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यूजर्स की प्राइवेसी के लिए फेसबुक ने अबतक नहीं किया कोई काम: कैरोल कैडवलाडर

Mon, 29 Apr 2019 10:44 AM IST
Priyesh Mishra वर्ल्ड डेस्क, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, वाशिंगटन Published by: Priyesh Mishra Updated Mon, 29 Apr 2019 10:44 AM IST
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Facebook has not done any work for privacy Security of users, says Carole Cadwalladr
Carole Cadwalladr (File Photo) - फोटो : सोशल मीडिया
फेसबुक-कैंब्रिज एनालिटिका मामले का भंडाफोड़ करने वाली पत्रकार कैरोल कैडवलाडर ने आरोप लगाया है कि फेसबुक ने यूजर्स की प्राइवेसी की सुरक्षा को लेकर अब तक कोई उपाय नहीं किया है। कैरोल ने ब्रिटिश संसद में सफाई देने के लिए न आने को लेकर भी फेसबुक के फाउंडर मार्क जकरबर्ग की भी आलोचना की।
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पिछले साल की शुरुआत में फेसबुक-कैंब्रिज एनालिटिका स्कैंडल का खुलासा हुआ था। जिसके अनुसार राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के करीब 8.7 करोड़ यूजर्स के डेटा चुराए थे। आरोप यह भी है कि इसका इस्तेमाल अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया गया था।
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कैरोल कैडवलाडर ने फेसबुक और ट्विटर के शीर्ष अधिकारियों को चुनौती दी कि वे किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होकर उन पर लगे आरोपों पर अपनी सफाई दें। हालांकि ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी इसी सप्ताह ऐसे ही एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं।
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इस मामले में ब्रिटिश संसद द्वारा समन किए जाने पर पेश न होने को लेकर भी कैरोल ने फेसबुक के फाउंडर मार्क जकरबर्ग की आलोचना की।  उन्होंने कहा कि कुछ कंपनियां खुद को सिलिकॉन भगवान समझने लगी हैं। ये कई देशों में चुनाव को प्रभावित भी कर रही हैं। लेकिन जब उनको समन किया जाता है तो वह पेश भी नहीं होते।

मार्क जकरबर्ग ने कहा- इंटरनेट कंटेंट की निगरानी अकेले नहीं कर सकते

Facebook has not done any work for privacy Security of users, says Carole Cadwalladr
मार्क जकरबर्ग
फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने कहा था कि सोशल मीडिया फेसबुक पर फेक न्यूज और हिंसक कंटेंट की निगरानी करना अकेले कंपनियों के बस की बात नहीं है। दुनियाभर की सरकारें इसमें सक्रिय भूमिका अदा कर सकती हैं। मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि सरकारों को हानिकारक कंटेंट, चुनाव से जुड़ी सामग्री, निजता और डेटा पोर्टेबिलिटी को लेकर नियम बनाने चाहिए और इन्हें लागू कराने की जिम्मेदारी रेगुलेटरों पर होनी चाहिए। जकरबर्ग ने यह राय वाशिंगटन पोस्ट में लिखे अपने आलेख में दी थी। 

फेसबुक पर आरोप लगता रहा है कि वह फेक न्यूज और हिंसक कंटेंट के प्रसार पर लगाम लगाने में नाकाम रहा है। हलांकि फेसबुक ने कई बाद दावा किया कि वह इस दिशा में काम कर रही है। 
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