फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Europe ›   people who get pay more are in trouble?

मुश्किल में मोटी तनख्वाह पाने वाले?

Mon, 04 Mar 2013 08:55 AM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Mon, 04 Mar 2013 08:55 AM IST
विज्ञापन
people who get pay more are in trouble?

स्विट्जरलैंड में मोटी तनख्वाह पाने वालों के लिए बुरी खबर है। रविवार को यहां हुए एक जनमत संग्रह में ऐसे लोगों की तनख्वाहों पर पाबंदियां लगाए जाने के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है।

विज्ञापन


इन प्रस्तावों के तहत शेयर धारकों को अधिकार दिया गया है कि वो कंपनी के नए मैनेजरों की मोटी तनख्वाहों और कंपनी छोड़ कर जाने वाले मैनेजरों को दिए जाने वाले मुआवजे पर वीटो कर पाएंगे।
विज्ञापन


औद्योगिक समूहों का कहना है कि इन प्रस्तावों से स्विस प्रतिस्पर्धा की भावना को नुकसान होगा, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि आम स्विस लोग देश में अमीरों और गरीबों के बीच बढ़ती खाई से परेशान हैं। स्विट्जरलैंड में ये जनमत संग्रह ऐसे समय में हुआ जब जल्द ही यूरोपीय संघ बैंकरों को मिलने वाले बोनस की सीमा निर्धारित करने के उपायों को मंजूरी देने वाला है।
विज्ञापन
विज्ञापन


फंसी 'मोटी बिल्लियां'
बर्न्स में बीबीसी संवाददाता इमोजेन फ़ूक्स का कहना है कि स्विट्जरलैंड के नामी बैंक यूबीएस को हुए अरबों डॉलर के नुकसान और दवा कंपनी नोवार्तिस में हजारों लोगों की छंटनी के बावजूद मैनेजरों की ऊंची तनख्वाहें और बोनस जारी हैं। इससे स्विट्जरलैंड में लोग खासे नाराज हैं।

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि नए प्रस्तावों के बाद स्विट्जरलैंड दुनिया में सबसे कड़े कॉरपोरेट नियमों वाला देश बना जाएगा। अब शेयर धारकों को मैनेजरों की तनख्वाहों और कंपनी छोड़ कर जाने वाले मैनेजरों को दी जाने वाले मुआवजे पर वीटो करने का अधिकार होगा। यही नहीं, कंपनी के नियमों का उल्लंघन करने वालों को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

इन प्रस्तावों को ‘फैट कैट इनिशिएटिव’ का नाम दिया रहा है और इन्हें स्विस संविधान का हिस्सा बनाया जाएगा। ये नियम स्विट्जरलैंड शेयर बाजार में सूचीबद्ध सभी कंपनियों पर लागू होंगे। कई कंपनियो में हुई गड़बड़ियों से इन प्रस्तावों को जनता के बीच खासा समर्थन मिला है. इन प्रस्तावों का सबसे पहले सुझाव कारोबारी से राजनेता बने थॉमस मिंडर ने दिया था।


इस जनमत संग्रह के आयोजकों में से एक ब्रिगिट्टे मॉजर हार्डर ने बीबीसी को बताया कि स्विस जनता ने इन प्रस्तावों को इसलिए अपनी सहमति दी है क्योंकि अमीर और गरीब के बीच फासला लगातार बढ़ता जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed