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Explainer: क्या है 44 साल पुराना द्वीप विवाद, विश्वकप में जिसे अर्जेंटीना ने उठाया; UK को क्यों गुस्सा आया?
Thu, 16 Jul 2026 08:02 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 16 Jul 2026 08:02 PM IST
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सार
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इंग्लैंड-अर्जेंटीना मैच में उठा विवाद।
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अमर उजाला
विस्तार
अमेरिका में बीते एक महीने से जारी फुटबॉल विश्व कप अब अपने आखिरी चरण में है। शुक्रवार और रविवार को इस टूर्नामेंट के आखिरी दो मैच खेले जाने हैं। फाइनल को लेकर फिलहाल सबसे ज्यादा उत्साह देखा जा रहा है। मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना और 2010 की वर्ल्ड कप विजेता स्पेन दोनों ही टीमों को लेकर फैंस काफी बंटे हैं। हालांकि, अर्जेंटीना के लिए एक मुश्किल मुंह बाए खड़ी है। दरअसल, गुरुवार को अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच जो मैच हुआ, उसमें मेसी की टीम के कुछ खिलाड़ी एक विवादित बैनर लेकर मैदान में उतर गए। इस घटना को लेकर इंग्लैंड की टीम से लेकर ब्रिटेन के नेता तक नाराज बताए गए हैं। अब मामले में फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था- फीफा पर कार्रवाई का दबाव बन रहा है।इसकी एक वजह खुद फीफा के नियम हैं। फुटबॉल के मैदान पर राजनीतिक, धार्मिक या निजी नारेबाजी पर पूरी तरह रोक है। लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ मैच में अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने 44 साल पुराने एक युद्ध से जुड़े विवाद को न सिर्फ उठाया, बल्कि ब्रिटेन से विवाद के केंद्र में रहे फॉकलैंड द्वीप को भी अपना बताया। इससे जुड़े पोस्टर लिए अर्जेंटीना के खिलाड़ियों की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जिस फॉकलैंड द्वीप का जिक्र अर्जेंटीना के खिलाड़ियों और उसके समर्थकों ने इंग्लैंड के खिलाफ मैच के दौरान फुटबॉल मैदान में बार-बार किया, वह क्या है? इसे लेकर इंग्लैंड और अर्जेंटीना का विवाद क्या है? फॉकलैंड को लेकर दोनों देशों के खूनी इतिहास की क्या कहानी है? कैसे फॉकलैंड का यह मुद्दा युद्ध क्षेत्र से उठकर फुटबॉल के मैदान में दोनों देशों की दुश्मनी की कहानी बनता चला गया? अर्जेंटीना और इंग्लैंड के सेमीफाइनल मैच में यह मुद्दा किस तह उठा है और कैसे अर्जेंटीना के लिए इससे मुश्किलें बढ़ सकती हैं? आइये जानते हैं...
फॉकलैंड द्वीप जिसे अर्जेंटीना में लास माल्विनास के नाम से जाना जाता है, ब्रिटेन का एक स्वशासित ब्रिटिश प्रवासी क्षेत्र है। यह एक द्वीपसमूह है, जिसमें दो मुख्य द्वीप- पूर्वी फॉकलैंड और पश्चिमी फॉकलैंड के साथ-साथ 776 छोटे द्वीप शामिल हैं। यहां का आंतरिक प्रशासन स्थानीय सरकार चलाती है, जबकि इसकी रक्षा और विदेशी मामलों की जिम्मेदारी ब्रिटेन की होती है। इस द्वीप की राजधानी और सबसे बड़ी बस्ती स्टैनले है। 1833 से ही यह द्वीप ब्रिटिश शासन के अधीन है।
पहले जानें- क्या है फॉकलैंड द्वीप, यह कहां स्थित?
