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दिवालिया होने वाला पहला विकसित देश होगा ग्रीस

Wed, 01 Jul 2015 12:03 PM IST
Updated Wed, 01 Jul 2015 12:03 PM IST
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Greece would be the first  Bankruptcy developed country

वक्त पर आईएमएफ का कर्ज न चुका पाने के चलते दिवालिया होने वाला दुनिया का पहला विकसित देश ग्रीस होगा। मंगलवार को ग्रीस ने स्पष्ट कर दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का कर्ज नहीं चुकाएगा।

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ग्रीस के वित्त मंत्री यानिस वारुफाकिस और प्रधानमंत्री एलेक्सिस सिप्रास ने स्पष्ट कहा कि ग्रीस आईएमएफ के 1.5 अरब यूरो (1.6 अरब डॉलर) के कर्ज का पुनर्भुगतान नहीं करेगा।
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अंदेशा इस बात की भी है कि ग्रीस को दी जाने वाली अंतरराष्ट्रीय राहत की समय-सीमा समाप्त होने के दिन वह यूरोजोन से बाहर हो जाएगा।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय राहत पैकेज की समय-सीमा समाप्त होने से कुछ घंटे पहले ही ग्रीस ने यूरोपियन यूनियन से दो साल का राहत पैकेज का अनुरोध किया है।

ग्रीस ने यह अपील अंतिम समय में की है जब विभिन्न उपायों के जरिए उसे यूरोजोन से बाहर न निकलने देने की कोशिशें की जा रही थीं। ग्रीस के यूरोजोन से बाहर होने का प्रतिकूल प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ-साथ यूरोपियन यूनियन पर भी हो सकता है।
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ताकि ग्रीस डिफॉल्टर न हो

Greece would be the first  Bankruptcy developed country

ग्रीस ने यूरोपियन स्टैबिलिटी मैकेनिज्म (ईएसएम) के साथ समझौते का अनुरोध किया है ताकि ‘पूरी तरह उसकी फाइनेंसिंग जरूरतों के साथ कर्ज का पुनर्गठन किया जा सके।’ ईएसएम 2012 में यूरोजोन के वित्तीय संकट के प्रबंधन के नजरिये से बनाया गया।

इसका उद्देश्य एक ही मुद्रा वाले क्षेत्र को स्थिर रखना है। ग्रीस के इस कदम के बाद यूरोग्रुप के प्रमुख जेरोएन डिज्सेलब्लोएम ने ट्वीट कर कहा कि ग्रीक के अनुरोध पर यूरोजोन के वित्त मंत्री टेलीकॉन्फ्रेंस करेंगे।

यूरोपियन यूनियन और ग्रीस के सरकारी सूत्रों ने कहा कि यूरोपियन कमीशन के प्रेसिडेंट जीन क्लाउड जंकर ने प्रधानमंत्री एलेक्सिस सिप्रास से सोमवार की रात बात की थी और मंगलवार को यूरोजोन के वित्त मंत्रियों की बैठक बुलाने का प्रस्ताव रखा था ताकि भुगतान की व्यवस्था को मंजूरी मिल सके और ग्रीस डिफॉल्टर न हो। इसकी शर्त थी कि सिप्रास लिखित तौर पर उनकी शर्तों को स्वीकार करें।

सरकार के समर्थन में लोग

Greece would be the first  Bankruptcy developed country

एक साक्षात्कार में सिप्रास ने कहा, ‘जब हमारे बैंकों की स्थिति ठीक नहीं है तो कर्जदाता आईएमएफ के कर्ज के पुनर्भुगतान का इंतजार कैसे कर सकते हैं?’ कर्जदाताओं के नए प्रस्ताव पर सरकार के विरोध के समर्थन में एथेंस और थेसालोनिकि शहर में रविवार की रात हजारों की संख्या में लोग अपनी सरकार के समर्थन में उतर पड़े।

कर्जदाताओं ने बैंकों को बंद रखने का दबाव बनाया था। सिप्रास ने नागरिकों से कहा कि वे रविवार (5 जुलाई) को होने वाले जनमत संग्रह में कर्जदाताओं के सुधार की मुश्किल मांगों को खारिज करें लेकिन इसके साथ ही उन्होंने देश को बचाने के लिए राहत की समय-सीमा बढ़ाने की सिफारिश भी की है।

ग्रीस के श्रम मंत्री पानोस स्कोरलेटिस ने चेतावनी दी कि यूरोप के नेता ग्रीस की सत्ताधारी वामपंथी पार्टी सिरिजा को डुबाना चाहते हैं ताकि अन्य देशों जैसे स्पेन में पोडेमोस जैसी पार्टियां न उभर सकें। उन्होंने कहा, ‘आज वे ग्रीस के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी कर रहे हैं, कल को वे स्पेन और इटली के मामलों में दखल देंगे।’

तुर्की ने बढ़ाया मदद का हाथ

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तुर्की दिवालिया होने के कगार पर पहुंचे ग्रीस की मदद के लिए तैयार है। तुर्की के प्रधानमंत्री अहमेट दावुतोग्लू ने कहा, ‘आर्थिक संकट से उबरने में ग्रीस की मदद करने के लिए हम तैयार है।

हम टूरिज्म, ऊर्जा और कारोबार में सहयोग करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘हम ग्रीस को मजबूत होते देखना चाहते हैं, इसलिए तुर्की सहयोग के किसी भी प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख रखेगा।’

ग्रीस के कारण यूरोजोन का आर्थिक सुधार संकट में
रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा है, ‘हमारा अनुमान है कि यूरोजोन की जीडीपी ग्रोथ 2014 के 0.9 प्रतिशत से बढ़ कर 2015-17 में लगभग 1.6 प्रतिशत हो जाएगी लेकिन ग्रीस और इसके कर्जदाताओं के बीच बातचीत विफल रहने और राहत प्रस्तावों पर जनमत संग्रह की घोषणा के कारण इसके यूरोजोन से निकलने के जोखिम बढ़ गए हैं। यह यूरोजोन के आर्थिक सुधारों के लिए जोखिम साबित हो सकता है। ’

भारत पर नहीं होगा असर

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भारतीय उद्योग जगत का कहना है कि आईएमएफ के कर्ज के भुगतान में डिफॉल्ट से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए भारत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह तैयार है।

सीआईसीआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘हमारे मैक्रो फंडामेंटल मजबूत हैं, चालू खाता घाटा भी नियंत्रण में है, विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है और रुपया लगातार स्थिर है।

ग्रीस संकट के किसी भी प्रतिकूल असर से निपटने के लिए अर्थव्यवस्था को ये जरूरी मजबूती देते हैं।’ पीएचडी चैंबर के प्रेसिडेंट आलोक बी श्रीराम ने कहा, ‘भारत कम अवधि की अस्थिरता से निबटने के लिए पूरी तरह तैयार है।’

जनमत संग्रह के बाद बात होगी: मार्केल
जर्मन चांसलर एंजेला मार्केल ने हाल में कहा था कि ग्रीस के साथ बातचीत के विकल्प अब भी खुले हुए हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब ग्रीस में पांच जुलाई को होने वाले जनमत संग्रह के बाद ही बात होगी।

मार्केल ने यह भी कहा कि अगर यूरो असफल होता है तो यूरोप भी असफल हो जाएगा। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी इस संकट को बातचीत से निपटाने पर जोर दे चुके हैं।

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