फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Europe ›   Outlook: "The US and Pakistan relations no quick sudhrenge '

'अभी तुरत-फुरत नहीं सुधरने वाले हैं अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्ते'

Fri, 02 Dec 2016 02:52 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला दिल्ली Updated Fri, 02 Dec 2016 02:52 PM IST
विज्ञापन
Outlook: "The US and Pakistan relations no quick sudhrenge '
अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत खासी चर्चा में है।पाकिस्तान प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो ने एक प्रेस बयान में कहा है कि ट्रंप ने नवाज शरीफ की तारीफ की है, कहा है कि पाकिस्तान एक शानदार देश है और पाकिस्तान के लोग सबसे समझदार लोग हैं।मेरा मानना है कि मुल्कों के बीच जो समस्याएं होती हैं, उन्हें निजी रिश्तों के आधार पर नहीं सुलझाया जा सकता है।
विज्ञापन


इसका सबसे बड़ा उदाहरण है भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को सुधारने की हाल की कोशिश। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को न्योता दिया था। ऐसा लगा कि दोनों के बीच एक दोस्ताना रिश्ता बन रहा है।पर जल्द ही दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी आ गई। फिर संबंध बिगड़ते चले गए। अमरीका के राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए डोनल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से बात की,
विज्ञापन

 

Outlook: "The US and Pakistan relations no quick sudhrenge '
यह परंपरा है कि जब दो देशों के बड़े नेता एक-दूसरे से बात करते हैं तो बड़े ही प्यार से बात करते हैं। एक-दूसरे की तारीफ करते हैं। पर इसका मतलब यह नहीं कि नई दोस्ती शुरू होने वाली है। यह जरूरी नहीं कि दोनों देशों के रिश्ते भी बेहतर हो जाएं। अमरीका और पाकिस्तान के बीच रिश्ते वैसे भी पुराने और गहरे रहे हैं।पाकिस्तान और अमरीका के बीच सैन्य संबंध हैं। शरीफ के जहन में यह बात रही ही होगी। वे ट्रंप से यह उम्मीद कर रहे होंगे कि वहां का प्रशासन पाकिस्तान की चुनी गई नागरिक सरकार को ज्यादा अहमियत दें।

अमरीका के चुनाव का मतलब है कि वहां के लोगों ने बदलाव के लिए वोट किया है, बेहतरी की ओर जाएं। यह जरूरी है कि ट्रंप जहां जाएं, वहां उनके खिलाफ नारे न लगाए जाएं, उनका स्वागत हो।यह तो साफ है कि दोनों देशों के बीच कुछ चीजें बदलेंगी। जहां तक बड़े मुद्दों या फैसलों की बात है, वे बहुत जल्दी नहीं बदलेंगी। इसकी वजह यह है कि देशों के अपने हित होते हैं, वे सरकार बदलने से ही नहीं बदल जाते। उन पर तुरत-फुरत कोई फैसला नहीं हो सकता। ये चीजें एक महीने में नहीं बदल जाएंगी।पाकिस्तान और अमरीका के बीच जो दूरियां बन गई हैं, वे फिलहाल वैसी ही रहेंगी। उन्हें एक-दूसरे से जो शिकायतें हैं, वे भी बनी रहेंगी।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed