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खतरे में अंडरवियर और निक्कर उद्योग
Updated Sun, 28 Jul 2013 03:21 PM IST
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जब पुरुषों के अंडरवियर और निक्कर की बात होती है तो सबसे पहले फ्रेंच लेबल के निक्कर का नाम सामने आता है। मगर अब कठोर श्रम क़ानूनों और भारी करों की वजह से फ्रांस का कपड़ा उद्योग चरमरा रहा है।
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इस कारण अपने उत्पाद को बाज़ार में बनाए रखने के लिए व्यापारी नए-नए और अनोखे तरीक़े अपना रहे हैं।
फ़्रांसीसी व्यापारी गिजोम जिबों बॉक्सर बनाने वाली कंपनी ले स्लिप फ़्रांसिस के निदेशक हैं। फ़्रांसीसी झंडे के सफ़ेद और लाल रंगों की पेटी वाले बॉक्सर को पहनकर देशभक्ति का अहसास करते हैं। इसके लिए वह ऊँचे दाम भी चुकाने को तैयार रहते हैं।
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इस पर मशीन से सिला हुआ कंपनी का लेबल भी होता है। यह ग्राहकों को लुभाने का एक तरीक़ा है।
28 साल के गिजोम जिबों भी वही कर रहे हैं, जो उनसे पहले कई फ्रांसीसी व्यापारी कर चुके हैं। लेकिन अब कम लोग फ़्रांस के कपड़ा व्यापार में रुचि ले रहे हैं।
1980 के दशक में 10 लाख से ज़्यादा लोग फ़्रांस के कपड़ा उद्योग में काम कर रहे थे। आज केवल एक लाख लोग इस उद्योग में शामिल हैं।
फ़्रांस का निक्कर उद्योग ऊँचे कर और कड़े श्रम क़ानूनों की वजह से कराह रहा है।
पिछले साल जब लक्ज़री अंडरवियर कंपनी लेजेबी ने अपना कारोबार फ़्रांस से हटाकर ट्यूनीशिया में स्थापित किया, तो देशभर में उत्पादन और श्रमिकों पर आने वाली लागत कम करने की मांग उठने लगी।
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पड़ोसी यूरोपीय देशों और एशिया से आने वाले सस्ते उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा में नाकाम बहुत सी कंपनियां बंद हो चुकी हैं।
बेहद चर्चा में रहे फ़्रांस के सामाजिक ढांचे ने उत्पादकों के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना नामुमकिन बना दिया है।
कठोर नियमावली
फ्रांसीसी व्यापारी गिजोम जिबों कहते हैं, "मैंने अपनी कंपनी 2011 में शुरू की थी। मेरे कारोबार पर सामाजिक शुल्कों और करों का भारी बोझ है। अगर ये न होते तो मैं कहीं ज्यादा तेज़ी से अपना व्यापार बढ़ा और फैला सकता था।"
3,200 पृष्ठों के फ़्रांस के "कोड डु ट्रेवेल" में रोज़गार के इश्तिहारों से लेकर मज़दूरों को नौकरी से निकालने तक के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं।
इस नियमावली का अधिकतर हिस्सा लगभग एक सदी पहले लिखा गया है।
जिबों कहते हैं, "मैं जानता हूँ कि फ़्रांस में व्यापार के लिए अच्छा माहौल नहीं है लेकिन हमें नए तरीक़े खोजने होंगे। मैं अब जापान जा रहा हूं ताकि वहां फ्रेंच लेबल को बेच सकूं।"
राष्ट्रपति पद के लिए हुए आखिरी चुनावों के दौरान उन्होंने अपने उत्पादों के प्रचार के लिए ऐसे ही नए तरीक़े खोजे थे।
फ्रांस्वा ओलांद का नारा "द टाइम फॉर चेंज इज़ नाउ" बदलकर उन्होंने "द टाइम फॉर चेंज योर पैंट नाउ" कर दिया। जबकि निकोलस सार्कोज़ी के नारे "ऐवरीथिंग इस पॉसिबल" यानी 'सब कुछ संभव है' से बदलकर 'ऐवरीथिंग इस पॉसिबल इन पैंट्स' बन गया।
चेतावनी
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और यूरोपीय कमीशन ने चेतावनी दी है कि भारी करों और ज़रूरत से ज्यादा श्रमिक नियमों से फ़्रांस के कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है और नए रोज़गार पैदा होने में बाधा आ रही है।
फ़्रांस के राष्ट्रपति और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य बार-बार यह कहते हैं कि फ़्रांस को एक महान राष्ट्र बनाना है लेकिन महान राष्ट्र के रास्ते में यह सामजिक आर्थिक ढ़ांचा बाधा बन रहा है।
गिजोम जिबों उदासी भरी मुस्कुराहट के साथ कहते हैं, "आप दो साल बाद मुझसे मिलने वापस आना। मैं आशा करता हूँ कि मैं आपको यहीं मिलूँगा, लेकिन मैं आपको इसकी कोई गारंटी नहीं दे सकता।"