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किसने लिखी होगी फैशन की पहली किताब?

Wed, 12 Jun 2013 04:32 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Wed, 12 Jun 2013 04:32 PM IST
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who wrote first book of fashion

आख़िर 16वीं शताब्दी के एक एकाउंटेंट ने फ़ैशन के इतिहास के सबसे अनोखे दस्तावेज़, दुनिया की पहली फ़ैशन की किताब को कैसे तैयार किया होगा?

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फ़ैशन के इतिहास का लेखा-जोखा तैयार करना एक ऐसा काम है जिसकी उम्मीद आमतौर पर एक एकाउटेंट से नहीं की जाती है।

लेकिन जर्मनी के ऑग्सबर्ग में स्टाइल के शौक़ीन एकाउटेंट मैथ्युज श्वाज ने 40 वर्षों तक अपने पहनावे का पूरा विवरण लिखकर तैयार किया था।

इसी किताब को इतिहासकार फ़ैशन की दुनिया की पहली किताब मानते हैं।

अनोखी कोशिश
श्वाज ने 23 वर्ष की उम्र से अपनी वाटरकलर पेंटिंग तैयार करनी शुरू कर दी, जो 63 वर्ष की उम्र तक चली।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का दूसरा चित्रित रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अर्ली मॉडर्न यूरोपियन हिस्ट्री की रीडर और 'ड्रेसिंग अप: कल्चरल आइडेंटिटी इन रेनेसाँ यूरोप' की लेखक डॉक्टर यूलिंका रुब्लैक ने बताया, "उन्होंने जो तैयार किया वह फ़ैशन के इतिहास के सर्वाधिक अनोखे दस्तावेज़ों में शामिल है। यह सूचनाओं का खज़ाना है।"
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इस किताब के महत्व को फिर से दुनिया के सामने लाने वाली रुब्लैक ने बताया कि इसे जर्मनी स्थित ब्राउंश्वाइक के एक छोटे से म्यूज़ियम में रखा गया है।

इस किताब का विस्तृत अध्ययन अभी तक नहीं किया गया था।

नए प्रयोग
वह बताती हैं कि श्वाज वास्तव में ऐसे आविष्कारक हैं, जिन्होंने स्टाइल के दायरे को बढ़ाया।

उनकी किताब ने भी ऐतिहासिक फ़ैशन के बारे में स्थापित विचारों को चुनौती दी।

उन्होंने इस बात को ग़लत साबित किया कि केवल अमीर ही स्टाइलिश दिख सकते हैं।

श्वाज फुगर परिवार के हेड एकाउंटेंट था, जो उस समय जर्मनी का सबसे महत्वपूर्ण और धनी व्यापारी परिवार था।

उन्होंने 1520 में अपने पहनावे का रिकॉर्ड रखना शुरू किया।

उन्होंने सबसे पहले बचपन से लेकर 23 साल की उम्र तक अपने पहनावे से संबंधित 36 चित्र तैयार किए।

वाटरकलर चित्र
उन्होंने चार दशक के दौरान अपने पहनावे को लेकर कुल 137 वाटरकलर चित्र तैयार कराए। इसके लिए तीन प्रमुख चित्रकारों की मदद ली गई।

यह सिलसिला 63 साल की उम्र तक जारी रहा और उसके बाद उनकी बाइन्डिंग कर किताब तैयार कराई गई, जिसे हम श्वाज बुक ऑफ़ क्लोद्स के नाम से जानते हैं।

रुब्लैक बताती हैं कि श्वाज इसलिए उल्लेखनीय हैं क्योंकि वह पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने फ़ैशन के सांस्कृतिक पक्ष को समझा।

वह बताती हैं, "श्वाज एक आविष्कार थे, वह अपने स्टाइल के साथ खेल रहे थे, नए कट्स, रंग, फैब्रिक और ब्यौरे की खोज कर रहे थे और मज़े ले रहे थे। ऐसा करना हमेशा आसान नहीं था। उनके जीवनकाल में कपड़ों को लेकर सख़्त सामाजिक क़ायदे-क़ानून थे। पहनावा और आभूषण किसी व्यक्ति की पदवी के अनुसार निर्धारित थे।"
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ऐसे में जब उन्होंने फ़ैशन के दायरे को बढ़ाने की कोशिश की तो उन्हें यह भी ध्यान रखना था कि वह सीमाओं का अतिक्रमण न करें।

बंदिशें बेअसर
निश्चित रूप से एक कर्मचारी को इस बात की इजाज़त नहीं थी कि वह अपने मालिक के मुक़ाबले अधिक शानदार कपड़े पहनें।

श्वाज के लिए जटिलताएँ काफ़ी अधिक थीं। उनके अत्यधिक धनी कर्मचारी इस बात को लेकर चिंतित थे कि कहीं वह अपने पहनावे से बहुत अधिक अमीर न दिखने लगें। ऐसे में श्वाज को बहुत अधिक चालाक होने की ज़रूरत थी और यह योग्यता उनमें थी।

वस्त्र और परिधान की विशेषज्ञ मारिया हेवार्ड ने बताया कि यदि क़ानून किसी ख़ास कपड़े या आभूषण पर प्रतिबंध लगाते थे तो वह एक अलग तरीक़ा अपना लेते थे।

वह बताती हैं, "उदाहरण के लिए यदि फैंसी होज (एक तरह का अधोवस्त्र) वर्जित था तो वह फैंसी बाहों को अपना लेते थे।"

कपड़ों पर खर्च
एक प्रमुख व्यापारी के यहाँ काम करने के कारण वह अच्छे कपड़े और अन्य सामग्रियों को आसानी से प्राप्त कर लेते थे।

उनके सभी कपड़े हाथ से तैयार किए गए थे क्योंकि उन दिनों सिलाई मशीन नहीं थी। इसके लिए श्वाज को काफ़ी ख़र्च करना पड़ता था।

वह बहुत अधिक धनी नहीं थे लेकिन उनकी आमदनी अच्छी थी और वह इसका ज़्यादातर हिस्सा कपड़ों पर ख़र्च करना पसंद करते थे।

उनके ज़्यादातर पहनावे काफ़ी बड़े थे।

उनके 26वें जन्मदिन के तुरंत बाद पेंट की गई एक तस्वीर में वह एक शानदार सफ़ेद होस और डब्लिट (एक कसी हुई जैकेट) में दिखाई दे रहे हैं।

श्वाज ने अपने नोट में लिखा है कि इस डब्लिट में 4,800 छोटे गुलाबी कपड़ों की कढ़ाई की गई है।

उनके कपड़ों के रंग और सहायक सज्जा का ख़ास अर्थ होता था। कपड़ों में सफ़ेद रंग का इस्तेमाल विश्वास और मानवता को बताता है।

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