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भारतीयों समेत विदेशी कामगारों से 284 अरब रुपये की पेनल्टी वसूलता है हर साल ब्रिटेन
Fri, 28 Dec 2018 02:40 AM IST
गौरव द्विवेदी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Fri, 28 Dec 2018 02:40 AM IST
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टेरेसा मे, प्रधानमंत्री, ब्रिटेन
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भारतीय समेत अन्य अश्वेत व एशियाई अल्पसंख्यकों को ब्रिटेन में अपने श्वेत समकक्षों के मुकाबले अनुचित वेतन अंतर का सामना करना पड़ता है। बृहस्पतिवार को जारी की गई एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के कुल 19 लाख पारंपरिक अल्पसंख्यक कामगार महज अपनी विदेशी पहचान के कारण हर साल करीब 3.2 अरब पाउंड (करीब 284 करोड़ रुपये) ‘वेतन जुर्माने’ के चलते गंवा देते हैं।
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एक रिपोर्ट के मुताबिक, अनुचित वेतन अंतराल के शिकार हैं वहां अल्पसंख्यक
द रेजोल्यूशन फाउंडेशन की तरफ से पेश की गई रिपोर्ट 2007 से 2017 के बीच 1 लाख लोगों के बीच किए सर्वे पर आधारित है। इसमें अश्वेत, भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी पुरुष व महिलाओं को मिलने वाले वेतन पर लगे वार्षिक वेतन जुर्माने का अध्ययन किया गया है, जो औसतन करीब 284 करोड़ रुपये सालाना के बराबर बैठता है।
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ब्रिटेन स्थित इस थिंक टैंक ने अपनी रिपोर्ट में दिया है कि बिना डिग्रीधारी भारतीय व अश्वेत महिलाओं को मिलने वाला वेतन बिना डिग्री वाली श्वेत महिलाओं से अलग नहीं होता है, लेकिन वेतन जुर्माना इसमें अंतर पैदा कर देता है।
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12 फीसदी औसत कम वेतन पाते हैं भारतीय व अन्य श्वेतों के मुकाबले
1.91 पाउंड प्रति घंटा औसत वेतन होता है भारतीय, पाकिस्तानी व बांग्लादेशी पुरुषों का
1.31 पाउंड प्रति घंटा औसत वेतन हासिल करते हैं अश्वेत पुरुष