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ब्रिटेन में भारतीय छात्रों का स्वागत है...

Fri, 15 Feb 2013 08:54 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Fri, 15 Feb 2013 08:54 PM IST
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indian students are welcome in britain

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने पढ़ाई के लिए ब्रिटेन आने वाले भारतीय छात्रों का स्वागत किया है और कहा है कि अध्ययन पूरा करने के बाद वे काम के लिए ब्रिटेन में रुक भी सकेंगे।

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उन्होंने कहा, "भारते के प्रतिभाशाली नौजवान अगर ब्रिटेन को एक विकल्प के तौर पर चुनते हैं तो हमारा देश उनका स्वागत करेगा। ब्रिटेन में 40 हज़ार भारतीय छात्र रह रहे हैं और मुझे उनपर गर्व हैं।"
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समाचार एजेंसी पीटीआई ने कैमरन के हवाले से कहा, "इसके लिए आपको अंग्रेजी की बुनियादी जानकारी और किसी ब्रितानी यूनीवर्सिटी में दाखिला मिलना चाहिए। इससे ज्यादा और क्या। यूनिवर्सिटी छोड़ते समय अगर आपके पास ग्रैजुएशन स्तर की कोई नौकरी होती है तो आप यहां रह कर काम कर सकते हैं। इस पर कोई रोक नहीं है।"
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कैमरन का बयान ऐसे समय में आया है जब ब्रिटेन में पढ़ रहे भारतीय छात्रों में वीज़ा नियमों को लेकर खासा रोष है और वो मांग कर रहे हैं उनके लिए वीज़ा नियमों में ढील दी जाए।

ब्रिटेन का क्रेज़
मुंबई के एक मंहगे इलाके में बने एक पांच सितारा होटल की गेट पर भीड़ का यह आलम था कि वहां तिल रखने भर की भी जगह बची नहीं रह गई थी।

समंदर किनारे स्थित इस होटल में बॉलीवुड के सितारों की आए दिन जमघट हुआ करती है। लेकिन यहां आए नौजवान अपने पसंदीदा स्टार या किसी सुपरमॉडल की झलक पाने नहीं आए हुए हैं।

ये नौजवान यहां कुछ सीखने आए हैं और इस होटल में एक अंतरर्राष्ट्रीय स्तर का शिक्षा मेला लगा हुआ है।

विदेशी विश्वविद्यालयों और देश से बाहर जाने की ख्वाहिश रखने वाले भारतीय छात्रों की शिक्षा जरूरतों को पूरी करने वाली कंपनी एडवाइज़ नियमित रूप से ऐसे शिक्षा मेलों का आयोजन करती है।

ब्रिटेन में पढ़ाई
इस शिक्षा मेले में भी दरहम, कार्डिफ, नॉटिंघम, लैंकस्टर, और यॉर्क जैसे ब्रिटेन के विश्वविद्यालय भागीदारी कर रहे हैं।

ब्रिटेन में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की संख्या पिछले साल पहली बार गिरी है। कई लोग ऐसा मानते हैं कि यह वीज़ा नियमों में बदलाव की वजह से हुआ है।

ऐसे वक्त में जबकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन की भारत यात्रा प्रस्तावित है सवाल यह उठता है कि ब्रिटेन को लेकर भारत की मान्यताओं पर यह मुद्दा किस तरह से असर डालेगा।

ब्रिटेन पढ़ाई के लिए भारत से आने वालों बच्चों का अमेरिका के बाद सबसे पसंदीदा ठिकाना रहा है। लेकिन ब्रिटेन में मिलने वाली डिग्री की चमक हाल के वक्त में थोड़ी धुंधली हुई है।

वीज़ा नियम
21 साल की प्राची भट्ट ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के विश्वविद्यालयों के ढेरो प्रॉस्पेक्टस के साथ उलझी हुई है। वह कहती हैं,“मुझे ब्रिटेन के शिक्षा के स्तर के बारे में पता है और अगर वीज़ा नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया तो मैं उसे वरीयता दूंगी।”

प्राची ने कहा, “मैं पढ़ना चाहती हूं, काम करना चाहती हूं और शायद विदेश में सेटल भी होना चाहती हूं, इसलिए मैं दूसरे देश जाना चाहती हूं।”

प्राची जिस मुद्दे का जिक्र कर रही हैं वह गैर-यूरोपीय संघ के देशों के लोगों के लिए वीज़ा नियमों में किया जाने वाला बदलाव है।

इसके तहत पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद ब्रिटेन में रूकने पर रोक लगाई गई है। साल 2012 में पढ़ाई के बाद दिया जाने वाला वीज़ा देना पबंद कर दिया गया था।

यह नियम पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी तलाशने के लिए प्राची जैसे छात्रों को ब्रिटेन में दो साल और रुकने का मौका देता था।

क्या कहते हैं आंकड़े?
नए नियमों के तहत अब ब्रिटेन में रुकने की चाह रखने वाले गैर यूरोपीय संघ के देशों के बच्चों को वहां कम से कम 16 लाख रुपये सालाना की नौकरी खोजनी पड़ेगी।

तभी वे वहां रुक सकेंगे। उद्यमियों के लिए भी अलग से वीज़ा देने का प्रावधान किया गया है लेकिन इनकी संख्या हर साल एक हज़ार ही रहेगी।

भारतीय प्रबंधन संस्थान की बंगलौर शाखा ने साल 2012 में एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें कहा गया था कि वर्ष 2000 और वर्ष 2009 के बीच विदेश जाने वाले बच्चों की संख्या 53,266 से 256 फीसदी बढ़कर 1,89,629 हो गई थी।

शिक्षा मेला
शिक्षा मेले में दूसरे बच्चों की तरह ही 24 वर्षीय जोनाथन फर्नॉंडीज कंप्यूटर गेमिंग की पढ़ाई के लिए विदेश जाने की योजना बना रहे हैं।

वह कहते हैं,''पढ़ाई पूरी करने के बाद तुरंत वापस लौट आने से कोई फायदा नहीं है। बेहतर यह है कि पढ़ाई पूरी करके काम का अंतरराष्ट्रीय अनुभव लिया जाए और अपनी क्षमता बढ़ाई जाए।''


एडवाइज के निदेशक अजय सुखवानी का मानना है कि ब्रिटेन अभी भी एक लोकप्रिय ठिकाना है लेकिन वीज़ा नियमों में बदलाव से इस पर असर पड़ा है।

डेविड कैमरन अगले हफ्ते जब भारत आएंगे तो उनके साथ ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों का एक प्रतिनिधिमंडल भी साथ रहेगा।

मेले से डेविड कैमरन को यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि विदेश जाने की चाहत रखने वाले बच्चों के लिए उनका सपना केवल डिग्री पाने की हसरत से कहीं ज्यादा है।

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