मजबूत पुठ्ठों के युवा पाएं लंबी उम्र का सुख

बीबीसी हिंदी Updated Sun, 25 Nov 2012 08:12 PM IST
early death link to muscle power
अगर आप अपनी किशोरावस्था में गठीले बदन और दमदार मांसपेशियों के मालिक थे तो आपकी उम्र अपने मोटे गोलू-मोलू दोस्तों से ज्यादा होगी, खास तौर पर अगर आप पुरुष हैं।

स्वीडन के विशेषज्ञों ने दस लाख से ज्यादा किशोर लड़कों पर 24 साल से अधिक तक निगाह रखी। उन्होंने पाया कि जिन किशोरों की मांसपेशियों में ज्यादा ताकत होती है वो उन किशोरों के मुकाबले ज्यादा सालों तक ज़िंदा रहते हैं जिनकी पिंडलियां और बाहें कमजोर होती हैं और हाथों की पकड़ ढ़ीली।

इस शोध के पीछे काम कर रहे लोगों का मानना है कि बेहतर मांसपेशियां बेहतर स्वास्थ्य का प्रतीक हैं। विशेषज्ञों ने इस बात पर खास जोर दिया है कि इसका मतलब ये नहीं है कि मांसपेशियां बनाने से उम्र लंबी होती है।

अध्ययन में जिनकी मांसपेशियां कमजोर थीं उनमें आगे चल कर उच्च रक्तचाप और मोटापा पाया गया जो जल्दी मौत का कारण बनती हैं। जब विशेषज्ञों ने जल्द मृत्यु से जुड़े इन स्थापित कारणों का गहराई से अध्ययन किया तो मांसपेशियों का लंबी उम्र से संबंध साफ हो गया।

बीमारी का कम खतरा
इस अध्ययन में मोटे और पतले वयस्क लोगों के बीच एक तरह के परिणाम सामने आए। जिस समयावधि में ये अध्ययन हुआ उस दौरान 26145 पुरुषों की मौत हुई। मौत का सबसे बड़ा कारण दुर्घटनाओं में लगी चोट थी उसके बाद आत्महत्या, कैंसर, दिल की बीमारियां और हृदयाघात मौत का कारण बने।

मरने वालों मं क़रीब तिहाई मौतें कई अन्य कारणों से हुई जिन्हें शोधकर्ताओं ने एक खाते में डाल दिया। अध्ययन के आरंभ में जिन किशोरों की मांसपेशियों में ज़्यादा ताकत थी उनको दिल की बीमारियों और इस तरह के अन्य रोगों से मौत का 25-30 प्रतिशत तक कम ख़तरा था। गठीले किशोरों को बड़े होने पर आत्महत्या का भी कम ख़तरा था। इसके आलावा उनको 65 फ़ीसदी मानसिक रोगों का भी कम खतरा था।

कसरत करें
वहीं जो किशोर 16-19 साल की उम्र में कमज़ोर होते हैं उनके 50 की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते मरने की सबसे ज्यादा आशंका होती है। इन किशोरों की ताकत और मांसपेशियों की ताकत भांपने के लिए इन्हें दंड बैठक करने को, कुछ खींचने जैसे काम करने को कहा गया।

ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन की एक प्रवक्ता का इस अध्यन पर कहना था कि शारीरिक रूप से सबल और चपल रहने के फायदे सालों से स्थापित हैं। कई अध्ययनों ने यह साबित किया है कि शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय बच्चे आगे चल कर स्वस्थ रहते हैं और साथ ही उनमें एकाग्रता भी अधिक रहती है।

लंदन स्कूल ऑफ हाईजीन और ट्रॉपिकल मेडिसिन के फार्माकोएपीडीमीयोलॉजी विभाग के प्रोफेसर स्टीफन ईवान्स का कहना है कि इस शोध से यह तो साबित होता है व्यायाम के फायदे हैं, लेकिन इससे यह नहीं साफ होता की अगर आप बड़े होने के बाद अधिक व्यायाम करेगें तो आप अधिक दिनों तक जीवित रहेंगे या नहीं। उनके अनुसार दुख की बात यह है कि इस तरह के अध्ययनों के बाद भी लोगों को व्यायाम करने के लिए प्रोत्साहित करना सबसे बड़ी चुनौती है।

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