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भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं पाक सेना प्रमुख बाजवा

Sun, 06 May 2018 07:34 PM IST
एजेंसी, लंदन
एजेंसी, लंदन Updated Sun, 06 May 2018 07:34 PM IST
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Pakistan army chief wants good relations with India
bajwa
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं। उनका मानना है कि नई दिल्ली के साथ सैन्य सहयोग के जरिये ही शांति और समृद्धि हासिल की जा सकती है। ब्रिटेन के रॉयल यूनाइट्स सर्विस इंस्टीट्यूट में पाकिस्तानी विशेषज्ञ कमाल अलाम ने कहा कि पाकिस्तान की राजनीति में सेना का प्रभावी दखल है। सेना ने पाकिस्तान पर कई बार सीधी हुकूमत की है। ऐसे में अगर बाजवा भारत की ओर हाथ बढ़ाने का मन बना रहे हैं तो यह अच्छा कदम है।
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अलाम ने एक रिपोर्ट में लिखा कि बाजवा ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए इस्लामाबाद में हुई पाकिस्तान दिवस मिलिट्री परेड में भारतीय सेना के अटैची संजय विश्वराव को आमंत्रित किया। इसके दो हफ्ते बाद ही बाजवा ने कहा कि पाकिस्तानी सेना भारत के साथ शांति और बातचीत चाहती है।
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सीमा पर रवैये के उलट है संयुक्त सैन्य अभ्यास का फैसला

पहली बार भारत और पाकिस्तान सितंबर में चीन के सहयोग से रूस में होने वाले सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेंगे। अलाम लिखते हैं कि भारत-पाकिस्तान का यह कदम दोनों ओर से नियंत्रण रेखा पर रोज होने वाली सैन्य कार्रवाई के एकदम उलट है। नवंबर, 2016 में बाजवा के सेना प्रमुख बनने के बाद दोनों देशों के रवैया में खासा बदलाव आया है। पिछले साल ब्रिटेन की यात्रा के दौरान बाजवा ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि पाकिस्तान चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा परियोजना में सहयोग के लिए भारत का स्वागत करता है। 
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रिपोर्ट में भारत के पूर्व प्रधानमंत्रियों का जिक्र किया

रिपोर्ट में 80 के दशक में दोनों देशों के संबंध बेहतर बनाने के लिए की गईं तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पाकिस्तान के जनरल जिया-उल-हक की कोशिशों का जिक्र किया गया है। वहीं, पाक सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बीच 2002 में हुए आगरा सम्मेलन का हवाला भी दिया गया है। अलाम ने लिखा है कि दोनों के बीच कश्मीर सहित सीमा विवाद से निपटने के लिए लंबी चर्चा हुई।


अफगानिस्तान के मसले पर भी बात कर सकता है भारत

अफगानिस्तान के ज्यादातर मसलों पर भारत पाकिस्तान के खिलाफ है। रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि अगर पाकिस्तानी अधिकारी लगातार भारत से संपर्क में रहें तो दिल्ली अफगान-भारत कारोबार पर भी बातचीत के लिए सहमत हो सकता है।
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