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रिपोर्ट में हुआ खुलासा, इतने करोड़ में यूजर्स का डाटा बेचने वाली थी फेसबुक

Sun, 13 Jan 2019 12:57 PM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shilpa Thakur Updated Sun, 13 Jan 2019 12:57 PM IST
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Facebook planned to sell users data in 2012 says report
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हाल ही में करोड़ा यूजर्स का डाटा चोरी होने के चलते फेसबुक काफी चर्चा में रहा। सीईओ मार्क जुकरबर्ग को इसी कारण अमेरिकी सांसदों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। केवल इतना ही नहीं इस खबर के आते ही फेसबुक के शेयर भी मार्केट में गिर गए और उसे काफी नुकसान झेलना पड़ा था। अब एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि फेसबुक यूजर्स का डाटा चोरी कर उसे करोड़ों में बेचने वाली थी।


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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि यूजर्स का डाटा बेचने की योजना फेसबुक ने 2012 में बनाई थी। फेसबुक डाटा को 1.75 कराेड़ रुपये में बचने वाली थी। हालांकि बाद में कंपनी ने ऐसा नहीं किया। इसपर वेबसाइट आर्स्टेक्निका डॉट कॉम का कहना है कि साल 2012 में फेसबुक ने यूजर डाटा कंपनियों को देने के लिए एक करोड़ 75 लाख रुपए (2.50 लाख डॉलर) की कीमत तय की थी। यह वेबसाइट मामले से जुड़े कोर्ट के दस्तावेज देख चुकी है।

वाल स्ट्रीट जर्नल में छपी रिपोर्ट 

अमेरिकी अखबार वाल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार फेसबुक कर्मियों ने कुछ विज्ञापनदाताओं को यूजर डाटा के बदले और अधिक रुपये देने का दबाव डालने पर चर्चा की थी। वहीं इस रिपोर्ट में कहा गया है कि फेसबुक ने ग्राफ एपीआई कार्यप्रणाली को अप्रैल 2014 में बदल दिया था। इसके बाद कुछ डाटा को कंपनी ने प्रतिबंधित कर दिया। इसके अलावा जून, 2015 तक पहले के सभी वर्जन के लिए सभी तरह के एक्सेस का सफाया भी किया गया।

फेसबुक ने कंपनियों को दी थी अनुमति

वेबसाइट की रिपोर्ट में कहा गया है कि फेसबुक ने विभिन्न कंपनियों को ग्राफ एपीआई की 'वी1.0' को चलाने की अनुमति दी थी। इन कंपनियों में पहले निसान और रॉयल बैंक ऑफ कनाडा थीं। बाद में इसमें क्रिस्लर/फिएट, लिफ्ट, एयरबीएनबी और नेटफ्लिक्स आदि कंपनियां भी शामिल हो गईं।

सफाई में फेसबुक ने क्या कहा?

बचाव में फेसबुक के प्रवक्ता ने कहा है कि अदालत के दस्तावेजों में निसान और रॉयल बैंक ऑफ कनाडा के अलावा क्रिस्लर/फिएट और बाकी कंपनियों का नाम गलती से आ गया है। इसके साथ ही फेसबुक ने ये भी कहा है कि वह अपना बचाव करती रहेगी।

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