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लंंदन: विजय माल्या का नहीं था लोन चुकाने का इरादा
एजेंसी, लंदन
Updated Fri, 08 Dec 2017 12:55 AM IST
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- फोटो : PTI
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भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के वकील ने प्रत्यर्पण की सुनवाई में बैंकिंग विशेषज्ञ को बतौर गवाह कोर्ट में पेश किया। बचाव पक्ष का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि यह साबित किया जा सके कि माल्या ने अपनी डूबती एयरलाइंस किंगफिशर को बचाने के लिए भारतीय बैंकों से कर्ज लिया था। ‘धोखाधड़ी’ करने की उनका इरादा नहीं था। वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि उन्हें पता था कि किंगफिशर एयरलाइंस डूब रही है, इसलिए लोन चुकाने की उनकी मंशा ही नहीं थी।
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लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में विजय माल्या के खिलाफ तीसरे दिन भी सुनवाई जारी रही। बैंकिंग विशेषज्ञ पॉल रेक्स को गवाही के लिए इसलिए पेश किया गया, ताकि यह निर्धारित हो सके कि 61 वर्षीय माल्या को मनीलॉन्ड्रिंग मामले में भारतीय बैंकों के 9000 करोड़ नहीं चुकाने पर मुकदमा चलाने के लिए भारत लाया जा सके।
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माल्या की वकील क्लेयर मोंटगोमरी ने अपनी शुरुआती दलीलों का समर्थन करते हुए कहा कि भारत सरकार की ओर से अभियोजन पक्ष क्राउन प्रोसेक्यूशन सर्विस (सीपीएस) उसके मुवक्किल के खिलाफ प्रथमदृष्टया धोखाधड़ी का केस साबित करने में विफल रहा। स्वतंत्र बैंकिंग एक्सपर्ट के तौर पर 20 सालों से काम कर रहे पॉल रेक्स ने अपनी गवाही में कहा कि माल्या का ‘धोखाधड़ी करने’ का कोई इरादा नहीं था।
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वहीं अभियोजन पक्ष सीपीएस का कहना है कि माल्या को मालूम था कि किंगफिशर एयरलाइंस का डूबना तय है, इसलिए लोन चुकाने का उनका इरादा ही नहीं था। मोंटगोमरी यह साबित करने की कोशिश कर रही हैं कि किंगफिशर एयरलाइंस वर्ष 2009-10 में वैश्विक आर्थिक संकट के कारण मुश्किल हालात से गुजर रही थी, इसलिए लोन नहीं चुका पाने के कई कारण थे, जो कंपनी के नियंत्रण से बाहर थे। गौरतलब है कि माल्या मार्च, 2016 से लंदन में हैं। उन्हें प्रत्यर्पण वारंट के आधार पर अप्रैल में स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने गिरफ्तार किया था और अभी वह 650000 पाउंड के मुचलके पर जमानत पर हैं।