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खोज: सौरमंडल में दिखे रोमांचक संकेत, टेलीस्कोप ने पकड़ी रहस्यमयी किरणें; अज्ञात स्रोत से मिलीं गामा किरणें
Sat, 29 Nov 2025 08:07 AM IST
शुभम कुमार
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: शुभम कुमार
Updated Sat, 29 Nov 2025 08:07 AM IST
सार
शोधकर्ता कह रहे हैं कि फर्मी टेलीस्कोप के डेटा में जो 20 जीईवी ऊर्जा वाली गामा किरणें मिली हैं उसके जैसे पैटर्न और चमक को पैदा करने वाला कोई भी ज्ञात खगोलीय स्रोत जैसे पल्सर, सुपरनोवा अवशेष, तारों का समूह आदि अब तक पहचाना नहीं जा सका है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ब्रह्मांड का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा ऐसा पदार्थ है जिसे न आंखें देख पाती हैं और न वैज्ञानिक उपकरण, इसे ही डार्क मैटर कहा जाता है। पहली बार इस रहस्यमयी तत्व के प्रत्यक्ष अवलोकन की उम्मीद जगाने वाले संकेत नासा के फर्मी गामा-रे टेलीस्कोप से मिले हैं। मिल्की वे के केंद्र से रिकॉर्ड की गई 20 जीईवी ऊर्जा वाली गामा-किरणें वैज्ञानिकों को हैरान कर रही हैं, क्योंकि वे ठीक वही पैटर्न दिखाती हैं जिसकी भविष्यवाणी डार्क मैटर सिद्धांत वर्षों से करता आया है।
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शोधकर्ता कह रहे हैं कि फर्मी टेलीस्कोप के डेटा में जो 20 जीईवी ऊर्जा वाली गामा किरणें मिली हैं उसके जैसे पैटर्न और चमक को पैदा करने वाला कोई भी ज्ञात खगोलीय स्रोत जैसे पल्सर, सुपरनोवा अवशेष, तारों का समूह आदि अब तक पहचाना नहीं जा सका है। इन गामा किरणों की विशेष ऊर्जा और पैटर्न को आज तक किसी भी ज्ञात तारा, ग्रह, ब्लैक होल, पल्सर या सुपरनोवा से जोड़ा नहीं जा सका इसलिए इन्हें डार्क मैटर से जोड़ने की संभावना सामने आई है।
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आकाशगंगा के चारों तरफ दिख रहीं गामा किरणें
टोक्यो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने डेटा विश्लेषण में पाया कि आकाशगंगा के केंद्रीय हिस्से के चारों ओर 20 जीईवी ऊर्जा वाली गामा किरणों की चमकदार परत (हेलो) दिखाई दे रही है। यह संकेत उसी सैद्धांतिक मॉडल से मेल खाता है। 20 जीईवी संकेत का मतलब है, फर्मी टेलीस्कोप ने ऐसी गामा किरणें पकड़ी हैं जिनकी ऊर्जा 20 गीगा इलेक्ट्रॉन वोल्ट (जीईवी)है। यह ऊर्जा स्तर वही है जिसकी भविष्यवाणी वैज्ञानिकों ने डार्क मैटर कणों के टकराव या नष्ट होने पर होने वाली गामा किरणों के लिए की थी।
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