फॉकलैंड द्वीप जिसे अर्जेंटीना में लास माल्विनास के नाम से जाना जाता है, ब्रिटेन का एक स्वशासित ब्रिटिश प्रवासी क्षेत्र है। यह एक द्वीपसमूह है, जिसमें दो मुख्य द्वीप- पूर्वी फॉकलैंड और पश्चिमी फॉकलैंड के साथ-साथ 776 छोटे द्वीप शामिल हैं। यहां का आंतरिक प्रशासन स्थानीय सरकार चलाती है, जबकि इसकी रक्षा और विदेशी मामलों की जिम्मेदारी ब्रिटेन की होती है। इस द्वीप की राजधानी और सबसे बड़ी बस्ती स्टैनले है। 1833 से ही यह द्वीप ब्रिटिश शासन के अधीन है।
फॉकलैंड द्वीप समूह।
- फोटो :
अमर उजाला
फॉकलैंड द्वीप को लेकर इंग्लैंड से अर्जेंटीना का क्या है खूनी इतिहास?
इंग्लैंड (यूनाइटेड किंगडम शासन) और अर्जेंटीना के बीच मुख्य विवाद फॉकलैंड द्वीपसमूह की संप्रभुता को लेकर है। यह विवाद 190 वर्षों से भी ज्यादा पुराना है। फॉकलैंड द्वीप को लेकर चल रहे इसी विवाद के बाद अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच 1982 में एक भयानक युद्ध हुआ था। इस युद्ध को फॉकलैंड संघर्ष के नाम से जाना जाता है। यह खूनी संघर्ष कुल 74 दिनों (2 अप्रैल 1982 से 14 जून 1982 तक) तक चला ।युद्ध की शुरुआत: 2 अप्रैल 1982 को अर्जेंटीना की सैन्य सरकार ने फॉकलैंड और एक अन्य ब्रिटिश उपनिवेश साउथ जॉर्जिया पर आक्रमण कर दिया और उस पर कब्जा कर लिया।
ब्रिटेन का पलटवार: अर्जेंटीना के इस कदम के जवाब में, तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने द्वीपों को वापस पाने के लिए अपनी नौसेना (रॉयल नेवी) की एक बड़ी टुकड़ी भेजी।
फॉकलैंड द्वीप समूह।
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अमर उजाला
जान-माल का भारी नुकसान: इस युद्ध में कुल 907 लोगों की मौत हुई। इनमें 649 अर्जेंटीना के सैनिक, 255 ब्रिटिश सैनिक और तीन स्थानीय नागरिक (डोरिन बोनर, सुजन व्हिटली और मैरी गुडविन) मारे गए। इसके अलावा, 1,100 से अधिक अर्जेंटीना के सैनिक और 750 ब्रिटिश सैनिक घायल भी हुए थे।
युद्ध का नतीजा: महज छह हफ्ते की लड़ाई के बाद 14 जून 1982 को अर्जेंटीना की सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद यूनाइटेड किंगडम ने इस द्वीपसमूह पर अपना क्षेत्रीय अधिकार फिर से स्थापित कर लिया।
इस युद्ध के नतीजे दोनों देशों की घरेलू राजनीति के लिए बहुत निर्णायक साबित हुए। अर्जेंटीना में युद्ध की हार के बाद भारी असंतोष पैदा हुआ, जिससे एक साल बाद ही वहां की सैन्य तानाशाही वाली सरकार गिर गई और नागरिक शासन (लोकतंत्र) की वापसी हुई। वहीं, दूसरी ओर जीत हासिल करने वाली ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर को देश में भारी जनसमर्थन मिला और 1983 के संसदीय चुनावों में उन्होंने एकतरफा जीत दर्ज की।
युद्ध के दौरान ब्रिटिश गोलाबारी से जान गंवाने वाले नागरिकों के अलावा, इस इलाके में 20,000 से ज्यादा बारूदी सुरंगें भी बिछाई गई थीं, जिन्हें पूरी तरह से साफ करने में कई दशक लग गए और अक्तूबर 2020 में जाकर यह काम पूरा हो सका।
युद्ध का नतीजा: महज छह हफ्ते की लड़ाई के बाद 14 जून 1982 को अर्जेंटीना की सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद यूनाइटेड किंगडम ने इस द्वीपसमूह पर अपना क्षेत्रीय अधिकार फिर से स्थापित कर लिया।
इस युद्ध के नतीजे दोनों देशों की घरेलू राजनीति के लिए बहुत निर्णायक साबित हुए। अर्जेंटीना में युद्ध की हार के बाद भारी असंतोष पैदा हुआ, जिससे एक साल बाद ही वहां की सैन्य तानाशाही वाली सरकार गिर गई और नागरिक शासन (लोकतंत्र) की वापसी हुई। वहीं, दूसरी ओर जीत हासिल करने वाली ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर को देश में भारी जनसमर्थन मिला और 1983 के संसदीय चुनावों में उन्होंने एकतरफा जीत दर्ज की।
युद्ध के दौरान ब्रिटिश गोलाबारी से जान गंवाने वाले नागरिकों के अलावा, इस इलाके में 20,000 से ज्यादा बारूदी सुरंगें भी बिछाई गई थीं, जिन्हें पूरी तरह से साफ करने में कई दशक लग गए और अक्तूबर 2020 में जाकर यह काम पूरा हो सका।
ब्रिटेन-अर्जेंटीना के फॉकलैंड पर अपने-अपने दावे।
- फोटो :
अमर उजाला
फुटबॉल के मैदान में दुश्मनी की कहानी कैसे बन गया फॉकलैंड का विवाद?
