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Hindi News ›   World ›   For the first time: Scientists have created a mini heart in lab, heartbeat like a 25-day fetus, will reveal the secrets of heart disease

पहली बार: वैज्ञानिकाें ने बनाया मिनी हार्ट, धड़कन 25 दिन के भ्रूण की तरह, खुलेगा दिल की बीमारी का राज

Mon, 24 May 2021 03:54 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,विएना
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,विएना Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 24 May 2021 03:54 PM IST
सार

विज्ञान के मानवता के हित में इस्तेमाल के लिए वैज्ञानिक रात दिन जुटे हैं। इसी का नतीजा है कि महामारी हो या अन्य बीमारी सभी पर काबू पाने के जतन जारी हैं। 
 

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For the first time: Scientists have created a mini heart in lab, heartbeat like a 25-day fetus, will reveal the secrets of heart disease
सांकेतिक चित्र

विस्तार

वैज्ञानिकों ने पहली बार लैब में एक कृत्रिम 'मिनी हार्ट' विकसित किया है। मानव स्टेम सेल से बना तिल के बीज के आकार (2 मिलीमीटर) का यह कृत्रिम दिल 25 दिन के इंसानी भ्रूण में धड़कने वाले हृदय की नकल करता है। इसके परीक्षण से दिल की कई बीमारियों के राज खुल सकेंगे। 

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ऑस्ट्रिया साइंस एकेडमी के वैज्ञानिकों ने बनाया
वैज्ञानिकों का कहना है कि कृत्रिम दिल बनाने में मिली सफलता के बाद वे दिल से जुड़ी तमाम बीमारियों के रहस्य को जान सकेंगे। यहां तक कि दिल का दौरा पड़ने के बाद शिशुओं के दिल क्यों नहीं झुलसते, इसका भी पता चल जाएगा। ऑस्ट्रिया साइंस एकेडमी के वैज्ञानिकों की टीम ने इसे बनाया है।
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दरअसल, वैज्ञानिकाें की टीम यह शाेध करने में जुटी थी कि भ्रूण में दिल की बीमारी कैसे विकसित हाेती है। भ्रूण में जन्मजात हृदय दोष सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। प्रसिद्ध बायाेइंजीनियर जेन मा कहते हैं कि दिल की जन्मजात बीमारी और इंसानाें के दिल के कई राज खाेलने में यह तकनीक कारगर साबित हाेगी। अब तक पशु माॅडल पर निर्भर रिसर्च के क्रम में यह अब तक की सबसे महत्वपूर्ण खाेज है। 
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दिमाग, लिवर जैसे कई अंग लैब में विकसित किए
मिशिगन यूनिवर्सिटी के स्टेम सेल विज्ञानी एटाेर एगुइरे कहते हैं कि पिछले 10 साल में दिमाग, लिवर जैसे कई अंग लैब में विकसित किए गए हैं, लेकिन यह सबसे सटीक है। धड़कते हुए इंसानी दिल काे जिस तरह आर्गेनाइज्ड किया गया है, वह बिल्कुल असल जैसा ही है। इसमें सभी ऊतक और काेशिकाएं न सिर्फ विकसित हुईं बल्कि अपने आप ही संरचना में ढलकर वास्तविक आकार भी लेने लगीं। 

तीन माह से ज्यादा जिंदा रहे कृत्रिम दिल
प्रमुख शोधकर्ता डाॅ. साशा मेंडजन कहते हैं कि जब मैंने इसे पहली बार देखा, तो मुझे आश्चर्य हुआ कि ये चैंबर्स अपने आप बन सकते हैं। आर्गेनाइज्ड दिल जब अपनी कार्यावस्था में आ गए ताे मैं सबसे ज्यादा खुश हुआ कि हमारा शाेध सफल रहा। यह मिनी हार्ट लैब में तीन महीने से अधिक समय तक जीवित रहे हैं। 12 साल बाद हमारी मेहनत रंग लाई। हमने आर्गेनाइज्ड दिल के टुकड़ाें काे भी फ्रीज कर दिया है ताकि आगे और नई रिसर्च काे बढ़ावा मिले।


दोबारा बनाकर पूरी तसल्ली कर ली
प्रमुख शोधकर्ता डॉ. साशा मेंडजन कहते हैं कि जब तक आप इसे फिर से नहीं बना सकते, तब तक आप किसी चीज को पूरी तरह से नहीं समझ सकते। हमने ऐसा दोबारा कर दिखाया। हालांकि, इसके पहले चीन के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम दिल बनाने का दावा किया था लेकिन वह स्टेम सेल से नहीं बना था। इसमें रॉकेट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था। इसे बनाने में चुंबकीय और द्रव लेविटेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। इसके कारण मशीन में घर्षण नहीं होता और काम करने की क्षमता बढ़ती है।

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