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ब्रिटेन ने आसान वीजा नियम सूची से भारतीय छात्रों को किया अलग, 25 देशों के लिए की ढील की घोषणा
एजेंसी, लंदन
Updated Sun, 17 Jun 2018 05:14 AM IST
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ब्रिटेन की सरकार ने देश के विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने के लिए वीजा आवेदन प्रक्रिया आसान बनाने के लिए तैयार की गई सूची से भारतीय छात्रों को अलग कर दिया है। सरकार को इस कदम से लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को आव्रजन योजना नीति में बदलाव को ब्रिटिश संसद में पेश किया गया। ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने 25 देशों के छात्रों के लिए टियर-4 वीजा श्रेणी में ढील की घोषणा की।
अमेरिका, कनाडा और न्यूजीलैंड सूची में पहले से ही शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने चीन, बहरीन और सर्बिया को भी सूची में शामिल कर लिया है। इन देशों के छात्र-छात्राओं को ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए शिक्षा, वित्त और अंग्रेजी भाषा जैसे मानकों पर कम जांच से गुजरना होगा। यह बदलाव 6 जुलाई से प्रभावी होंगे। अंतरराष्ट्रीय छात्र-छात्राओं के लिए ब्रिटेन में अध्ययन आसान बनाने को ये बदलाव किए गए हैं। भारत के सूची में नहीं होने का सीधा मतलब है कि समान कोर्स के लिए आवेदन करने वाले भारतीय विद्यार्थियों को कड़ी जांच और दस्तावेजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
नियम में बदलाव नहीं, लेकिन बनेगी गलत धारणा
यूके की नेशनल इंडियन स्टूडेंट्स एंड एलुमनाई यूनियन (एनआईएसएयू) की अध्यक्ष सनम अरोरा ने कहा कि भारतीय छात्रों के लिए आवेदन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन इस फैसले से गलत धारणा बनेगी। साथ ही यह सवाल खड़ा होता है कि क्या ब्रिटिश सरकार दूसरे मामलों में भी चीन के पक्ष में और भारत के खिलाफ ऐसे ही फैसले लेगी? यूनियन का कहना है कि भारतीय छात्रों के साथ न्याय नहीं किया गया है।
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बिलमोरिया ने कदम को भारत का अपमान बताया
यूके काउंसिल फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट अफेयर्स (यूकेसीआईएसए) के अध्यक्ष लॉर्ड करण बिलमोरिया ने सरकार के इस कदम को भारत का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि इससे भारत में गलत संदेश जाएगा। एक तरफ ब्रिटेन यूरोप से अलग होने के बाद भारत के साथ मुक्त व्यापार की बात कर रहा है और दूसरी तरफ भारतीय छात्रों के लिए ऐसे फैसले ले रहा है। हालांकि, ब्रिटेन के गृह सचिव साजिद जाविद ने सरकार की नई नीतियों की तारीफ की है।
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अमेरिका, कनाडा और न्यूजीलैंड सूची में पहले से ही शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने चीन, बहरीन और सर्बिया को भी सूची में शामिल कर लिया है। इन देशों के छात्र-छात्राओं को ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए शिक्षा, वित्त और अंग्रेजी भाषा जैसे मानकों पर कम जांच से गुजरना होगा। यह बदलाव 6 जुलाई से प्रभावी होंगे। अंतरराष्ट्रीय छात्र-छात्राओं के लिए ब्रिटेन में अध्ययन आसान बनाने को ये बदलाव किए गए हैं। भारत के सूची में नहीं होने का सीधा मतलब है कि समान कोर्स के लिए आवेदन करने वाले भारतीय विद्यार्थियों को कड़ी जांच और दस्तावेजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
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नियम में बदलाव नहीं, लेकिन बनेगी गलत धारणा
यूके की नेशनल इंडियन स्टूडेंट्स एंड एलुमनाई यूनियन (एनआईएसएयू) की अध्यक्ष सनम अरोरा ने कहा कि भारतीय छात्रों के लिए आवेदन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन इस फैसले से गलत धारणा बनेगी। साथ ही यह सवाल खड़ा होता है कि क्या ब्रिटिश सरकार दूसरे मामलों में भी चीन के पक्ष में और भारत के खिलाफ ऐसे ही फैसले लेगी? यूनियन का कहना है कि भारतीय छात्रों के साथ न्याय नहीं किया गया है।
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बिलमोरिया ने कदम को भारत का अपमान बताया
यूके काउंसिल फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट अफेयर्स (यूकेसीआईएसए) के अध्यक्ष लॉर्ड करण बिलमोरिया ने सरकार के इस कदम को भारत का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि इससे भारत में गलत संदेश जाएगा। एक तरफ ब्रिटेन यूरोप से अलग होने के बाद भारत के साथ मुक्त व्यापार की बात कर रहा है और दूसरी तरफ भारतीय छात्रों के लिए ऐसे फैसले ले रहा है। हालांकि, ब्रिटेन के गृह सचिव साजिद जाविद ने सरकार की नई नीतियों की तारीफ की है।