फॉकलैंड द्वीप पर नियंत्रण को लेकर इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच 1982 में हुए 74-दिवसीय युद्ध ने दोनों देशों के बीच गहरी कड़वाहट पैदा कर दी थी। युद्ध के मैदान में मिली हार और कई सैनिकों की मौत के बाद, अर्जेंटीना के लिए फुटबॉल का मैदान अपने राष्ट्रीय गौरव को वापस पाने और इंग्लैंड से प्रतीकात्मक बदला लेने का एक जरिया बन गया। यह भू-राजनीतिक दुश्मनी फुटबॉल के मैदान में भी ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता में बदल गई।1986 विश्व कप और डिएगो माराडोना का 'बदला'
युद्ध के महज चार साल बाद, 1986 के विश्व कप क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना और इंग्लैंड का आमना-सामना हुआ था। इस मैच में अर्जेंटीना के दिग्गज खिलाड़ी डिएगो माराडोना ने दो ऐतिहासिक गोल किए, जिनमें से पहला गोल उन्होंने हाथ से किया। इसी गोल को प्रसिद्ध- 'हैंड ऑफ गॉड' गोल कहा जाता है। माराडोना ने बाद में इसे 'युद्ध का बदला खेल के जरिए लेना' करार दिया था और कहा था कि अंग्रेजों से जीत छीनना बिल्कुल वैसा ही था, जैसे आपने चोरों से चोरी कर ली। माराडोना के मन में इस युद्ध को लेकर इंग्लैंड के प्रति इतनी कड़वाहट थी कि उन्होंने एक बार ब्रिटेन के तत्कालीन प्रिंस चार्ल्स से हाथ मिलाने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि उनके हाथों पर बहुत खून लगा है।'लास माल्विनास' गीत और फुटबॉल संस्कृति
अर्जेंटीना के फुटबॉल प्रशंसक और खिलाड़ी अपनी राष्ट्रीय टीम के मैचों के दौरान अक्सर ऐसे गीत गाते हैं जो सीधे तौर पर फॉकलैंड युद्ध और उसके नायकों की याद दिलाते हैं। उनके गीतों में लास माल्विनास और डिएगो माराडोना को श्रद्धांजलि दी जाती है और अंग्रेजी टीम के खिलाफ 'जो नहीं उछलेगा, वह अंग्रेज है' (El que no salta, Es un ingles!) जैसे नारे लगाए जाते हैं। यह इंग्लैंड-विरोधी भावना नफरत से ज्यादा अर्जेंटीना की सांस्कृतिक पहचान और एकजुटता का हिस्सा बन चुकी है।
अर्जेंटीना की टीम बैनर के साथ
- फोटो :
FIFA.COM
अन्य ऐतिहासिक फुटबॉल टकराव
1966 का विवाद: 1982 के युद्ध से पहले भी मैदान पर तनाव मौजूद था। 1966 के विश्व कप में अर्जेंटीना के कप्तान एंटोनियो रैटिन को इंग्लैंड के खिलाफ मैच में बाहर कर दिया गया था। उन्होंने रेफरी का फैसला नहीं समझा और मैदान छोड़ने से इनकार कर दिया, जिसके विवाद के कारण ही फुटबॉल के इतिहास में पीले और लाल कार्ड की शुरुआत हुई थी।डेविड बेकहम का विवाद (1998 और 2002): 1998 के विश्व कप में इंग्लैंड के डेविड बेकहम को अर्जेंटीना के खिलाफ लाल कार्ड मिला, जिससे इंग्लैंड 10 खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए मैच हार गया। इसके बाद 2002 के विश्व कप में बेकहम ने अर्जेंटीना के खिलाफ पेनल्टी से गोल दागकर अपनी टीम को 1-0 से जीत दिलाई और अपना पुराना हिसाब चुकता किया।
अर्जेंटीना और इंग्लैंड के हालिया मुकाबले में यह मुद्दा किस तरह उठा है?
