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चीन: शी जिनपिंग ने कर ली जीवन भर राष्ट्रपति बने रहने की तैयारी, माओ को बनाया रोल मॉडल
Fri, 22 Oct 2021 03:51 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 22 Oct 2021 03:51 PM IST
सार
विश्लेषकों का कहना है कि अगले प्रस्ताव को तीसरा एतिहासिक प्रस्ताव कहने का गंभीर अर्थ है। इसका मतलब है कि शी जिनपिंग अपने को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के तीसरे सबसे बड़े नेता के रूप में स्थापित करने जा रहे हैं। विशलेषकों ने ध्यान दिलाया है कि माओ और देंग जीवनभर पार्टी के सर्वोच्च नेता बने रहे...
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शी जिनपिंग
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
पिछले कुछ दिनों के अंदर चीन में हुई दो खास घटनाओं की विश्व मीडिया में खासी चर्चा है। इनमें एक चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट में तैयार हुआ ‘तीसरा एतिहासिक दस्तावेज’ है। दूसरी घटना चीन में ‘साझा समृद्धि’ को नया लक्ष्य घोषित किया जाना है। जानकारों का कहना है कि आने वाले वर्षों में चीन की सूरत इन्हीं दोनों बातों से तय होगी।
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वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम पर छपे एक लंबे विश्लेषण में कहा गया है कि चीन इस समय एक एतिहासिक मोड़ पर है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एक सूत्र ने इस वेबसाइट से कहा- ‘इसमें कोई शक नहीं है कि शी जिनपिंग अब जीवन भर पार्टी का नेता बने रहने की तैयारी में हैं। इस तरह वे उन दो नेताओं की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे, जिनके समय में पहला और दूसरा एतिहासिक दस्तावेज स्वीकार किए गए थे।’ उस सूत्र ने जिन दो पूर्व नेताओं का जिक्र किया, वे माओ जेदुंग और देंग शियापिंग हैं।
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विश्लेषकों ने कहा है कि इस सिक्के का दूसरा पहलू ‘साझा समृद्धि’ की सोच है। इस सोच को चीन में अगले दस से 15 साल तक गंभीरता और सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। जानकारों के मुताबिक ‘तीसरे एतिहासिक दस्तावेज’ पर इस साल जून में कम्युनिस्ट पार्टी के शताब्दी समारोह से ठीक पहले सहमति बनी थी। लेकिन उसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। खबरों के मुताबिक उसे अगले महीने का आरंभ में सार्वजनिक किया जाएगा।
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कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो ने बीते सोमवार को फैसला किया कि पार्टी की एक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक बैठक अगले आठ से 11 नवंबर तक होगी। उसमें पार्टी की बीते 100 साल में ‘प्रमुख उपलब्धियों’ के बारे में एक प्रस्ताव पास होगा। इसे ही तीसरा एतिहासिक दस्तावेज कहा जा रहा है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ऐसे प्रस्ताव इसके पहले सिर्फ 1945 और 1981 में पारित किए थे। पहले प्रस्ताव का मसविदा माओ जे दुंग की देखरेख में तैयार किया गया था। दूसरी बार ये भूमिका देंग श्याओपिंग ने निभाई।
विश्लेषकों का कहना है कि अगले प्रस्ताव को तीसरा एतिहासिक प्रस्ताव कहने का गंभीर अर्थ है। इसका मतलब है कि शी जिनपिंग अपने को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के तीसरे सबसे बड़े नेता के रूप में स्थापित करने जा रहे हैं। विशलेषकों ने ध्यान दिलाया है कि माओ और देंग जीवनभर पार्टी के सर्वोच्च नेता बने रहे। इसलिए अब पूरी संभावना है कि शी भी अपनी वैसी ही हैसियत बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
इस सिलसिले में ये चर्चा भी है कि शी ने अब माओ को अपना रोल मॉडल बना लिया है। शी 2012 में कम्युनिस्ट पार्टी का प्रमुख बने थे। उनके पहले यह नियम लागू हो गया था कि कोई व्यक्ति लगातार दो कार्यकाल तक ही इस पद पर रह सकता है। लेकिन इस नियम में पहले ही छूट दी जा चुकी है। अब संभावना है कि शी को जीवन भर के लिए नेता चुन लिया जाएगा। शी ने हाल में साझा समृद्धि का विचार रखा। विश्लेषकों का कहना है कि उस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अब चीन संभवतया शी के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगा।