पैगम्बर साहब के जीवनकाल में लिखी गई कुरान देखी आपने?
लंदन के यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम में दुनिया की सबसे पुराने कुरानों में से एक को प्रदर्शनी के रूप में लोगों के लिए रखा गया है। चमड़े के पन्नों पर लिखी गई यह किताब करीब 1370 साल पुरानी है। ऐसा माना जाता है कि यह किताब पैगम्बर मोहम्मद के जीवनकाल के आस पास लिखी गई थी।
इस ऐतिहासिक किताब को देखने के लिए अब तक करीब 2000 टिकटें बिक चुकी हैं और यूनिवर्सिटी को विश्वास है कि आने वाले दिनों में और ज्यादा टिकटें बिकेंगी। यह प्रदर्शनी 25 अक्टूबर तक चलेगा।
इस किताब के बारे में बर्मिंघम केंद्रीय मस्जिद के चेयरमैन मोहम्मद अफजल ने कहा, 'मैंने उन पन्नों को देखा मैं काफी हैरान था। मेरे आंखों में खुशी के आंसू थे जो मेरी भावनाओं को बयां कर रहे थे। मुझे यकीन है कि पूरे ब्रिटेन से लोग इस पन्नों की एक झलक देखने के लिए आएंगे।'
पहली बार दिया गया किताब का रूप
इस परीक्षण के मुताबिक यह कुरान 568 ई. से 645 ई. के बीच लिखी गई थी। ऐसा माना जाता है कि पैगम्बर मोहम्मद का जीवनकाल 570 ई. से 632 ई. के बीच रहा। यह पाण्डुलिपि युनिवर्सिटी के मिनगाना कलेक्शन का हिस्सा है जिसे कैडबरी रिसर्च लाइब्रेरी में रखा गया है। मिनगाना के तहत मध्य पूर्व के पाण्डुलिपियों का संकलन किया गया है।
कुरान की आयतों को सबसे पहले या तो याद करके रखा जाता था या फिर उन्हें चमड़े के पन्नों, पत्थरों या फिर पत्तों पर लिखकर रखा जाता था। खालिफ अबु बक्र मुस्लिम समुदाय के ऐसे पहले नेता थे जिन्होंने पन्नों पर लिखे गए इन आयतों को किताब का रूप देने के आदेश दिए।
पैगम्बर ने दिखाया इस्लाम का रास्ता
यूनिवर्सिटी में ही ईसाई और इस्लाम के प्रोफेसर डेविड थॉमस के मुताबिक मुस्लिमों को मानना है कि वर्तमान समय में वे जिस कुरान को पढ़ते हैं उसके मानक खालिफ उथमान के जमाने में ही निर्धारित कर दिए गए थे। तब से लेकर अब तक उन्हीं मानकों के मुताबिक कुरान छपते रहे हैं। यह उनका मूल रूप ही है।
गौरतलब है कि पैगम्बर मोहम्मद के दिखाए इस्लाम के रास्ते का ही मुस्लिम समुदाय के लोग अनुसरण करते हैं।