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फेसबुक-टि्वटर ने जैसी फुर्ती अमेरिका में दिखाई, बाकी देशों में नहीं

Mon, 18 Jan 2021 06:37 AM IST
Kuldeep Singh न्ययॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
न्ययॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 18 Jan 2021 06:37 AM IST
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Facebook and Twitter shows quickness in America, not in other countries in the world
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कैपिटल हिल में हिंसा के बाद फेसबुक-ट्विटर ने जितनी तेजी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अकाउंट बंद करने में दिखाई है, वैसी ही फुर्ती की उम्मीद इनसे बाकी देशों में भी की जाने लगी है।

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मानवाधिकार संगठनों ने कहा, कुछ देशों को छोड़ दुनिया भर में मोहन रहती है ये कंपनियां
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि अरसे से दोनों कंपनियों को कई देशों के नेताओं और अधिकारियों द्वारा घृणा फैलाने वाले भाषण व हिंसा भड़काने वाले बयानों की शिकायत की जाती रही है, पर यह खामोश रही हैं। अपवाद के दौर पर तौर पर कुछ देशों को छोड़ दिया जाए तो कहीं कार्रवाई नहीं की गई।
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आरोप: हिंसा भड़काने के सुबूत होने के बावजूद नहीं की कार्रवाई
जानकारों का कहना है कि आगे किसी भी देश में यह कंपनियां हिंसा फैलाने वाली पोस्टों पर त्वरित कार्रवाई से चूकेंगी तो यह ट्रंप के खिलाफ उठाए गए कदम का बचाव नहीं कर पाएंगे और इनकी छवि ज्यादा खराब होगी। इन कंपनियों की ने कई जगह हिंसा भड़काने के सबूत होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की है।
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संयुक्त राष्ट्र में अभिव्यक्ति की आजादी के पूर्व निगरानी करता प्रोफेसर डेविड काय का कहना है, वैसे तो ब्राजील, फिलिपिंस और भारत समेत कई देशों में राजनेताओं के ऑनलाइन व्यवहार की जांच होनी चाहिए। अकेले फेसबुक के 2.7 अरब उपयोगकर्ताओं में से 90 फीसदी अमेरिका से बाहर के हैं। लेकिन दोनों साइट्स ने अमेरिका में ही ताकत का इस्तेमाल क्यों किया।

इथोपिया में एक्सेस नाउ संगठन में नीति निदेशक जेवियर पलेरो कहते हैं कि ट्विटर फेसबुक को ट्रंप के अकाउंट बहुत पहले बंद कर देने चाहिए थे। अब इन्हें ऐसे कदम दुनिया भर में समय-समय पर उठाने होंगे।

नियत पर इसलिए उठे सवाल

  • सबके लिए नहीं एक समान नीति
  • कुछ देशों में तो इसके लिए अधिकारी स्थानीय भाषा संस्कृति नया समझने के कारण हिंसा फैलाने वाली पोस्ट हटा ही नहीं पाते।
  • स्लोवाकियाई कोर्ट द्वारा सांसद को भड़काऊ और नस्ली बयानों के लिए दोषी ठहराए जाने के बावजूद कंपनी ने 2019 में उसकी पोस्टें नहीं हटाई थी।
  • कंबोडिया में मानवाधिकार की पैरवी करने वाले एक बौद्ध साधु को सोशल मीडिया पर बदनाम करने में शामिल है सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही में ढिलाई बरती थी।
  • फिलीपींस में राष्ट्रपति रोड्रीगो दुतेर्ते पर फेसबुक के जरिए पत्रकारों और आलोचकों पर निशाना साधने का आरोप लगता रहा है।
  • इथोपिया आई कार्यकर्ताओं ने फेसबुक पोस्टों के जरिए हिंसा और भेदभाव बढ़ाने की बात कही थी, पर खास ध्यान नहीं दिया।

और सफाई... नियम सबके लिए समान
हाल ही में फेसबुक की सीईओ शेरिल सैंडबर्ग ने कहा था कि उनकी नीतियां सभी पर समान रूप से लागू होती हैं। इस में हिंसा भड़काना शामिल है। वहीं ट्विटर के मुताबिक हिंसा से जुड़ी पोस्टों की समीक्षा में दुनिया के राजनेताओं को लेकर उसके नियम अलग-अलग नहीं है।

अचानक बढ़ी सक्रियता
डोनाल्ड ट्रंप को रोकने के बाद फेसबुक और ट्विटर ने ज्यादा सक्रियता दिखाई। ट्विटर ने अपनी नीति में बदलाव करते हुए कहा राजनीतिक सामग्री से जुड़े नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वालों के अकाउंट स्थायी और तौर पर बंद कर दिए जाएंगे।

फेसबुक ने अमेरिका के बाहर कहीं अकाउंट डिलीट की हैं। इनमें ईरान में सरकारी मीडिया संस्थान और युगांडा में चुनावों के दौरान हिंसा भड़काने वाले कुछ सरकारी अकाउंट शामिल हैं।

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