अफगानिस्तान: सरकार न होने से वित्तीय और मानवीय संकट गहराया, बैंकों से 200 डॉलर तक ही निकासी का आदेश
सैकड़ों लोगों ने काबुल की सड़कों पर उतरकर बैंकों को बंद करने का विरोध किया था, जिसके कुछ घंटों बाद यह फैसला लिया गया। डी अफगानिस्तान बैंक ने देश में सभी निजी बैंकों को केंद्रीय बैंक के सिद्धांतों और कानूनों के आधार पर अपना संचालन फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है।
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अफगानिस्तान में सरकार न होने से प्रशासनिक खालीपन आ गया है जिसके चलते देश में आर्थिक संकट और व्यापक भुखमरी के हालात का खतरा उत्पन्न हो गया है। आटा, तेल और चावलों समेत अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। अफगानी मुद्रा लगातार गिर रही है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान में सीमा पर मुद्रा बदलने वालों ने अफगानी मुद्रा लेने भी बंद कर दिया है।
इस बीच तालिबान ने अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक, डी अफगानिस्तान बैंक ने सभी निजी और अंतरराष्ट्रीय बैंकों को अपने निजी ग्राहकों के लिए निकासी को 200 डॉलर या 20,000 अफगानी मुद्रा तक सीमित करने का आदेश दिया है। निर्देश के अनुसार, यह निर्णय अफगानिस्तान में वित्तीय कठिनाइयों के बाद लिया गया है और यह अस्थायी होगा।
निर्देश में कहा गया है, सभी कंपनियों से संबंधित और व्यक्तिगत खातों के मालिकों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से धन हस्तांतरित करने की अनुमति है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि तालिबान के 15 अगस्त को काबुल में प्रवेश करने के बाद से कोई बैंकिंग सेवा उपलब्ध नहीं है।
लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, नियोक्ता वेतन का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं और कर्मचारियों के पास पैसे खत्म हो गए हैं। पिछले 40 सालों में जंग के चलते अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही खराब है और अब तालिबान के कब्जे के बाद पश्चिमी देशों से भी आर्थिक मदद मिलनी बंद होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
अगले कुछ दिनों में सरकार बनते ही खत्म होंगी दिक्कतें : तालिबान
तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि देश में एक बार नई सरकार बन जाए और संचालित होने लगे तो सारी दिक्कतों अपने आप खत्म हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि तालिबान अगले कुछ दिनों में पूर्ण कैबिनेट का एलान करेगा।
तालिबान ने अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से एक को छोड़कर सभी में गवर्नरों और पुलिस प्रमुखों की घोषणा की है। साथ ही उसने अमेरिका और अन्य पश्चिम देशों से अपने सैनिकों की वापसी के बाद भी राजनयिक संबंध बनाए रखने की अपील की है।
काबुल हवाईअड्डे को पूरी तरह से नियंत्रण में लेने को तैयार तालिबान
अफगानिस्तान से विदेशी फौजों की वापसी प्रक्रिया के खत्म होने की तारीख के नजदीक आते ही तालिबान देश के महत्वपूर्ण काबुल हवाईअड्डे को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लेने को तैयार है।
इस बीच इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत के आतंकियों के और हमलों की आशंका को देखते हुए शनिवार को हवाईअड्डे की सुरक्षा से अमेरिकी सैनिकों को हटाकर जिम्मेदारी तालिबान को सौंप दी गई थी।
देश की सत्ता पर काबिज तालिबान के एक अधिकारी ने बताया कि हमारे इंजीनियर और टेक्नीशियन हवाईअड्डे का प्रभार लेने के लिए से पूरी तरह से तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि हम काबुल हवाईअड्डे पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने के लिए अमेरिका की ओर से अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। दोनों ही पक्षों का मकसद इस प्रक्रिया को आसानी और सरलता से पूरा करना है।
शनिवार को काबुल हवाईअड्डे की सुरक्षा संभालने वाले तालिबान ने लोगों की भीड़ को अंदर घुसने से रोकने के लिए हवाईअड्डे को सील कर दिया। हवाईअड्डे की ओर जाने वाले सड़कों पर चेकप्वाइंट के नए लेयर बनाए गए हैं। इन चेकप्वाइंट पर तालिबान लड़ाकों को तैनात किया गया है।