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सौर ऊर्जा के सहारे समुद्र में बिताए 585 दिन

Mon, 09 Sep 2013 06:44 PM IST
Updated Mon, 09 Sep 2013 06:44 PM IST
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voyage of solar boat

बिना ईंधन या नाविकों के सौ टन के धातु के साथ आप दुनिया का चक्कर कैसे लगा सकते हैं? स्विस निवेशकों और जर्मन इंजीनियरों के एक ग्रुप के लिए इसका जवाब बहुत सीधा है- सूर्य।

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न्यूजीलैंड से कुछ डिजाइन की विशेषज्ञता हासिल की गई और बन गई एमएस टुरेनर प्लेनेट सोलर।

यह दुनिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा से चलने वाली नाव है।

प्लेनेट सोलर के राशेल ब्रदर्स दि प्यूक्रीडन कहते हैं, "विचार यह था कि सौर ऊर्जा की असीमित क्षमताओं को दिखाने के लिए दुनिया का चक्कर लगाया जाए।"

करीब 60,000 किलोमीटर चलकर उनके दल ने इसे दुनिया को दिखा भी दिया।

कप्तान भी कम नहीं
टुरेनर को ताकत 500 वर्गमीटर के सौर पैनलों से मिलती है, जिनसे 60 वॉट के बिजली के दो इंजन चलते हैं।

यह बारी-बारी से स्टैंडर्ड प्रोपेलर को चलाते हैं, जिनसे 14 नॉट्स (26 किमी/प्रति घंटा) की अधिकतम स्पीड मिल सकती है।

अपनी समुद्री यात्रा में टुरेनर सिर्फ पांच नॉट्स की औसत गति ही हासिल कर सकी क्योंकि उसके पांच सदस्सीय चालक दल ने भूमध्य रेखा के नजदीक से यात्रा करने का रूट बनाया था, ताकि सूर्य की अधिकतम रौशनी हासिल की जा सके।
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इसलिए वह 45 दिन के रिकॉर्ड के विपरीत समुद्र में 585 दिन तक रहे।

इस नाव में 8 टन की दो लीथियम आयन बैट्री हैं। सूरज न निकलने की स्थिति में इनसे नाव को तीन दिन तक चलाया जा सकता है।

हालांकि सबसे महत्वपूर्ण संख्या सबसे छोटी है। टुरेनर ईंधन का इस्तेमाल एकदम नहीं करता और कार्बन डाइऑक्साइड भी करीब-करीब बिल्कुल नहीं छोड़ता।

हालांकि इसके कप्तान गेरार्ड डि अबोविले कहते हैं, "टुरेनर को चलाना थोड़ा खास है।"

"आपको होने वाली चीजों का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। लगातार मौसम पर नजर रखनी होती है और सूरज के मुताबिक अपनी गति रखनी पड़ती है। आपको हमेशा पहले से ही चीजें सोचकर रखनी होती हैं।"
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"यह बहुत अलग है (नावों से), ज्यादा मजेदार है।"

उनकी ताजा समुद्री यात्रा भले ही सौर ऊर्जा नाव के लिए पहली थी, लेकिन रिकॉर्ड तोड़ना डी अबोविले के लिए नई बात नहीं है।

1980 में अकेले नाव खेकर अटलांटिक पार करने वाले वह पहले व्यक्ति बने थे। 1991 में उन्होंने यही कारनामा प्रशांत महासागर में कर दिखाया।

वह कहते हैं, "जैसे-जैसे मेरी उम्र बढ़ रही है मेरी निजी ऊर्जा कम होती जा रही है। इसलिए ऐसे में सूर्य जैसा एक साथी होना काफी अच्छा है।"

स्वच्छ ऊर्जा
टुरेनर की दुनिया की यात्रा खत्म होने के बाद अब इसके दूसरे अभियान शुरू हो गए हैं।

मैसर्स ब्रदर्स डि प्यूक्रेडन कहते हैं कि एक बार सौर ऊर्जा की क्षमता दिखा देने के बाद "नाव को अब कोई और लक्ष्य चाहिए था।"

इसलिए प्लेनट सोलर ने जेनेवा विश्वविद्यालय के साथ गल्फ स्ट्रीम पर शोध के एक अभियान के लिए एक समझौता किया है।

इसके तहत यह देखा जाएगा गल्फ स्ट्रीम के अंदर कैसे बदलाव हो रहे हैं और ये विश्व के तापमान को कैसे प्रभावित कर रहे हैं।

विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन दल प्रमुख प्रोफेसर मार्टिन बेनिस्टन कहते हैं कि इस नाव ने विज्ञान को आम जनता से संवाद कायम करने में भी सहायता की है।


"टुरेनर द्वारा पैदा की गई रुचि कमाल की रही है। हमें जनता और मीडिया की इतनी दिलचस्पी का पता नहीं था।"

इस दल ने अब प्लेनेट सोलर के साथ एक पांच-वर्षीय अनुबंध किया है और यह फिर से अटलांटिक से रियो तक जाने की योजना बना रहा है, ताकि वहां सहारा की धूल के सागर पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किया जा सके।

दुनिया के कार्बन डाउऑक्साइड उत्सर्जन का 2।7% शिपिंग क्षेत्र करता है। इसके मुकाबले हवाई यात्रा 2% ही उत्सर्जन करती है।

अंतरराष्ट्रीय जलयात्रा संगठन के अनुसार पानी के जहाजों से होने वाला प्रदूषण 2050 तक दुगना हो जाएगा।


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