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यहां महिलाओं के लिए बनेगी खास मस्जिद

Wed, 03 Jun 2015 02:34 PM IST
Updated Wed, 03 Jun 2015 02:34 PM IST
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Only mosque for female in Bradford.

ब्रिटेन के शहर ब्रैडफोर्ड की मस्जिद में अजान की आवाज सुनाई दे रही है। ब्रिटेन की तमाम दूसरी मस्जिदों की तरह यहां भी नमाज पढ़ने के लिए आने वाले मर्द ही हैं।

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महिलाओं के लिए नमाज पढ़ने की सुविधा न होने के कारण यहां के संगठन ने महिलाओं के लिए विशेष मस्जिद बनाने की घोषणा की है। बाना गोरा मुस्लिम वूमैन काउंसिल की प्रमुख हैं।
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बाना गोरा कहती हैं, "ब्रैडफोर्ड में पिछले एक साल से हम मस्जिदों के प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा कर रहे हैं। हमने पाया कि मस्जिदें काफी हद तक पुरुष प्रधान मॉडल का पालन करती हैं। मस्जिदों तक महिलाओं की पहुंच मुश्किल है। इनकी कमेटियों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कमोबेश नहीं के बराबर है।"
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अमेरिका से मिली प्रेरणा

Only mosque for female in Bradford.

यहां की महिला काउंसिल को ये प्रेरणा अमेरिका में महिलाओं के लिए विशेष मस्जिद शुरू होने के बाद मिली। इसमें महिलाएं इमाम के रूप में नमाज का नेतृत्व करती हैं। लेकिन परंपरागत मुस्लिम इससे सहमत नहीं हैं।

शेफील्ड स्थित गुलजार-ए-हबीब मस्जिद के कारी सज्जाद अली शामी कहते हैं कि इससे मुस्लिम समाज एक होने के बजाय विभाजित होगा।

इमाम कारी सज्जाद कहते हैं, "जेंडर के आधार पर मस्जिदें बनाने से मुस्लिम समुदाय में और विभाजन होगा। महिलाओं को मस्जिद जाने का अधिकार है लेकिन उन्हें सलात(नमाज) के लिए जेंडर के आधार पर विशेष मस्जिद और इमाम बनाने का अधिकार नहीं है। इस मुद्दे पर बात करने की जरूरत है।"

600 मस्जिदों और इस्लामिक संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले मॉस्क एंड इमाम्स नैशनल एडवाइजरी बोर्ड(एमआईएनएबी) भी कमोबेश यही राय रखता है।

इतिहास के खिलाफ

Only mosque for female in Bradford.

अल्लामा बेग कादरी एमआईएनएबी के वरिष्ठ मौलवी हैं।

अल्लामा बेग कादरी कहते हैं, "इस्लाम के 1400 सालों से अधिक लंबे इतिहास में हमें महिलाओं के लिए अलग मस्जिद या नमाज का नेतृत्व करने की बात नहीं मिलती। ऐसा कदम उठाना मुस्लिम रवायत के अनुकूल नहीं है। इससे मुस्लिम समुदाय में विवाद हो सकता है क्योंकि ये इतिहास के खिलाफ है।"

हालांकि कुछ मुस्लिम महिलाएं महिलाओं के लिए विशेष मस्जिद बनाने की पहल का समर्थन कर रही हैं। सबीना यास्मीन ऐसी महिलाओं में से एक हैं।

सबीना यास्मीन कहती हैं, "ये अच्छा है कि ऐसी मस्जिद हो जहाँ महिलाएं जाकर नमाज पढ़ सकती हैं और उसे महिलाएं चलाती हैं। हम सब जानते हैं कि महिलाएं ऐसा करने की काबिलियत रखती हैं।"

सबीना यास्मीन आम तौर पर घर पर ही नमाज पढ़ती हैं। वो ये भी मानती हैं कि मौजूदा मस्जिदों में महिलाओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।

मर्दों की जगह

Only mosque for female in Bradford.

सबीना कहती हैं, "असल में होना ये चाहिए कि महिलाओं को इन मस्जिदों में रोजगार देना चाहिए। उन्हें मर्दों के साथ बैठने की जरूरत नहीं...जो इसे लेकर संवेदनशील हैं वो टेलीफोन या इंटरनेट की मदद से सलाह ले सकती हैं।"

हालांकि बहुत से मुसलमान ये भी मानते हैं कि मस्जिद मर्दों की जगह है। महिलाओं के लिए विशेष मस्जिद बनाने की योजना अभी अपने शुरुआती चरण में है।

मुस्लिम वूमेन काउंसिल अभी इसके लिए संभावित स्थान और आर्थिक मदद की संभावनाएं तलाश रही हैं। लेकिन हमने जैसी बातें सुनीं उससे साफ है कि उन्हें इस राह में काफी विरोध का सामना करना पड़ेगा।

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