अटलांटा के मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम में खेले गए विश्व कप सेमीफाइनल मैच में अर्जेंटीना ने इंग्लैंड पर 2-1 से रोमांचक जीत दर्ज की और फाइनल में अपनी जगह पक्की की। हालांकि, इस जीत के बाद अर्जेंटीना की टीम विवादों में घिर गई।
दर्शकों के बाद खिलाड़ियों ने किया विवादित बैनर का प्रदर्शन
मैच जीतने के ठीक बाद जश्न मनाते हुए अर्जेंटीना के खिलाड़ियों, खासकर जियोवानी लो सेल्सो और निकोलस ओटामेंडी ने मैदान पर एक बैनर प्रदर्शित किया जिस पर लिखा था 'लास माल्विनास सोन अर्जेंटीनास' जिसका अर्थ है- फॉकलैंड अर्जेंटीना का है। यह बैनर शुरुआत में दर्शकों द्वारा स्टैंड में दिखाया गया था, जिसे बाद में खिलाड़ियों ने कुछ देर के लिए मैदान पर लहराया।
अर्जेंटीना की तरफ से राजनीतिक बयानबाजी
इस मैच से पहले अर्जेंटीना की उप-राष्ट्रपति विक्टोरिया विलारुएल ने बयान दिया था कि यह मैच हमलावरों को उनकी सही जगह दिखाने के बारे में है। जीत के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भले ही स्टेडियम में इससे जुड़े संदेश ले जाना मना हो, लेकिन फ़ॉकलैंड उनके खून और दिलों में बसा है।
कोच ने की बचाव की कोशिश
अर्जेंटीना के मुख्य कोच लियोनेल स्कैलोनी ने इस मुद्दे को राजनीति से दूर रखने की कोशिश की थी। उन्होंने मैच से पहले कहा था कि यह सिर्फ एक फुटबॉल मैच है, हमें इसे राजनीति से नहीं मिलाना चाहिए, क्योंकि युद्ध का वह दौर इतिहास का एक बहुत दुखद हिस्सा था। हालांकि, जीत के बाद खिलाड़ियों ने भी ड्रेसिंग रूम में इन गीतों को गाते हुए जश्न मनाया।
बैनर दिखाती अर्जेंटीना की टीम और अर्जेंटीना के फैंस
- फोटो :
The Sun/AP
फॉकलैंड और इससे जुड़े विवादों की मौजूदा स्थिति क्या?
