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जीवन की तलाश में मंगल पर गया यूरोप का दूसरा मिशन भी फेल
एजेंसी/पेरिस
Updated Fri, 21 Oct 2016 06:24 AM IST
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- फोटो : demo pic
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मंगल पर जीवन की खोज के लिए गए यूरोपीय अंतरिक्ष यान का धरती पर उसके नियंत्रण कक्ष से संपर्क टूट गया है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) का कहना है कि यान की स्थिति के बारे में भी जानकारी नहीं मिल पा रही है। आशंका है कि शायद यह अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह के दबाव को सहन नहीं कर पाया। अगर यह वास्तव में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है तो मंगल पर उतरने की यूरोप की यह लगातार दूसरी असफल कोशिश होगी ।
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यूरोप ने 13 साल पहले भी मंगल पर यान भेजने की कोशिश की थी। तब 2003 में ब्रिटिश निर्मित बीगल 2 रोबोट प्रयोगशाला अपने मदरशिप ‘मार्स एक्सप्रेस’ से अलग होने के बाद बिना किसी सुराग के लापता हो गया था, जिसके अवशेष को अंत में पिछले साल नासा की एक तस्वीर में कैद की गई है। मंगल पर भेजा गया यह यान ‘शियापारेली’ आकार में बहुत छोटा था और मंगल ग्रह पर उतरने के चंद सेकेंड बाद ही सिग्नल देना बंद कर दिया।
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अतीत या वर्तमान में इस लाल ग्रह पर जीवन की खोज के लिए एक संयुक्त यूरोपीय-रूसी खोज के अभियान के तौर पर इस यान का मदरशिप ट्रेस गैस परिक्रमा (टीजीओ) मंगल ग्रह के कक्षा में पहुंचने में सफल रहा। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) में सौर और ग्रहों के मिशन प्रमुख आंद्रे एकोमाजो ने कहा कि यान को मंगल ग्रह पर अंतरराष्ट्रीय समय के अनुसार बुधवार अपराह्न 2 बजकर 48 मिनट पर उतरना था।
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यान तो मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक तो जरूर उतर गया लेकिन वह कोई संकेत नहीं दे रहा है। आगे के विश्लेषण के लिए शियापारेली को कुछ 600 मेगाबाइट डेटा भेजना आवश्यक है। लेकिन अब इससे संकेत नहीं मिल पा रहे हैं। इस बाबत जानकारी भी नहीं है कि ढांचागत रूप से यह जिंदा भी है या नहीं।