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संकट: बारिश के चलते 100 साल में सबसे भीषण बाढ़ से जूझ रहा यूरोप, अब तक 46 की मौत

Thu, 15 Jul 2021 08:24 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 15 Jul 2021 08:24 PM IST
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सार
पश्चिमी यूरोप में भीषण बाढ़ के चलते कम से कम 46 लोगों की मौत हो गई है। इसके पीछे का कारण बनी बारिश को विशेषज्ञ एक शताब्दी में सबसे भारी वर्षा बता रहे हैं। 
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Europe facing heaviest rainfall in last 100 years, Germany worst hit news in Hindi
जर्मनी में बाढ़ - फोटो : पीटीआई

विस्तार

जर्मनी के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्से बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और यहां करीब 70 लोग लापता हैं। पुलिस ने गुरुवार को बताया कि बाढ़ की वजह से यहां कई इमारतें ढह गई हैं। जर्मनी बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है और अभी तक की जानकारी के मुताबिक यहां इस आपदा के चलते कम से कम 40 लोगों की मौत हुई है। वहीं, बेल्जियम में बाढ़ के चलते छह लोगों की जान गई है और लग्जमबर्ग व नीदरलैंड भी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। 



सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी की मौसम सेवा के प्रवक्ता एंड्रियास फ्राइडरिच ने कहा, 'कुछ इलाकों में हमने ऐसी बारिश पिछले 100 साल में नहीं देखी है। कुछ इलाकों में हमने दोगुने से अधिक बारिश देखी है जो बाढ़ का कारण बनी और दुर्भाग्य से कुछ इमारतें धराशायी हो गईं।' फ्राइडरिच ने आगे बताया कि भीषण बाढ़ से जर्मनी के नॉर्थ-राइन वेस्टफेलिया, राइनलैंड-पैलेटिनेट और सारलैंड सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। 


जर्मनी की प्रवक्ता एंजेला मर्केल के प्रवक्ता ने पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदनाएं जताई हैं। मर्केल इस समय अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन से मिलने के लिए वाशिंगटन डीसी में हैं। माना जा रहा है कि 16 साल तक सत्ता में रहने के बाद चांसलर के पद से हटने से पहले यह उनकी अमेरिका की अंतिम यात्रा है। नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया के प्रीमियर अर्मिन लैशेट ने कहा कि हमारे सामने ऐसी चुनौतियां बार-बार आएंगी। 

लैशेट ने कहा कि इसका अर्थ यह है कि हमें अपने जलवायु सुरक्षा प्रयासों को यूरोपीय, संघीय और वैश्विक स्तर पर बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन किसी एक राज्य या देश के लिए चुनौती नहीं है बल्कि यह पूरे विश्व के लिए समस्या है और पूरी दुनिया को इससे निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। बता दें कि कि जर्मनी के चांसलर पद के लिए लैशेट, मर्केल के बाद कंजर्वेटिव की ओर से उम्मीदवार हैं।

बाढ़ और भूस्खलनों के कारण कई गांवों से संपर्क टूटने के बाद अभी यह पता नहीं चल पाया कि इस क्षेत्र को कितना नुकसान पहुंचा है। सोशल मीडिया पर पोस्ट वीडियो में कुछ स्थानों पर सड़कों पर कारों को बहते हुए और मकानों को आंशिक रूप से गिरते हुए देखा गया। प्राधिकारियों ने कई दिनों तक भारी बारिश के बाद क्षेत्र में आपातकाल घोषित कर दिया है। पश्चिम और मध्य जर्मनी के साथ ही पड़ोसी देशों के बड़े हिस्से को व्यापक नुकसान पहुंचा है।

इस बीच, रात भर जारी रही बारिश ने पूर्वी बेल्जियम में बाढ़ की स्थिति को और गंभीर कर दिया है। कई शहरों में जल स्तर अप्रत्याशित स्तर तक बढ़ गया है। देश के दक्षिणी तथा पूर्वी हिस्सों में प्रमुख राजमार्ग डूब गए हैं। सभी ट्रेनों को रोक दिया गया है। पुर्तगाली मीडिया में आई खबरों के मुताबिक जर्मनी और बेल्जियम के समीप दक्षिणी पुर्तगाली शहर वाल्केनबर्ग में बाढ़ के कारण रातोंरात एक देखभाल गृह और एक धर्मशाला को खाली कराया गया। 

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