फॉकलैंड द्वीप विवाद की मौजूदा स्थिति यह है कि जमीनी और प्रशासनिक रूप से यह द्वीप यूनाइटेड किंगडम के नियंत्रण में है, लेकिन कूटनीतिक रूप से अर्जेंटीना आज भी इस पर अपना कड़ा दावा पेश कर रहा है।1. प्रशासनिक और जमीनी स्थिति
वर्तमान में फॉकलैंड द्वीप यूनाइटेड किंगडम का एक स्वशासित प्रवासी क्षेत्र है। 2013 में यहां एक जनमत संग्रह हुआ था, जिसमें 99.8% निवासियों ने ब्रिटिश शासन के अधीन रहने के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि, अर्जेंटीना इस जनमत संग्रह को मान्यता नहीं देता है।
2. कूटनीतिक गतिरोध
1982 के युद्ध के बाद 1990 में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध तो बहाल हो गए थे, लेकिन तब से लेकर आज तक संप्रभुता के मुद्दे पर दोनों के बीच कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। अर्जेंटीना अब सैन्य बल के बजाय संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के माध्यम से इस पर अपना दावा पेश करता है।
3. हालिया घटनाक्रम और बढ़ता तनाव
हाल के महीनों में यह विवाद कई कारणों से फिर से गरमा गया है।तेल की खोज का विवाद: दिसंबर 2025 में ब्रिटेन की तरफ से फॉकलैंड में सी लायन फील्ड से तेल निकालने के एक बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है, जिसमें 2028 से तेल उत्पादन शुरू होना है। अर्जेंटीना ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि वह अपने संप्रभु अधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हर संभव कदम उठाएगा। प्राकृतिक संसाधनों (तेल और गैस) की संभावनाओं ने इस भू-राजनीतिक विवाद में एक बड़ा आर्थिक पहलू जोड़ दिया है।
ब्रिटिश नौसेना के जहाज पर आपत्ति: जुलाई 2026 में विश्व कप सेमीफाइनल से ठीक पहले, अर्जेंटीना के विदेश मंत्रालय ने ब्रिटिश जहाज एचएमएस मेडवे की गतिविधियों को लेकर एक आधिकारिक विरोध दर्ज कराया था। अर्जेंटीना का आरोप है कि यह जहाज अवैध रूप से माल्विनास में तैनात है और बिना सूचना दिए अर्जेंटीना के समुद्री क्षेत्र से गुजरा, जो 1990 और 1991 के द्विपक्षीय समझौतों तथा संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन है।
अमेरिकी मेमो का लीक होना: 2026 की शुरुआत में अमेरिकी सरकार का एक मेमो लीक हुआ था, जिसमें द्वीपों पर ब्रिटिश अधिकार पर सवाल उठाया गया था। इस घटना ने विवाद की ओर फिर से वैश्विक ध्यान खींचा।
राष्ट्रपति हावियर मिलेई का बयान: 2026 में 1982 के आक्रमण की बरसी पर, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने खुले तौर पर द्वीपों पर अपने देश के दावे को फिर से दोहराया।
क्या विवादित मुद्दा उठाने के बाद अर्जेंटीना पर कार्रवाई तय?
कार्रवाई क्यों हो सकती है?
- फीफा और इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड (आईएएबी) के नियमों के अनुसार, फुटबॉल मैचों के दौरान खिलाड़ियों या टीम के उपकरणों पर किसी भी तरह के राजनीतिक, धार्मिक या व्यक्तिगत संदेश, नारे या चित्रों का प्रदर्शन पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
- फीफा के नियमों की सूची के तहत स्टेडियम में कोई भी ऐसी सामग्री (जैसे बैनर, झंडे, आदि) ले जाना या दिखाना मना है जो राजनीतिक, आक्रामक या किसी देश के खिलाफ भेदभावपूर्ण प्रकृति की हो।
- चूंकि अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने प्रदर्शित बैनर लास माल्विनास सोन अर्जेंटीनास से सीधे तौर पर फॉकलैंड द्वीपों की संप्रभुता से जुड़ा एक ऐतिहासिक और राजनीतिक संदेश दिया, इसलिए यह फीफा के इन नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना जा रहा है।
क्या कार्रवाई हो सकती है?
- नियमों के किसी भी उल्लंघन के लिए फीफा की तरफ से संबंधित खिलाड़ी और/या पूरी टीम (राष्ट्रीय फुटबॉल संघ) के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है और उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
- हालांकि, 2014 में जब स्लोवेनिया के खिलाफ एक मैच से पहले अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने बिल्कुल यही बैनर दिखाया था तो फीफा ने राजनीतिक अभिव्यक्ति के नियमों के उल्लंघन के चलते अर्जेंटीना फुटबॉल संघ पर महज 20,000 पाउंड का जुर्माना लगाकर उसे छूट दे दी थी।
- इस पुराने मामले को देखा जाए तो यह कयास लगाए जा रहे हैं कि 2026 विश्व कप के इस ताजा मामले में भी फीफा अर्जेंटीना को कड़ी अनुशासनात्मक चेतावनी दे सकता है या उन पर भारी जुर्माना लगा सकता है। हालांकि, खिलाड़ियों या टीम पर फाइनल से पहले कोई कठोर कार्रवाई की संभावना कम ही है।