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एशिया में प्रभाव बढ़ाने की तैयारी: चीन को घेरना चाहता है यूरोपियन यूनियन, लेकिन बचते-बचाते!

Wed, 15 Sep 2021 06:35 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 15 Sep 2021 06:35 PM IST
सार

ईयू ने इस मामले में एक दस्तावेज तैयार किया है, जिसमें ताइवान जैसे उन सहभागी देशों के साथ व्यापार और निवेश संबंध आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है, जिनके साथ उसके व्यापार और निवेश संबंधी समझौते नहीं हैं। लेकिन इसमें ताइवान के साथ द्विपक्षीय निवेश समझौता करने जैसी बात सीधे तौर पर नहीं कही गई है।

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European union seek further strengthen its semiconductor value chain relationship with its Asian partners except china
यूरोपियन यूनियन और चीन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर के साथ नया डिजिटल पार्टनरशिप कायम करने का इरादा जताया है। साथ ही उसने ताइवान के साथ अपने व्यापार और निवेश संबंध को और गहरा करने की इच्छा व्यक्त की है। बताया जाता है कि ईयू की इस ताजा पहल के पीछे मकसद चीन को घेरना और अफगानिस्तान से पश्चिमी देशों की सेना के वापसी के बाद एशिया में नए सिरे से अपना प्रभाव बढ़ाना है।

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ईयू ने इस मामले में एक दस्तावेज तैयार किया है। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम के मुताबिक इस दस्तावेज की कॉपी उसे हाथ लगी है, जिसका उसके विश्लेषकों ने अध्ययन ने किया है। इसके मुताबिक ईयू अपने एशियाई पार्टनरों के साथ सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन संबंधी रिश्ते को और मजबूत करने की कोशिश करेगा।
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निक्कई एशिया के मुताबिक इस दस्तावेज के अध्ययन से ये बात जाहिर होती है कि इसे तैयार करते वक्त चीन संबंधी चिंता छायी रही। इसमें कहा गया है- ‘उस क्षेत्र में लोकांत्रिक सिद्धांत और मानवाधिकारों के लिए तानाशाही व्यवस्था से खतरा पैदा हो रहा है। इसी तरह एकतरफा अनुचित व्यापार व्यवहार और आर्थिक जोर-जबर्दस्ती के कारण विश्व स्तर पर समान और पारदर्शी व्यापार नियम स्थापित करने की कोशिशों की अनदेखी हो रही है।’
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लेकिन दस्तावेज में चीन की सीधी आलोचना से बचा गया है और उसके साथ बहु-आयामी संबंध बनाने पर जोर दिया गया है। दस्तावेज में कहा गया है कि दक्षिण चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य जैसे समुद्री क्षेत्रों में तनाव बढ़ने का यूरोपीय सुरक्षा और समृद्धि पर खराब असर पड़ेगा। निक्कई एशिया का कहना है कि उसने जिस दस्तावेज का अध्ययन किया है, वह अंतिम नहीं है। इस प्रारूप को विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।

ईयू ने ताइवान जैसे उन सहभागी देशों के साथ व्यापार और निवेश संबंध आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है, जिनके साथ उसके व्यापार और निवेश संबंधी समझौते नहीं हैं। लेकिन इसमें ताइवान के साथ द्विपक्षीय निवेश समझौता करने जैसी बात सीधे तौर पर नहीं कही गई है। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने बीते मई में ईयू के साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौता करने की इच्छा जताई थी।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक ईयू इस बात के प्रति सतर्क है कि वैसा समझौता चीन को रास नहीं आएगा। हाल में ईयू के सदस्य देश लिथुआनिया ने अपनी राजधानी विलनियस में ‘ताइवान के प्रतिनिधि’ का दफ्तर खोला था। उससे नाराज चीन ने लिथुआनिया ने राजनयिक संबंध तोड़ लिए थे।

दस्तावेज में चार देशों के समूह क्वैड के साथ मिल कर काम करने की इच्छा जताई गई है। क्वैड में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैँ। क्वैड एक सुरक्षा समूह है। दस्तावेज में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन, टेक्नोलॉजी और वैक्सीन जैसे साझा हित के मसलों पर वह क्वैड के साथ सहयोग करना चाहता है।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक ईयू के दस्तावेज का मूल स्वर चीन के खिलाफ है। लेकिन इसमें ये बात करते समय सावधानी बरती गई है। ईयू सीधे चीन से टकराव लेने के पक्ष में नहीं दिखता। बल्कि वह इस मामले में परोक्ष नीति अपनाना चाहता है।

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