{"_id":"2a924ba6-685a-11e2-93f9-d4ae52bc57c2","slug":"russia-s-army-is-searching-for-internal-tattoos","type":"story","status":"publish","title_hn":"रूस की सेना 'अतरंग टैटू' की खोज में ","category":{"title":"Europe","title_hn":"यूरोप","slug":"europe"}}
रूस की सेना 'अतरंग टैटू' की खोज में
Updated Sun, 27 Jan 2013 01:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रूस के एक अखबार का दावा है कि रूसी सेना को आदेश दिया गया है कि वो अपने सैनिकों की जांच करे कि उनके शरीर के अंतरंग हिस्सों पर टैटू तो नहीं। सेना ने इस बात से इनकार किया है कि आदेश के ज़रिए समलैंगिक लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
विज्ञापन
रूसी अखबार इज़वेस्तिया के अनुसार आदेश जारी करने वालों का मानना है कि शरीर पर बने टैटू आदमी के चरित्र की तरफ़ इशारा करते हैं।
अखबार लिखता है "चेहरे, नितंबों और जननांगों पर बने टैटू पर विशेष नज़र रखने को कहा गया है।" रक्षा सूत्रों का कहना है कि ऐसा स्वास्थ्य और रूप रंग के नज़रिए से किया गया है, ना की सैनिकों में समलैंगिक झुकाव को जानने के लिए।
विज्ञापन
रूसी सेना का अपने सैनिकों के साथ एक विवादित इतिहास है। इस सेना में सैनिकों को धमकाने, नस्लीय तनाव, कुपोषण और अभ्यास के दौरान मौतों का लंबा लेखा जोखा है।
विज्ञापन
बहुत सारे रूसी नौजवान कानूनी या अन्य तरीकों से अनिवार्य सैन्य सेवा से बचने की कोशिश करते हैं।
साल 2010 में एक अमेरिकी चैनल को दिए इंटरव्यू में देश के वर्तमान राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने कहा था कि खुले तौर पर समलैगिक लोगों के रूसी सेना में काम करने पर कोइ बाधा नहीं है।
'समर्पण के लक्षण'
अखबार का दावा है कि नए दिशा निर्देशों में एक सैनिक के जीवन के हर पहलू पर बात की गई है और कहा गया है कि "टैटू निम्न स्तरीय संस्कारों और शिक्षण स्तर को इंगित करते हैं"। इन दिशा निर्देशों में यह भी कहा गया है कि शरीर पर बने टैटू "सेक्स में संभावित भटकाव" की तरफ भी इशारा करते हैं।
इस ख़बर में कहा गया है कि जो युवा अपने आप पर टैटू बनाने की अनुमति देते हैं उनके द्वारा "दूसरों की इच्छाओं के प्रति समर्पण करने का ख़तरा होता है।"
अखबार ने दो अनाम सूत्रों से बात की है और दावा किया है कि इनमें से एक सैन्य मनोवैज्ञानिक है और दूसरे उप बटालियन कमांडर है। दोनों का ही कहना है कि समलैंगिक सैनिक ध्यान का भटकाव हैं जिन्हें सेना में नहीं होना चाहिए।
हालांकि इसी ख़बर में अखबार ने सेना के एक बड़े अधिकारी के हवाले से लिखा है " कमांडर और उप कमांडर को सैनिकों के स्वास्थ्य और रूप रंग का ध्यान रखना चाहिए ना की उनके सेक्स से जुड़े अनुभवों और उसके झुकावों का।"
इस अधिकारी का कहना है कि सैनिकों की त्वचा का ध्यान रखने के लिए स्वास्थ्य आयोग है।
इन नए दिशा निर्देशों की ख़बर ऐसे समय आई है जब देश की संसद ऐसे विवादित कानून पर विचार कर रही है जिससे बच्चों के बीच समलैंगिकता के बारे में कोई बात ना की जा सके।
समलैंगिक अधिकारों के लिए काम करने वालों का कहना है कि इस कानून की आड़ में समलैंगिक अधिकारों का हनन करने की कोशिश की जा रही है।