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US-Iran Tensions: दक्षिणी ईरान में अमेरिका का हवाई हमला, माइन बिछा रही नौकाएं और मिसाइल लॉन्च साइट बने निशाना

Tue, 26 May 2026 05:43 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 26 May 2026 05:43 AM IST
सार

अमेरिका ने दक्षिणी ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास मिसाइल लॉन्च साइटों और माइन बिछा रही ईरानी नौकाओं पर सेल्फ डिफेंस हमला किया है। अमेरिकी सेना ने कहा कि यह कार्रवाई सैनिकों की सुरक्षा के लिए की गई। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करने की बात कही है। वहीं, दोनों देशों के बीच युद्धविराम और परमाणु समझौते को लेकर बातचीत भी जारी है। आइे, विस्तार से मामले को जानते हैं...

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US military strikes in southern Iran- targets boats attempting to lay mines and ⁠missile launch sites
धमाकों के बाद ईरानी सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दक्षिणी ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका ने सेल्फ डिफेंस स्ट्राइक करते हुए ईरानी मिसाइल लॉन्च साइटों और माइन बिछाने की कोशिश कर रही नौकाओं को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने कहा कि यह कार्रवाई अपने सैनिकों और युद्धपोतों की सुरक्षा के लिए की गई। खास बात यह है कि यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम और परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ा दिया है।
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आखिर अमेरिका ने ईरान पर हमला क्यों किया?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम के अनुसार ईरानी बलों की गतिविधियां अमेरिकी सैनिकों और जहाजों के लिए खतरा बन रही थीं। इसी वजह से अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में सीमित लेकिन सटीक कार्रवाई की। सेंटकॉम के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी सेना ने आत्मरक्षा में यह हमला किया और साथ ही संयम भी बरता।
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अमेरिका का दावा है कि ईरानी नौकाएं होर्मुज जलडमरूमध्य के पास समुद्र में माइन बिछाने की कोशिश कर रही थीं। इसके अलावा कुछ मिसाइल लॉन्च साइटों को भी सक्रिय किया जा रहा था। अमेरिकी सेना ने इन्हें संभावित खतरा मानते हुए निशाना बनाया। हालांकि हमले में कितना नुकसान हुआ, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
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ये भी पढ़ें- Report: परमाणु समझौते पर बढ़ी उम्मीद, लेकिन मतभेद कायम; शांति समझौते की राह में अब भी कई बड़ी बाधाएं

क्या युद्धविराम के बीच पहले भी हुई है ऐसी कार्रवाई?
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम के दौरान भी पहले कई बार तनावपूर्ण घटनाएं हो चुकी हैं। मई की शुरुआत में भी अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया था। उस समय अमेरिका ने आरोप लगाया था कि ईरान ने उसके युद्धपोतों पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नौकाओं से हमला करने की कोशिश की थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ता है। यही वजह है कि अमेरिका इस क्षेत्र में लगातार सैन्य निगरानी बनाए हुए है।

ट्रंप ने यूरेनियम को लेकर क्या बड़ा बयान दिया?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान का न्यूक्लियर डस्ट यानी संवर्धित यूरेनियम या तो अमेरिका को सौंपा जाएगा ताकि उसे नष्ट किया जा सके, या फिर ईरान के साथ मिलकर उसी जगह पर खत्म किया जाएगा।

ट्रंप ने संकेत दिए कि दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बातचीत “अच्छे तरीके से” चल रही है। वहीं ईरान ने भी माना है कि कई मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के बार-बार बदलते रुख से बातचीत जटिल हो रही है।

अब्राहम समझौते को लेकर ट्रंप की नई शर्त क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान समझौते को अब्राहम समझौतों से भी जोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों को भी इस्राइल के साथ संबंध सामान्य करने वाले अब्राहम समझौतों में शामिल होना चाहिए।

हालांकि पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि इस्राइल को लेकर उसका रुख नहीं बदला है। सऊदी अरब ने भी कहा है कि फलस्तीनी राष्ट्र के स्पष्ट रास्ते के बिना इस्राइल के साथ पूर्ण संबंध संभव नहीं हैं। ट्रंप के इस प्रस्ताव ने कूटनीतिक बातचीत को और जटिल बना दिया है।


ईरान ने अमेरिकी बातचीत पर क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि कई मुद्दों पर बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन अभी किसी अंतिम समझौते का दावा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के बदलते बयान बातचीत को मुश्किल बना रहे हैं।

ईरान का कहना है कि वह शांति समझौते को लेकर गंभीर है, लेकिन उसे अमेरिका की नीतियों पर भरोसा चाहिए। दूसरी ओर अमेरिका लगातार सैन्य दबाव बनाए हुए है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश बातचीत के रास्ते आगे बढ़ते हैं या तनाव और बढ़ता है।
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