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आतंकवाद के चलते ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी में गिरा टूरिज्म का ग्राफ

Thu, 28 Jul 2016 01:45 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 28 Jul 2016 01:45 PM IST
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Terrorism hits tourism in europe
पहले वहां दुनिया भर से आए सैलानियों की चहचहाहट हुआ करती थी, बाजारों, होटलों, समंदर के किनारों पर रौनक हुआ करती थी, बच्चे भी बेखौफ देखे जाते थे, लेकिन अब वहां खौफ का सन्नाटा पसरा है, अब हरदम, हर वक्त वहां माहौल मातमी लगता है। यूरोप के ऐसे हालात हो जाएंगे, किसी ने सोचा नहीं था, अब वहां सैर के नाम से ही मन कसैला हो जाता है। यही वजह है कि लंदन, पेरिस, ब्रसेल्स, एम्सटरडम और इस्तांबुल में सैलानियों का अकाल पड़ा है और तेजी से टूरिज्म का ग्राफ गिर रहा है।
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डेलीमेल की खबर के मुताबिक आतंकी वारदातों और आईएस की धमकियों के चलते यूरोप के हालात नरक सरीखे हुए हैं। एक समय था जब दुनियाभर से लोग यूरोप का रुख इसलिए करते थे कि वहां उन्हें सुरक्षा और सुकून की गारंटी मिलती थी, लेकिन मौजूदा माहौल के मुताबिक दुनिया में सबसे असुरक्षित कोई जगह है तो वह यूरोप ही है।
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नीस ट्रक हमले के बाद से 57 फीसदी हवाई उड़ाने कम हो गई है। बेल्जियम और तुर्की में भी सैलानियों की तादात में भारी कमी आई है। आगे की स्लाइड में देखें पूरी रिपोर्ट।
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खाली पड़े हैं होटल, नहीं पहुंच रहे सैलानी

Terrorism hits tourism in europe
पहले गर्मियों के मौसम में यूरोप में सैलानियों का ऐसा अकाल कभी नहीं देखा गया। फ्रांस, जर्मनी और बेल्जियम में होटल, एयरलाइन, टूर ऑपरेटर और लक्जरी रिटेलरों ने आतंकी हमलों की वजह से कारोबार में हुए भारी नुकसान की बात कही है।

और अब यूरोप के बड़े शहरों जैसे कि लंदन, पेरिस, ब्रसेल्स, एम्सटरडम और इस्तांबुल में आतंकी हमलों की आशंकाओं के चलते होटल खाली पड़े हैं, सैलानी वहां पहुंच नहीं रहे हैं।

वॉल स्ट्रीट जरनल की खबर के मुताबिक इन गर्मियों में पेरिस में पहले से ही होटलों में कमरे खाली पड़े थे, रही बची कसर नीस हमले ने पूरी कर दी।

आतंकवाद से यूरोप में नरक जैसे हालात

Terrorism hits tourism in europe

लंदन में होटलों को बुक करने में 2.7 फीसदी गिरावट आई है तो एम्सटरडम में यह गिरावट 8.3 फीसदी की दर्ज की गई है। वहीं, ट्रैवलर डेटा एनालिसिस फॉरवर्डकीज अपनी रिपोर्ट में बताया है कि नीस के लिए हवाई उड़ानों में 57 फीसदी की भारी गिरावट आई है, जबकि दहशत के माहौल के चलते पूरे फ्रांस में यह गिरावट 20 फीसदी दर्ज की गई है।

फांस के लिए छुट्टियों की बुकिंग में 11 फीसदी की गिरावट आई है। बेल्जियम के लिए 23 फीसदी और तुर्की के लिए 31 फीसदी मामले ऐसे बताए जा रहे हैं, जिनमें लोग छुट्टियों की बुकिंग रद्द कर रहे हैं।

हालांकि यूरोप के कुछ देशों जैसे कि स्पेन और आयरलैंड की तरफ सैलानियों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं यूरोप में बने आतंक माहौल से सबसे ज्यादा फायदा जिन देशों को हुआ है, उनमें चीन और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इन देशों टूरिज्म के लिहाज से 7.8 ज्यादा बुकिंग हुई हैं।

संयुक्त राष्ट्र को अब आतंकवाद को परिभाषित करने में समय नहीं गंवाना चाहिए

Terrorism hits tourism in europe

दरअसल, 2016 में ही यूरोप में आतंकी वारदातों में 172 लोगों ने जान गंवा दीं, इसकी वजह से लोग और सैलानी खौफजदा हैं। इस साल जो सबसे बड़ी आतंकी हमला ब्रसेल्स एयरपोर्ट पर हुआ, जहां दो आत्मघाती आतंकियों ने होममेड बमों से धमाके कर बड़ा हमला किया। इसके ठीक घंटे भर बाद मालवीक मेट्रो स्टेशन के पास टीन डिब्बों वाली ट्रेन में हुआ। 

जून में इस्तांबुल के अतार्कतुक एयरपोर्ट पर एक के बाद एक तीन आत्मघाती हमले हुए। हमले में 41 लोगों की जान गईं।

और हाल ही में नीस में एक आतंकी ने ट्रक से 84 लोगों को रौंद डाला। लोग बेस्टाइल डे के दौरान आतिशबाजी देखने के लिए इकट्ठा हुए थे, लेकिन उनमें से ज्यादातर कभी वापस नहीं लौटे।

यूरोप की हालात वाकई चिंताजनक हैं, वक्त आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद को परिभाषित करने में समय न गंवाकर इससे पार पाने में ठोस कदम उठाए।

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