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विदेशी बांग्लादेशी अल्संख्यकों ने नागरिकता कानून का किया समर्थन, बताया मानवतावादी

Fri, 27 Dec 2019 01:01 PM IST
Priyesh Mishra वर्ल्ड डेस्क, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, वाशिंगटन Published by: Priyesh Mishra Updated Fri, 27 Dec 2019 01:01 PM IST
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Foreign Bangladeshi minorities support citizenship law Says humanitarian law
नागरिकता कानून - फोटो : Amar Ujala Graphics

बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों और संगठनों के एक समूह ने संशोधित नागरिकता कानून को मानवीय बताया है। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से भारत ने बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लाखों गैर-मुसलमानों के प्रति अपने कर्तव्य को आंशिक रूप से पूरा किया है।

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उन्होंने कहा कि इन गैर-मुसलमानों को हाल के वर्षों में अपना देश छोड़ना पड़ा है और वे अपने अधिकारों के लिए दावा भी नहीं कर सकते। संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के अनुसार, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक कारणों से सताए जाने के बाद वहां से भागकर 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को देश की नागरिकता दी जाएगी।
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समूह ने बुधवार को एक बयान में कहा कि इस कानून के जरिए भारत ने हाल के वर्षों में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भागकर आए लाखों गैर-मुसलमानों के प्रति अपने कर्तव्य की आंशिक पूर्ति की है। ये वे शरणार्थी हैं, जो भारत में अपने अधिकारों के लिए दावा नहीं कर सकते थे। सीएए ने उन्हें अधिकार दिए हैं।
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करीब दर्जन भर देशों की प्रमुख हस्तियों और संगठनों द्वारा हस्ताक्षरित इस बयान में कहा गया है कि पूरी दुनिया में शांतिपूर्ण तरीके से रह रहे हम बांग्लादेश के प्रवासी हिंदू और अन्य जातीय अल्पसंख्यक भारत की संसद द्वारा पारित संशोधित नागरिकता कानून (2019) का पूरा समर्थन करते हैं। यह इंसानियत के प्रति एक मानवीय कदम है।


जिन संगठनों ने इस बयान पर हस्ताक्षर किए हैं, उनमें बांग्लादेश माइनोरिटी कोलिजन (अमेरिका), बांग्लादेश माइनोरिटी राइट्स एलायंस (कनाडा), बांग्लादेश माइनोरिटी काउंसिल (स्विटजरलैंड), बांग्लादेश हिंदू कोलिजन (अमेरिका) और बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल (फ्रांस) शामिल हैं।

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