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ब्रिटिश जेहादियों की पत्नियों की जिंदगी बन गई है नर्क

Tue, 23 May 2017 02:51 PM IST
amarujala.com- Written by: शरद मिश्रा
amarujala.com- Written by: शरद मिश्रा Updated Tue, 23 May 2017 02:51 PM IST
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life of British jihadis's wives have become hell
सांकेतिक चित्र
जिहाद के नाम पर इराक और सीरिया गईं ब्रिटिश जेहादियों की पत्नियों की जिंदगी नर्क बनकर रह गई है। वो या तो विधवा होकर वापस ब्रिटेन लौट रही हैं या इस्लामिक स्‍टेट ग्रुप की क्रूरता का शिकार हो रही हैं। अभी तक 10  ब्रिटिश महिलाएं और उनके बच्चे इस्लामिक स्टेट यानी कैलीफेट को छोड़ चुके हैं। 
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आतंक निरोधी सोर्स से जुड़े लोग, संस्‍थान तथा जिहादी की पूर्व पत्नियों ने यह जानकारी दी है। इराक और लेवांट में इस्लामिक स्टेट ने कुछ पाबंदियां लगा रखी हैं। नतीजन कुछ और विदेशी महिलाएं यहां से भागने को तैयार हैं। पुलिस और होम मिनिस्ट्री के अधिकारियों की मानें तो और अधिक महिलाएं निकट भविष्य में भाग सकती हैं। 
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हाल ही में 50 से अधिक ब्रिटिश महिलाएं इराक और सीरिया गईं थीं। इनमें से कुछ अपने पतियों और बच्चों के सा‌थ तो कुछ अकेले गईं। अकेले गईं महिलाओं को इस्लामिक स्टेट के सोशल मीडिया से जुड़े लोगों ने भी लुभावनी पेशकश कर इराक और सीरिया में आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जिहादियों की पत्नियों का जीवन रोमांस और साहस से भरा रहता है।
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इस्लामिक स्‍टेट के लड़ाकू सैनिक इराक, कुरदिश और सीरिया के प्रतिद्वंदी गुटों के हमले के बाद अपनी जमीन गंवा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय हवाई हमले से भी यह संभव हो पाया है। इसके बाद इस्लामिक स्टेट के कमजोर पड़ने से वहां जीवन अब आसान नहीं रहा। 

इस्लामिक स्टेट से अलग होकर प्रतिद्वंदी गुट वाले इलाके उत्तरी सीरिया में रह रही जर्मनी की एक महिला ने बताया कि साल की शुरुआत से अब तक करीब 30 से 35 महिलाएं आतंकवाद छोड़ चुकी हैं। काफी सारी महिलाएं इस्लामिक स्टेट के इलाके से भागकर टर्की आदि में प्रवेश करने की कोशिश की। इसमें ब्रिटेन की 5 से 10 महिलाएं शामिल हैं। 

'IS के आतंकी महिलाओं और बच्चों को अलग मकान में रखते हैं'

life of British jihadis's wives have become hell
सांकेतिक चित्र

इन्होंने आगे बताया कि इस्लामिक स्टेट के आतंकी महिलाओं और बच्चों को एक अलग मकान में रखते हैं। जब उनका पति मर जाता है या अन्य आपातकालीन स्थिति पैदा होती है तब महिलाओं को इस्लामिक स्टेट के सैनिक अपने साथ रखते हैं। उनके साथ बुरा व्यवहार होता है। उन्हें एक तरह से गुलाम बना दिया जाता है। इस्लाम के शरिया कानून के मुताबिक महिला को पति की मौत के बाद कम से कम चार माह का शोक मनाना पड़ता है। लेकिन यहां तो महिलाओं के विधवा होने के बाद उनका दोबारा जल्द ही विवाह करा दिया जाता है।

महिला ने आगे बताया कि कैलीफेट के धराशायी होने के बाद इस्लामिक स्टेट के सैनिक और क्रूर हो गए हैं। वह औरतों के साथ वहशी व्यवहार करते हैं। करीब 35 फीसदी महिलाएं विधवा होने के बाद इस तरह की मुश्किल में फंस‌ी हैं। वहीं कुछ को उनके पति ने इस्लामिक स्टेट के कहे अनुसार बेहतर माहौल समझ कर अपने से दूर भेज दिया था लेकिन उन्हें बेहतर माहौल नहीं मिल पाया। सीरिया से सटे टर्की की बॉर्डर के पास कुछ महिलाओं को चेकपोस्ट पर भी मुश्किलात का सामना करना पड़ा। टर्की में आने के बाद महिलाओं ने अपने देश के दूतावास से भी संपर्क किया।

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन की करीब 850 महिलाओं और पुरुषों ने जिहाद के नाम पर इराक और सीरिया का रुख किया था जिनमें करीब 130 के मारे जाने का अनुमान है। वहीं करीब 350 वापस ब्रिटेन लौट आए हैं। जो लौटें हैं उनसे पुलिस पूछताछ कर रही है। पुलिस इन लोगों को  खुफिया एजेंसियों की पड़ताल या अन्य आरोपों के बाद ही गिरफ्तार कर रही है। जांच अधिकारी का कहना है कि इन महिलाओं को कानून के प्रावधानों का सामना करना पड़ेगा यह गंभीर मसला नहीं है बल्कि इनसे अब कौन शादी करेगा यह सबसे अहम है।

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