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सॉफ्ट ड्रिंक्स पर टैक्स लगाओ..

Tue, 19 Feb 2013 10:41 AM IST
Updated Tue, 19 Feb 2013 10:41 AM IST
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doctors want fizzy drink tax and ban on fast food near schools

मोटापे जैसी बीमारी से लोगों को बचाना है तो सॉफ्ट ड्रिंक्स पर भारी कर लगना चाहिए और जंक फूड्स के विज्ञापनों पर रोक लगा देनी चाहिए। ये कहना है ब्रिटेन के डॉक्टरों की एक बड़ी संस्था का।

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एकेडमी ऑफ मेडिकल रॉयल कॉलेज की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोटापा, खासकर कमर की चौड़ाई का बढ़ना आज एक बड़ी समस्या बनती जा रही है।

रिपोर्ट का कहना है कि मोटापे को कम करने के लिए जो भी कदम उठाए गए वो पर्याप्त नहीं थे। ऐसे में इस तरह के हानिकारक खाद्य पदार्थों के खिलाफ कुछ ऐसे ही अभियान चलाना होगा जैसा कि सिगरेट के खिलाफ चलाया जाता है।
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ब्रिटेन दुनिया का ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा मोटे लोग हैं। यहां लगभग हर चौथा वयस्क मोटापे का शिकार है। माना जा रहा है कि ये आंकड़ा साल 2050 तक दोगुना हो जाएगा।
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डॉक्टरों को डर है कि मोटापे की समस्या देश की एक बड़ी समस्या स्वास्थ्य समस्या बन जाएगी।

एकेडमी ऑफ मेडिकल रॉयल कालेज ब्रिटेन के तमाम डॉक्टरों का एक संयुक्त मंच है। एकेडमी के डॉक्टरों का कहना है कि वे अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के दुष्परिणाम को देख रहे हैं जो इससे पहले और कभी नहीं देखा गया।

कठोर अभियान

एकेडमी के चेयरमैन प्रोफेसर टेरेन्स स्टीफेंसन इसके खिलाफ वैसा ही अभियान चलाने की वकालत करते हैं जैसा कि धूम्रपान के खिलाफ चलाया जा रहा है।

वो कहते हैं, “विज्ञापन पर रोक लगाने जैसी चीजें और खेल की गतिविधियों से धूम्रपान को अलग करने जैसे अभियानों से लोगों को धूम्रपान से दूर करने में काफी मदद मिली है।”

वो कहते हैं कि मोटापा कम करने के लिए भी कोई ब्रह्मास्त्र नहीं है, बल्कि इसके लिए पूरे समुदाय को जागरूक बनाना होगा ताकि वो अपने बारे में स्वस्थ फैसला ले सके।

रिपोर्ट में वैसे तो बहुत सी सिफारिशें हैं लेकिन प्रोफेसर स्टीफेंसन चीनीयुक्त पेय पदार्थों को सबसे ज्यादा खतरनाक बताते हैं।

वो कहते हैं, “इन पेय पदार्थों पर टैक्स बढ़ाकर लोगों को स्वास्थ्यप्रद पेय पदार्थों के सेवन के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।”

लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है। खाद्य पदार्थों के उत्पादन संघ से जुड़े टेरी जोन्स कहते हैं कि ये रिपोर्ट बेकार है और ये बेमतलब की बहस को बढ़ावा देना चाहती है।

उनके मुताबिक, “इस रिपोर्ट की सिफारिशें बहुत ही असंतुलित विचारों से भरी हैं और इन पर एक खास दबाव समूह का प्रभाव स्पष्ट देखा जा सकता है।”

ब्रिटेन के सॉफ्ट ड्रिंक्स असोसिएशन ने ऐसे पेय पदार्थों पर कर लगाने के विचार को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इनका कहना है कि इन पेय पदार्थों में कुल कैलोरी का महज 2 फीसदी होता है और ऐसे में इनसे मोटापा कैसे हो सकता है।


डॉक्टर असीम मलहोत्रा एक हृदय रोग विशेषज्ञ हैं और उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने में मदद की है। उनके मुताबिक उनके कई मरीज मोटापे से जुड़ी समस्याओं से ग्रस्त हैं।

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