FATF: पाकिस्तान का साथ देना तुर्की को पड़ सकता है भारी, विशेषज्ञों ने बताया किस तरह से होगा नुकसान
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पॉलिसी रिसर्च ग्रुप में एक लेख में लंदन स्थित व्यापार सलाहकार जेम्स क्रिक्टन ने बताया कि ऐसे में जब राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन और प्रधानमंत्री इमरान खान की दोस्ती जग जाहिर है। तुर्की और पाकिस्तान के बीच संबंध दिन पर दिन मजबूत होते जा रहे हैं। ऐसे में एफएटीएफ के कदम से तुर्की और पाकिस्तान के संबंधों पर असर पड़ सकता है।
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आतंकी फंडिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ने बीते महीने माली और जॉर्डन के साथ तुर्की को भी ग्रे-लिस्ट में रखा था। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स दुनिया में आतंकी फंडिंग पर नजर बनाए रखती है। पाकिस्तान पहले से ही इस सूची में था। इसके बाद माली, जॉर्डन और तुर्की को इस सूची में शामिल किया गया। पाकिस्तान पहले से ही ग्रे लिस्ट में था। अब मामले से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि एफएटीएफ के इस कदम से तुर्की का काफी नुकसान हो सकता है। भारत के खिलाफ लामबंदी में पाकिस्तान का साथ देने वाला तुर्की आर्थिक मोर्चे पर कमजोर पड़ सकता है।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पॉलिसी रिसर्च ग्रुप में एक लेख में लंदन स्थित व्यापार सलाहकार जेम्स क्रिक्टन ने बताया कि ऐसे में जब राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन और प्रधानमंत्री इमरान खान की दोस्ती जग जाहिर है। तुर्की और पाकिस्तान के बीच संबंध दिन पर दिन मजबूत होते जा रहे हैं। ऐसे में एफएटीएफ के कदम से तुर्की और पाकिस्तान के संबंधों पर असर पड़ सकता है।
क्रिक्टन ने बताया कि कि एफएटीएफ के फैसले के बाद हालात बदल गए हैं। आने वाले वक्त में तुर्की पहले की तरह इस्लामाबाद को सहायता देने वाला नहीं है। उनका मानना है कि समय के साथ तुर्की के लिए हालात और खराब होते ही जाएंगे। दरअसल, कश्मीर के मसले पर पाकिस्तान को तुर्की का साथ हमेशा मिलता रहा है। एफएटीएफ के फैसले के बाद पाकिस्तान की स्थिति तो अधर में लटक गई है, पर तुर्की के लिए भी आने वाला समय आसान नहीं रहने वाला है।