्षधर रहा है। मगर बढ़ते संघर्ष से हमारी चिंताएं भी बढ़ रही हैं। 
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उन्होंने कहा कि हम लगातार उच्चतम स्तर पर संयम बरतने और संचार को बढ़ाने के लिए इस्राइल और ईरान दोनों के संपर्क में हैं। वहीं लेबनान में अदन की खाड़ी और उत्तरी अरब सागर में यूनिफिल के हिस्से के रूप में इटली की तरह ही भारतीय दल शामिल है। हमने वाणिज्यिक शिपिंग की सुरक्षा के लिए पिछले साल से भारतीय नौसैनिक जहाज तैनात किए हैं। विभिन्न पक्षों को शामिल करने की हमारी क्षमता को देखते हुए हम हमेशा किसी भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयास में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार हैं। 

विदेश मंत्री ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को रोकना भी हमारे लिए जरूरी है। लगातार तीन साल से जारी इस संघर्ष से भूमध्य सागर सहित कई क्षेत्रों में गंभीर अस्थिरता पैदा हो सकती है। इसलिए स्पष्ट है कि युद्ध के मैदान से कोई समाधान नहीं निकलने वाला है। भारत का मानना है कि इस युग में विवादों का समाधान युद्ध से नहीं हो सकता। हमें संवाद और कूटनीति की ओर लौटना होगा, यह जितनी जल्दी हो सके उतना अच्छा है। इस साल जून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उद्देश्य के लिए व्यक्तिगत रूप से रूस और यूक्रेन दोनों के नेताओं से संपर्क किया है। हमारे वरिष्ठ अधिकारी निरंतर संपर्क में हैं। हमारा दृढ़ विश्वास है कि जो लोग समान आधार खोजने की क्षमता रखते हैं उन्हें भी यह जिम्मेदारी उठानी चाहिए। 

उन्होंने कहा कि हम आज एक नए युग की दहलीज पर हैं। यह पुनः वैश्वीकरण, पुर्नसंतुलन और बहुध्रुवीयता का युग है। इसमें प्रतिभा की गतिशीलता और हरित विकास के साथ अधिक प्रौद्योगिकी-केंद्रित भविष्य भी है। इस दुनिया में अवसर उतने ही बंटने वाले नहीं हैं जितनी चिंताएं। भारत और भूमध्य सागर के बीच एक घनिष्ठ और मजबूत संबंध हम दोनों के लिए उपयोगी है। 

मध्य पूर्व से भारत का गहरा नाता
मध्य पूर्व से भारत का गहरा नाता है। अकेले खाड़ी देशों से ही भारत का सालाना व्यापार 160 से 180 बिलियन डॉलर के बीच है। शेष मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका से इसमें लगभग 20 बिलियन डॉलर का इजाफा होता है। मध्य पूर्व में नौ मिलियन से अधिक भारतीय रहते हैं और काम करते हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र भी है जिससे हम इतिहास, संस्कृति और सुरक्षा के मामले में भी जुड़े हुए हैं। इन्हीं कारणों से आप इस क्षेत्र में भारत की उपस्थिति और गतिविधियों में वृद्धि की उम्मीद कर सकते हैं। खासकर तब जब हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहे हैं।

गेमचेंजर बनेगा भारत मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि भूमध्यसागर अनिश्चित और अस्थिर दुनिया में अवसर और जोखिम दोनों प्रस्तुत करता है। वर्तमान स्थितियों से इतर हमारे संबंधों का नया तत्व कनेक्टिविटी है। सितंबर 2020 में घोषित भारत मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा इसमें गेम चेंजर हो सकता है। वर्तमान में मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष बड़ी जटिलता रहा है, लेकिन भारत मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा पूर्वी हिस्से में आगे बढ़ रहा है। खासकर भारत, यूएई और सऊदी अरब के बीच इसका काम जारी है। वहीं भारत, इस्राइल, यूएई और अमेरिका का I2U2 समूह भी आने वाले समय में सक्रिय हो जा रहा है। 

यूके के विदेश सचिव से की मुलाकात
रोम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूके के विदेश सचिव डेविड लैमी से मुलाकात की। विदेश मंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि आज रोम में यूके के विदेश सचिव डेविड लैमी से मुलाकात की। भारत और यूके की व्यापक रणनीतिक साझेदारी की मैं सराहना करता हूं। हमने तकनीक, ग्रीन एनर्जी, व्यापार के साथ ही हिंद-प्रशांत और पश्चिम एशिया में चल रहे विकास में सहयोग पर चर्चा की। 

यूक्रेन के विदेश मंत्री से भी मिले
रोम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा से मुलाकात की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि रोम में यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा से मिलकर खुशी हुई। हमारे द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर बातचीत हुई। बातचीत और कूटनीति के लिए भारत का समर्थन दोहराया।
 
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