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पैगम्बर साहब के जीवनकाल में लिखी गई कुरान देखी आपने?

Sat, 03 Oct 2015 04:08 PM IST
Updated Sat, 03 Oct 2015 04:08 PM IST
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University of Birmingham in UK puts one of world's oldest Quran on display

लंदन के यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम में दुनिया की सबसे पुराने कुरानों में से एक को प्रदर्शनी के रूप में लोगों के लिए रखा गया है। चमड़े के पन्नों पर लिखी गई यह किताब करीब 1370 साल पुरानी है। ऐसा माना जाता है कि यह किताब पैगम्बर मोहम्मद के जीवनकाल के आस पास लिखी गई थी।

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इस ऐतिहासिक किताब को देखने के लिए अब तक करीब 2000 टिकटें बिक चुकी हैं और यूनिवर्सिटी को विश्वास है कि आने वाले दिनों में और ज्यादा टिकटें बिकेंगी। यह प्रदर्शनी 25 अक्टूबर तक चलेगा।
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इस किताब के बारे में बर्मिंघम केंद्रीय मस्जिद के चेयरमैन मोहम्मद अफजल ने कहा, 'मैंने उन पन्नों को देखा मैं काफी हैरान था। मेरे आंखों में खुशी के आंसू थे जो मेरी भावनाओं को बयां कर रहे थे। मुझे यकीन है कि पूरे ब्रिटेन से लोग इस पन्नों की एक झलक देखने के लिए आएंगे।'
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पहली बार दिया गया किताब का रूप

University of Birmingham in UK puts one of world's oldest Quran on display
यूनिवर्सिटी को यह किताब जुलाई में मिली थी, जिसके बाद उसने घोषणा की कि यह किताब करीब 1370 साल पुरानी है। यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम के कैडबरी रिसर्च लाइब्रेरी ने कुरान के चमड़े के पन्नों का रेडियोकॉर्बन परीक्षण किया।

इस परीक्षण के मुताबिक यह कुरान 568 ई. से 645 ई. के बीच लिखी गई थी। ऐसा माना जाता है कि पैगम्बर मोहम्मद का जीवनकाल 570 ई. से 632 ई. के बीच रहा। यह पाण्डुलिपि युनिवर्सिटी के मिनगाना कलेक्शन का हिस्सा है जिसे कैडबरी रिसर्च लाइब्रेरी में रखा गया है। मिनगाना के तहत मध्य पूर्व के पाण्डुलिपियों का संकलन किया गया है।

कुरान की आयतों को सबसे पहले या तो याद करके रखा जाता था या फिर उन्हें चमड़े के पन्नों, पत्थरों या फिर पत्तों पर लिखकर रखा जाता था। खालिफ अबु बक्र मुस्लिम समुदाय के ऐसे पहले नेता थे जिन्होंने पन्नों पर लिखे गए इन आयतों को किताब का रूप देने के आदेश दिए।

पैगम्बर ने दिखाया इस्लाम का रास्ता

University of Birmingham in UK puts one of world's oldest Quran on display

यूनिवर्सिटी में ही ईसाई और इस्लाम के प्रोफेसर डेविड थॉमस के मुताबिक मुस्लिमों को मानना है कि वर्तमान समय में वे जिस कुरान को पढ़ते हैं उसके मानक खालिफ उथमान के जमाने में ही निर्धारित कर दिए गए थे। तब से लेकर अब तक उन्हीं मानकों के मुताबिक कुरान छपते रहे हैं। यह उनका मूल रूप ही है।

गौरतलब है कि पैगम्बर मोहम्मद के दिखाए इस्लाम के रास्ते का ही मुस्लिम समुदाय के लोग अनुसरण करते हैं।

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