FATF blacklisting: म्यांमार की और बढ़ेंगी वित्तीय मुश्किलें, एफएटीएफ अगले महीने करेगा ब्लैक लिस्ट
FATF blacklisting: एफएटीएफ की स्थापना जी-7 देशों की पहल पर 1989 में हुई थी। उसका मकसद आतंकवादियों को मिलने वाले चंदे पर रोक लगाना और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की साख को मजबूत करना रहा है। अभी सिर्फ दो देश इस संस्था की काली सूची में हैं। ये हैं- उत्तर कोरिया और ईरान...
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म्यांमार को पेरिस स्थित संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) अपनी काली सूची में डालने वाला है। इससे म्यांमार पर कई तरह के प्रतिबंध लग जाएंगे। साथ ही म्यांमार के सैनिक शासन की वित्तीय साख को इससे गहरा झटका लगेगा। खबरों के मुताबिक एएफटीएफ ये फैसला मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने के सिस्टम पर रोक लगाने में म्यांमार की नाकामी के कारण उठाने जा रहा है।
एफएटीएफ वैश्विक स्तर पर वित्तीय लेन-देन की निगरानी करने वाली संस्था है। संस्था की अगले महीने पेरिस में होने वाली बैठक के दौरान म्यांमार को ब्लैक लिस्ट करने का फैसला होगा। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम ने चार पश्चिमी और एशियाई अधिकारों के हवाले से ये खबर दी है। एफएटीएफ की स्थापना जी-7 देशों की पहल पर 1989 में हुई थी। उसका मकसद आतंकवादियों को मिलने वाले चंदे पर रोक लगाना और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की साख को मजबूत करना रहा है। अभी सिर्फ दो देश इस संस्था की काली सूची में हैं। ये हैं- उत्तर कोरिया और ईरान।
विश्लेषकों ने कहा है कि एफटीएफ की काली सूची में म्यांमार का नाम शामिल होने के बाद सैनिक शासकों के लिए विदेशी निवेश को आकर्षित करना और कठिन हो जाएगा। अभी भी उनके लिए ये उद्देश्य कठिन बना हुआ है। एक एशियाई राजनयिक ने निक्कई एशिया से कहा- ‘म्यांमार में हुई असंतोषजनक प्रगति के कारण एफटीएफ का इंटरनेशनल रिव्यू को-ऑपरेशन ग्रुप अक्तूबर में होने वाली अपनी बैठक के दौरान म्यांमार का नाम काली सूची में डालने की सिफारिश करेगा। असंतोषजनक प्रगति के कारण सैनिक शासन के लिए यह दलील देना मुश्किल होगा कि उसे अभी ब्लैक लिस्ट ना किया जाए।’
इस समय एफएटीएफ की अध्यक्षता सिंगापुर के पास है। सिंगापुर पिछले साल हुए सैनिक तख्ता पलट के बाद से म्यांमार के प्रति सख्त रुख अपनाने का पक्षधर रहा है। राजनयिकों ने कहा है कि एफएटीएफ में फैसले आम तौर पर आम सहमति से होते हैं। लेकिन अगर तीन सदस्य देश साझा पहल करके फैसले को रोक सकते हैं। फिलहाल, एफएटीएफ में ऐसे कोई तीन सदस्य नहीं हैं, जो म्यांमार का बचाव करें।
म्यांमार की सेना ने एक फरवरी 2021 को निर्वाचित सरकार का तख्ता पलट कर सत्ता हथिया ली थी। उसके बाद से पश्चिमी देशों ने उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैँ। उन प्रतिबंधों का अब देश के अंदर असर साफ महसूस हो रहा है। म्यांमार की मुद्रा कियात की कीमत पिछले डेढ़ साल में 60 फीसदी गिर चुकी है। वित्तीय विशेषज्ञों में सहमति है कि म्यांमार के एफएटीएफ की काली सूची में आने के बाद कियात का भाव और गिरेगा।
सिंगापुर स्थित थिंक टैंक आईएसईएएस-युसूफ इशाक इंस्टीट्यूट में एसोसिएट फेलॉ रोमेन कैलॉड ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘एफएटीएफ की काली सूची में आने के बाद म्यांमार उत्तर कोरिया और ईरान की श्रेणी में आ जाएगा। उससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं का उससे सहयोग करना खुद उनके लिए जोखिम भरा हो जाएगा। इसके परिणामस्वरूप आयात-निर्यात संबंधी भुगतान में म्यांमार के लिए पहले से ही जारी दिक्कतें और गंभीर रूप ले लेंगी।’