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प्रयोगशाला में मानव अंडाणु विकसित करने में मिली कामयाबी, कैंसर के इलाज में मिलेगा फायदा

Sat, 10 Feb 2018 11:18 AM IST
एजेंसी/लंदन
एजेंसी/लंदन Updated Sat, 10 Feb 2018 11:18 AM IST
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Success in developing human egg in laboratory
human egg

वैज्ञानिकों ने दुनिया में पहली बार प्रयोगशाला में मानव अंडाणु विकसित करने में कामयाबी हासिल की है। यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग ने यह खोज की है। शोधकर्ताओं की टीम के मुताबिक इस खोज से कैंसर का इलाज कराने वाली बच्चियों की गर्भधारण क्षमता बचाई जा सकेगी। बांझपन का इलाज भी संभव होगा।

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विशेषज्ञों के मुताबिक इस खोज से यह भी पता लगाने में मदद मिलेगी कि आखिर मानव अंडाणु विकसित कैसे होते हैं क्योंकि अभी यह विज्ञान के लिए एक रहस्य है। शोधकर्ताओं की मानें तो यह खोज एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन क्लीनिक में इसके इस्तेमाल के लिए कई प्रयोग करने होंगे। 
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तकनीक को अभी और बेहतर बनाना होगा। प्रयोग के दौरान सिर्फ दस फीसदी अंडे पूरी तरह विकसित होने में कामयाब हो सके। विकसित अंडों को भी प्रजनन के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसलिए यह ठीक से नहीं कहा जा सकता है कि यह कितने कारगर होंगे। जर्नल मॉलिक्यूलर ह्यूमन रिप्रोडक्शन में यह शोध प्रकाशित हुआ है। 
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यूं मिलेगी कैंसर के मरीजों को मदद
कीमोथेरेपी और रेडिएशन से मां बनने की क्षमता छिन जाती है। महिलाएं अपने अंडे या भ्रूण को फ्रीज करा सकती हैं। कम उम्र की बच्चियों के लिए यह संभव नहीं होता है। नई खोज के बाद कैंसर रोगी बच्चियों के अंडों की भी रक्षा की जा सकेगी। प्रयोगशाला में अंडों को विकसित करने के लिए नियंत्रित स्थितियों, जैसे आक्सीजन स्तर, हार्मोन, प्रोटीन की जरूरत होती है।

20 साल लगते हैं अंडे बनने में
महिलाएं अविकसित अंडों के साथ जन्म लेती हैं। यह अंडाणु उनके गर्भाशय में मौजूद होते हैं, लेकिन युवा (प्यूबर्टी) होने पर ही विकसित होते हैं। कुछ अंडे किशोरावस्था में विकसित हो जाते हैं और कुछ को इसमें दो दशक से ज्यादा लगते हैं। 


अंडे को पूरी तरह विकसित होने के लिए अपनी आधी जैविक सामग्री खोनी होती है। वरना इसमें शुक्राणु से फर्टिलाइज होते वक्त ज्यादा डीएनए रह जाएगा। यह असामान्य फर्टिलिटी का कारण बनता है। 

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