{"_id":"f6a95290ff33234979f0f4d5a5d0fa5c","slug":"eric-brocklebank-lightning-safety","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिजली गिरने के बाद कैसी हो जाती है जिंदगी?","category":{"title":"Europe","title_hn":"यूरोप","slug":"europe"}}
बिजली गिरने के बाद कैसी हो जाती है जिंदगी?
Updated Fri, 16 Aug 2013 08:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गर्मियों में चलने वाली आंधियों में अक्सर कहीं न कहीं बिजली गिरती है।
विज्ञापन
हर साल कुछ लोग बिजली गिरने से मर जाते हैं लेकिन कुछ लोग बच जाते हैं।
बिजली गिरना असल में स्थैतिक ऊर्जा का निकलना होता है जब धरती और बादलों के बीच विद्युत चार्ज बिगड़ जाता है।
सरल शब्दों में कहें तो ये आसमान में बहुत बड़ा इलेक्ट्रिक स्पार्क है।
एक बार की आसमानी बिजली एक अरब वोल्ट तक हो सकती है। इससे किसी के दिल की धड़कन रुक सकती है या उनके अंदरूनी अंग जल सकते हैं।
रॉयल सोसायटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ़ एक्सीडेंट्स के मुताबिक़ ब्रिटेन में हर साल आसमानी बिजली गिरने से कम से कम तीन लोग मर जाते हैं। अमेरिका में ऐसी मौतों की संख्या में गिरावट आई है लेकिन अब भी 30 लोगों की मौत हो जाती है।
ब्रिटेन में हर साल ऐसे लोगों की संख्या 60 तक होती है जो बिजली गिरने के बावजूद बच जाते हैं लेकिन ऐसा माना जाता है कि इनमें से तीन चौथाई लोग स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं।
विज्ञापन
इन्हीं लोगों में से एक हैं एरिक ब्रोकलबैंक, वह 68 साल के हैं। उन पर नौ जून 2009 को बिजली गिरी थी।
उन्होंने धातु की बनी एक मांस भुनने की छड़ पानी में से निकाली ही थी और उन पर बिजली गिर गई।
ब्रोकलबैंक का कहना है कि बिजली उस छड़ पर गिरी और वो छड़ उनके हाथ में पिघल गई।
विज्ञापन
जिन लोगों पर बिजली गिरती है उनके शरीर पर ‘लाइटनिंग ट्री’ या ‘लाइटनिंग फ्लावर’ नाम की एक आकृति बन जाती है जो ख़ून ले जाने वाली छोटी-छोटी वाहिनियों के फूटने से बनती है।
ब्रोकलबैंक की कलाई पर सबसे पहले बिजली गिरी थी फिर ये उनके बाएं और दाएं पैर से निकल गई। उनके दाएं पैर में तीन छेद हुए और बाएं पैर में दो छेद हुए।
उनकी क़िस्मत अच्छी थी कि वो ऐसे लोगों से घिरे हुए थे जो मदद करना जानते थे।
बिजली गिरने के चार साल बाद भी ब्रोकलबैंक शारीरिक और मानसिक दुख झेल रहे हैं।
उनका दम फूलता है और कभी-कभी व्हील चेयर का भी सहारा लेना पड़ता है।
ज़्यादातर लोग खुले मैदान या पेड़ों के नज़दीक़ होने के ख़तरे समझते हैं लेकिन आंधी के पहले या बाद में भी ख़तरा हो सकता है।
आसमानी बिजली से कैसे बचें?
- किसी बड़ी इमारत या कार में शरण लें
- खुले मैदान या पहाड़ी की चोटी में हैं तो वहां से हट जाएं
- लंबे और ऐसे पेड़ के नीचे शरण न लें जो इकलौता हो
- पानी में हों तो किनारे पर पहुंचें
डेनीज़ विंटरमैन/बीबीसी न्यूज़ मैगज़ीन