जर्मनी के चुनाव नतीजों से यहूदियों में भय, प्रदर्शन
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जर्मनी के चुनाव में रविवार को एंजेला मर्केल ने भले ही मतदाताओं का भरोसा दोबारा पाने में कामयाबी हासिल कर ली है, लेकिन 1945 में हिटलर की हार के बाद पहली बार देश में दक्षिणपंथी पॉपुलिस्ट पार्टी ‘एएफडी’ ने अपनी दस्तक दी है।
एएफडी जर्मनी की संसद में तीसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इसे लेकर यूरोप और अमेरिका के यहूदी संगठनों ने जर्मन चुनावों के नतीजों पर चिंता जताई और धुर दक्षिणपंथी पार्टी ‘एएफडी’ को रोकने के लिये जर्मन नेताओं से अपील की है।
दूसरे विश्वयुद्ध में हिटलर की हार से बाद से अब तक पिछले 72 सालों में जर्मनी के भीतर कोई धुर दक्षिणपंथी पार्टी संसद में इसलिए जगह नहीं पा सकी क्योंकि मतदाताओं ने ऐसी पार्टियों को बुरी तरह से खारिज कर दिया था। लेकिन रविवार हो चुनाव परिणामों की घोषणा के साथ यह तस्वीर बदल गई।
शुरुआत में ‘एएफडी’ नामक इस दक्षिणपंथी पार्टी के निशाने पर यूरोपीय संघ, यूरो मुद्रा और विदेशी कामगार रह चुके हैं। लेकिन 2015 में शुरू हुए रिफ्यूजी संकट ने पार्टी को नई हवा दी। पार्टी नेताओं ने खुलेआम नाजी जर्मनी पर गर्व करने जैसे विवादित बयान दिए। जर्मनी में इस्लाम के बढ़ते प्रभाव को मुद्दा बनाया और मौजूदा नतीजों में पार्टी इसमें सफल भी रही।
‘एएफडी’ की इस कामयाबी से यूरोप और अमेरिका के यहूदियों में भय और भविष्य के प्रति आशंका है। ‘वर्ल्ड यहूदी कांग्रेस’ के अध्यक्ष रोनाल्ड लाउडर ने कहा कि एएफडी ने ऐसे समय में सफलता पाई है जब दुनिया भर में यहूदी विरोध की भावना उभर रही है।
जर्मनी में फिर बढ़ रहा है यहूदी विरोध
लाउडर ने कहा कि जर्मनी के बुरे दौर को याद करने वाली पार्टी को बाहर किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसी पार्टी अब जर्मन संसद में अपने कट्टरवाद को बढ़ावा देगी। ‘यूरोपीय यहूदी कांग्रेस’ के अध्यक्ष जोसेफ शुष्टर ने भी जर्मनी की मध्यमार्गी राजनीतिक पार्टियों से एएफडी के साथ दूरी बनाने की अपील करते हुए कहा कि - ‘एक पार्टी जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा बढ़ाती है वह अब संसद व प्रांतीय विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व करेगी। यह बेहद खतरनाक होगा।’
जर्मनी में करीब दो लाख यहूदी रहते हैं। हिटलर की तानाशाही की सबसे ज्यादा मार झेलने वाले यहूदियों की नजर में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी की छवि एक सहिष्णु और सुरक्षित देश की बनी, लेकिन एएफडी की बढ़ती लोकप्रियता से यहूदी आशंकित हैं। 2017 के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक जर्मनी में इस साल अब तक यहूदी विरोध से प्रेरित अपराध के 681 मामले सामने आ चुके हैं.
बढ़ जाएगी चांसलर मर्केल की चुनौतियां
जर्मनी की चांसलर की पार्टी ने 2013 के मुकाबले में इस बार 10 फीसदी वोट खो दिए हैं। यही नहीं बल्कि जर्मनी की संसद में इस बार पांच के स्थान पर सात पार्टियां होंगी। जबकि दक्षिणपंथी पॉपुलिस्ट पार्टी एएफडी संसद में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। ये हालात एंजेला मर्केल के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होंगे।