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India-UAE: भारत ने पहली बार यूएई को रुपये में किया कच्चे तेल का भुगतान, एलसीएस समझौते के आधार पर हुआ लेनदेन

Mon, 14 Aug 2023 11:21 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अबू धाबी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अबू धाबी Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 14 Aug 2023 11:21 PM IST
सार

India-UAE: अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के बीच सोमवार को नए लागू स्थानीय मुद्रा निपटान (एलसीएस) प्रणाली के तहत कच्चे तेल का पहला लेनदेन हुआ।

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First ever crude oil transaction in local currency undertaken between India and UAE
India Uae flag - फोटो : social media

विस्तार

अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के बीच सोमवार को स्थानीय मुद्रा निपटान (एलसीएस) प्रणाली के तहत कच्चे तेल का पहला लेनदेन हुआ। इस लेनदेन में लगभग एक मिलियन बैरल कच्चे तेल की बिक्री शामिल थी। इन नए नियमों को हाल ही में लागू किया गया था।

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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भारतीय दूतावास ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि लेनदेन के लिए भारतीय रुपये और यूएई दिरहम दोनों का इस्तेमाल किया गया था। भारत और यूएई के बीच तेल और गैस व्यापार को लेकर मजबूत संबंध हैं और यूएई भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक प्रमुख भागीदार है। पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच द्विपक्षीय व्यापार की रीढ़ हैं।

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यूएई कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा स्रोत है और भारत के लिए एलएनजी और एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि पिछले साल दोनों देशों के बीच 35.10 अरब डॉलर मूल्य के पेट्रोलियम उत्पादों का व्यापार हुआ जो कुल द्विपक्षीय व्यापार का 41.4 फीसदी है। 
 

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एलसीएस तंत्र की स्थापना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (पीएम) और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मौजूदगी में हुए समझौते के तहत की गई है। दरअसल, दोनों देशों ने 15 जुलाई 2023 को सीमा पार लेनदेन के लिए स्थानीय मुद्राओं के उपयोग के लिए एक रूपरेखा तंत्र की स्थापना पर ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे।

यह भारत का पहला एलसीएस है और इससे लेनदेन लागत और समय कम होने और स्थानीय मुद्राओं पर निर्भरता बढ़ने की उम्मीद है। इससे सीईपीए से प्राप्त होने वाली तरजीही शर्तों में और इजाफा होगा। व्यापारी आपसी समझौते के आधार पर भुगतान मुद्रा चुन सकते हैं। इसके अलावा, स्थानीय मुद्राओं में अधिशेष शेष राशि का उपयोग कॉर्पोरेट बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियों, खरीद बाजारों आदि जैसी स्थानीय मुद्रा परिसंपत्तियों में निवेश के लिए किया जा सकता है। 
 

जबकि आज का तेल लेनदेन एलसीएस के तहत दूसरा बड़ा लेनदेन था, पहला लेनदेन 15 जुलाई को समझौता ज्ञापन के आदान-प्रदान के दिन हुआ था। इसमें संयुक्त अरब अमीरात के एक प्रमुख सोने के निर्यातक से भारत में एक खरीदार को लगभग 12.84 करोड़ रुपये में 25 किलोग्राम सोने की बिक्री शामिल थी। 

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